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हाईकोर्ट से शुभेंदु को लगा झटका, नवान्न के सामने धरने की इजाज़त नहीं; अदालत ने किया साफ

कोलकाता। आई-पैक के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कंपनी कार्यालय में ईडी की तलाशी कार्रवाई में कथित बाधा के विरोध में नवान्न के सामने धरना देने की अनुमति की मांग को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट. . .

कोलकाता। आई-पैक के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कंपनी कार्यालय में ईडी की तलाशी कार्रवाई में कथित बाधा के विरोध में नवान्न के सामने धरना देने की अनुमति की मांग को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोई सीधा आदेश नहीं दिया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की इस मांग पर अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाया।
न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने कहा कि नवान्न के सामने धरने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, नवान्न बस स्टैंड या मंदिरतला बस स्टैंड-इन दो स्थानों में से किसी एक जगह पर धरना देने की अनुमति दी जा सकती है। इन दोनों में से एक स्थान चुनकर अदालत को सूचित करने को कहा गया है। इसके बाद न्यायमूर्ति गुरुवार सुबह लिखित आदेश जारी करेंगी।

अदालत में दलीलें

नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी 16 जनवरी को 15–16 विधायकों के साथ नवान्न के सामने धरना कार्यक्रम करना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान उनके वकील बिल्वदल भट्टाचार्य ने कहा कि,
“यदि 9 जनवरी को राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी को 24 घंटे के भीतर दक्षिण कोलकाता में विशाल रैली की अनुमति दी जा सकती है, तो केवल 15 विधायकों के शांतिपूर्ण धरने को रोका नहीं जा सकता।”
उन्होंने बताया कि जब 12 जनवरी को पुलिस से अनुमति मांगी गई, तो पुलिस ने यह कहकर इनकार कर दिया कि नवान्न के सामने जगह छोटी है। पुलिस ने वैकल्पिक रूप से मंदिरतला बस स्टैंड के सामने धरना देने का सुझाव दिया और यह भी कहा कि नवान्न के सामने बीएनएस की धारा 163 लागू है।

बीएनएस की धारा 163 लागू होना केवल एक बहाना

वकील ने आगे दलील दी कि शांतिपूर्ण विरोध और धरना देना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, जिसे छीना नहीं जा सकता। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में राजभवन के सामने सत्तारूढ़ दल को लगातार पांच दिनों तक धरना देने की अनुमति दी गई थी। उस समय सीआरपीसी की धारा 144 का हवाला देकर अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने धरने की इजाज़त दी थी।
उनका कहना था कि नवान्न के सामने बीएनएस की धारा 163 लागू होना केवल एक बहाना है। पुलिस कानून के तहत नियंत्रण या प्रतिबंध लगा सकती है, लेकिन धरना या रैली पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकती।

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