ब्रह्मपुर: ओडिशा के ब्रह्मपुर से एक दुखद खबर सामने आई है। दो सिर और एक धड़ के साथ जन्मे दुर्लभ जुड़वां बच्चों की जन्म के कुछ दिनों बाद सरकारी एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मौत हो गई। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन उनकी गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, बच्चों का जन्म 11 अक्टूबर को सिजेरियन प्रसव के जरिए हुआ था। वे ‘डाइसेफेलिक पैरापैगस’ नामक एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात स्थिति से पीड़ित थे। इस स्थिति में जुड़वां बच्चों के दो सिर होते हैं, जबकि उनका शरीर नीचे की ओर जुड़ा रहता है।
क्या है डाइसेफेलिक पैरापैगस की स्थिति?
चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार, डाइसेफेलिक पैरापैगस जुड़े हुए जुड़वां बच्चों की एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें दो सिर और एक साझा धड़ होता है। ऐसे मामलों में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की संरचना और कार्यप्रणाली में जटिलताएं हो सकती हैं। बच्चों की स्थिति के आधार पर उपचार बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि यह मामला असाधारण था। एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इस तरह के जन्म का यह पहला मामला बताया गया है। चिकित्सकों ने बच्चों की जान बचाने के लिए विशेष निगरानी और उपचार के प्रयास किए, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका।
डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद नहीं बच सकी जान
एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की अधीक्षक सुदीपा दास के अनुसार, चिकित्सकों की एक टीम बच्चों के उपचार में लगी हुई थी। तमाम प्रयासों के बावजूद शनिवार को दोनों बच्चों की मौत हो गई। बच्चों की मां 22 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर हैं और ओडिशा के कंधमाल जिले के एक दूरस्थ गांव की रहने वाली हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यह महिला का पहला प्रसव था।
बच्चों की मौत से सदमे में परिवार
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सिजेरियन प्रसव के बाद बच्चों की स्थिति को लेकर माता-पिता पहले से ही सदमे में थे। दोनों बच्चों की मौत के बाद परिवार की पीड़ा और बढ़ गई। शुरुआत में माता-पिता ने बच्चों के शव लेने से भी इनकार कर दिया था। ऐसी कठिन परिस्थिति में परिवार को संभालना और अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। बाद में प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप किया और परिजनों को समझाने का प्रयास किया।
जिला प्रशासन की पहल के बाद गांव भेजे गए शव
अस्पताल अधीक्षक सुदीपा दास ने बताया कि गंजाम जिला प्रशासन के हस्तक्षेप और अधिकारियों की समझाइश के बाद शनिवार देर शाम बच्चों के शव उनके पैतृक गांव भेज दिए गए। यह घटना दुर्लभ जन्मजात स्थितियों में समय पर चिकित्सकीय देखभाल और परिवार को भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने के महत्व को भी सामने लाती है। फिलहाल इस दुखद घटना के बाद परिवार अपने बच्चों को खोने के गहरे सदमे से गुजर रहा है।