नई दिल्ली: भारत और पोलैंड अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में अहम बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों का लक्ष्य सालाना द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा करीब 6 अरब डॉलर से बढ़ाकर 10 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। टस्क की 21 से 23 अक्टूबर तक की भारत यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार से रक्षा तक, साझेदारी मजबूत करने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड टस्क की मुलाकात में भारत-पोलैंड संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग को विस्तार देने के साथ-साथ रक्षा और आधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने पर भी विचार-विमर्श किया। रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक को संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, कंपनियों के बीच साझेदारी और कारोबारी संपर्क बढ़ाकर दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।
6 अरब डॉलर से 10 अरब डॉलर तक व्यापार पहुंचाने की योजना
भारत और पोलैंड के आर्थिक संबंधों को लेकर सबसे अहम लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ोतरी करना है। भारत में पोलैंड के पूर्व राजदूत एडम बुराकोव्स्की के अनुसार, दोनों देश सालाना व्यापार को करीब 6 अरब डॉलर से बढ़ाकर 10 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों की कंपनियों के बीच सहयोग, निवेश और कारोबारी मंचों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। व्यापारिक संबंधों के विस्तार से उद्योगों को नए बाजार मिल सकते हैं और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता भी इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे व्यापारिक बाधाएं कम करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के अवसर पैदा हो सकते हैं।
रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र पर क्यों है खास नजर?
भारत और पोलैंड के बीच सहयोग का दायरा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी साझेदारी की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से तकनीकी आदान-प्रदान, औद्योगिक साझेदारी और अनुसंधान के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। हालांकि, किसी विशेष रक्षा परियोजना या अंतरिक्ष समझौते को लेकर इस वार्ता के दौरान क्या अंतिम निर्णय हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक से पहले पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने गुरुवार सुबह राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने राष्ट्रपिता की समाधि पर पुष्पांजलि चढ़ाई। टस्क बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत पहुंचे थे। उनके साथ पोलैंड के वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की और कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आया है। इस प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी से यात्रा में आर्थिक और व्यावसायिक सहयोग को मिलने वाले महत्व का संकेत मिलता है।
एस. जयशंकर से मुलाकात में भी सहयोग पर चर्चा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी गुरुवार को पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए भारत-पोलैंड सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए टस्क के विचारों की सराहना की। यह बैठक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।
बेंगलुरु में IT और अंतरिक्ष क्षेत्र के प्रतिनिधियों से मिलेंगे टस्क
भारत यात्रा के अगले चरण में पोलैंड के प्रधानमंत्री नई दिल्ली में आयोजित भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद 23 अक्टूबर को वह बेंगलुरु जाएंगे। बेंगलुरु में टस्क की मुलाकात भारत के सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों से होने की उम्मीद है। इस दौरान तकनीकी सहयोग, निवेश और कारोबारी साझेदारी के अवसरों पर चर्चा हो सकती है।
भारत की रणनीति क्या है?
भारत के लिए पोलैंड के साथ संबंध मजबूत करना यूरोप के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने का अवसर है। व्यापार बढ़ाने, रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक में सहयोग तलाशने तथा कंपनियों के बीच संपर्क मजबूत करने से भारत को यूरोपीय बाजारों में अपनी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं, पोलैंड के लिए भारत एक बड़ा बाजार और तकनीकी सहयोग का महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार को 10 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य इस साझेदारी को व्यावहारिक आर्थिक लाभ में बदलने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। कुल मिलाकर, मोदी और टस्क की मुलाकात भारत-पोलैंड संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि बातचीत के आधार पर व्यापार, रक्षा, अंतरिक्ष और तकनीक के क्षेत्रों में कौन-सी ठोस पहल आगे बढ़ती हैं।