डेस्क। फिल्म ‘लगान’ में बाघा का किरदार आपको याद होगा? इस रोल को अभिनेता अमीन हाजी ने बड़ी खूबसूरती से निभाया। मगर, उनका कहना है कि इस फिल्म ने उनके करियर की धज्जियां उड़ा दीं।
आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘लगान’ की रिलीज को इस साल 25 साल पूरे हो गए हैं। इस फिल्म में हर किरदार अनूठा था। ‘लगान’ में बाघा का यादगार किरदार अभिनेता अमीन हाजी ने निभाया। हाल ही में उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि इस फिल्म ने उन्हें बर्बाद कर दिया। जानिए अमीन ने ऐसा क्यों और किस संदर्भ में कहा है?
लगान के बाद क्यों ‘बर्बाद’ हुए अमीन हाजी?
अमीन हाजी ने हाल ही में समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में यह चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस फिल्म में बाघा के किरदार ने उनके अभिनय का स्तर इतना ऊंचा कर दिया कि इसके बाद मिलने वाले रोल उन्हें पसंद ही नहीं आए। अमीन हाजी ने बताया कि इस ऑस्कर नामांकित फिल्म में बाघा के किरदार ने उन्हें पेशेवर तरीके से बर्बाद कर दिया।
ऑफर तो मिले, मगर अमीन ने ठुकरा दिए
उन्होंने बताया कि फिल्म के बाद आए ज्यादातर किरदारों के ऑफर उन्होंने ठुकरा दिए। बाद में उन्होंने राइटिंग की तरफ रुख करने का फैसला लिया। अमीन हाजी ने कहा, ‘मैं दरअसल, बाघा के जरिए मुझे जो सम्मान मिला, मैं कोई दूसरा किरदार करके उसकी धज्जियां नहीं उड़ाना चाहता था। साथ ही, मैं कोई बहुत अच्छा एक्टर नहीं हूं। ‘लगान’ की स्क्रिप्ट, डायरेक्टर और टीम की वजह से ही मैं अच्छा काम कर पाया। उन सभी ने मेरी मदद की’।
अमीन को किस बात का डर था?
अमीन हाजी को इस बात का डर था कि दूसरे सेट पर उनकी असलियत सामने आ जाएगी और लोगों को यह पता चल जाएगा कि वे कोई बहुत अच्छे एक्टर नहीं हैं। अभिनेता ने अपनी स्थिति बताने के लिए जगजीत सिंह के गाने ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ के शेर कोट किए। उन्होंने कहा, ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी के हर ख्वाहिश पे दम निकले…बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले’। एक्टर ने कहा, ‘इस फिल्म में मेरे सब अरमान पूरे हो गए। मेरे लिए एक बार लगान हो गई ना, अब मैं एक्टिंग नहीं करना चाहता था। मुझे ऑफर मिल रहे थे। मगर, कोई किरदार बाघा के बराबर नहीं था’।
‘लगान’ को बताया सिनेमा का स्कूल
अमीने ने आगे बताया कि मैंने जब ऑफर रिजेक्ट किए तो मेरी पत्नी और आशुतोष गोवारिकर ने मुझसे पूछा कि तू करेगा क्या फिर? मैंने कहा, ‘मुझे एक्टिंग नहीं करनी है।’ आशुतोष ने कहा कि क्या तुम मेरे साथ ‘देश’ (फिल्म ‘स्वदेश’ का शुरुआती नाम) लिखोगे? तुमने लगान में भी काफी रिएक्शन दिए हैं। इस तरह मैं ‘लगान’ और आशुतोष की वजह से राइटर बना। उन्होंने आगे कहा कि फिल्म लगान मेरे लिए एक यूनिवर्सिटी की तरह रही। यह फिल्म सिनेमा का स्कूल थी, जिसने मुझे बहुत कुछ सिखाया। इस फिल्म को लेकर बात करते हुए वे भावुक भी हुए। उनके आंसू छलक आए। बता दें कि फिल्म ‘लगान’ 15 जून 2001 को रिलीज हुई थी। इसका निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया।