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‘उनके दस्तावेज चार्टर्ड फ्लाइट से, हमारे सड़क मार्ग से…’, ऋतब्रत बनर्जी का बड़ा आरोप; तृणमूल के दो गुटों में घमासान तेज

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के बीच पार्टी पर अधिकार. . .

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के बीच पार्टी पर अधिकार को लेकर खींचतान जारी है। इस बीच ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग में जमा किए जाने वाले उनके गुट के दस्तावेज छीनने की कोशिश की गई। ऋतब्रत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि उनके कार्यकर्ता दस्तावेज लेकर सड़क मार्ग से जा रहे थे, तभी रास्ते में उन्हें छीनने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने साहस दिखाते हुए इस कोशिश को नाकाम कर दिया। दूसरी ओर, ममता बनर्जी के समर्थक खेमे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे मनगढ़ंत कहानी बताया है।

तृणमूल का असली वारिस कौन? चुनाव आयोग करेगा फैसला

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके चुनाव चिह्न ‘जोड़ाफूल’ पर अधिकार को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। दोनों पक्षों को अपने समर्थन और संगठन से जुड़े दस्तावेज आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने हैं। आयोग इन दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर यह तय करेगा कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का दावा मान्य है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 26 अक्टूबर को दस्तावेज जमा करने की अंतिम तारीख निर्धारित थी। वहीं, 30 अक्टूबर को दोनों गुटों को आमने-सामने सुनवाई के लिए बुलाए जाने की बात कही गई है। इस विवाद के बीच अब दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

ऋतब्रत बनर्जी का आरोप—दस्तावेज छीनने की हुई कोशिश

ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके गुट के कार्यकर्ता चुनाव आयोग में जमा करने के लिए जरूरी दस्तावेज लेकर सड़क मार्ग से रवाना हुए थे। उनके मुताबिक, कार्यकर्ता 24 अक्टूबर की सुबह ही इस काम के लिए निकले थे। ऋतब्रत ने आरोप लगाया कि रास्ते में दस्तावेज छीनने की कोशिश की गई। हालांकि, उनके अनुसार कार्यकर्ताओं ने विरोधियों की इस कोशिश को सफल नहीं होने दिया और दस्तावेज सुरक्षित रखे। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दोनों गुटों के दस्तावेज भेजने के तरीकों की तुलना करते हुए सवाल उठाया कि एक पक्ष के दस्तावेज चार्टर्ड विमान से भेजे जा रहे हैं, जबकि उनके गुट को सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है। ऋतब्रत ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह की कथित कोशिशों से उनका गुट पीछे हटने वाला नहीं है। हालांकि, दस्तावेज छीनने की कोशिश किए जाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में दूसरे पक्ष का बयान और आधिकारिक जांच की जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

कुणाल घोष ने आरोपों को बताया ‘मनगढ़ंत कहानी’

ऋतब्रत बनर्जी के आरोपों पर ममता बनर्जी समर्थक खेमे के विधायक कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दस्तावेज छीनने की कोशिश किए जाने के दावे को खारिज करते हुए इसे अविश्वसनीय बताया। कुणाल घोष का आरोप है कि ऋतब्रत के गुट को अपने समर्थन में विधायकों के हस्ताक्षर जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि इसीलिए अब इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कथित तौर पर सदस्यों और समर्थकों से फॉर्म भरवाए गए तथा पुलिस का इस्तेमाल किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। कुणाल घोष ने दस्तावेजों से जुड़े विवाद पर तंज कसते हुए कहा कि ट्रक या दस्तावेज छीनने की कहानी पर विश्वास करना मुश्किल है। इस तरह ममता समर्थक खेमे ने ऋतब्रत के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। हालांकि, दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही हो सकती है।

कोहिनूर मजूमदार ने भी उठाए सवाल

ऋतब्रत के गुट के नेता कोहिनूर मजूमदार ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष की ओर से पहले कुछ विधायकों के समर्थन का दावा किया गया था, लेकिन बाद में उनके रुख को लेकर अलग-अलग बातें कही जाने लगीं। कोहिनूर मजूमदार के मुताबिक, उनके गुट के कार्यकर्ताओं ने सदस्यों के हलफनामे जुटाए हैं और उन्हें चुनाव आयोग में जमा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके गुट को कमजोर करने और उसके दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना बाकी है।

ममता बनर्जी के आवास पर हलफनामे जमा करने को लेकर भी विवाद

इस पूरे मामले में हलफनामों को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। ममता बनर्जी के आवास पर हलफनामे जमा किए जाने की तस्वीरें पहले सामने आने की बात कही गई थी। ऋतब्रत समर्थक खेमे ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन का इस्तेमाल करके मतदाता सूची के आधार पर कथित तौर पर गलत हलफनामे तैयार किए जा रहे हैं। दूसरी ओर, ममता समर्थक खेमे ने ऋतब्रत के गुट के समर्थन और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए हैं। फिलहाल, हलफनामों की सत्यता और दोनों पक्षों के समर्थन से जुड़े दावों पर अंतिम निष्कर्ष चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत सामग्री और संबंधित तथ्यों की जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।

30 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें

तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न पर अधिकार का फैसला दोनों गुटों के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि चुनाव आयोग किसी एक पक्ष के दावे को मान्यता देता है, तो पार्टी की पहचान, संगठनात्मक अधिकार और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल दोनों गुट अपने-अपने समर्थन के दस्तावेज पेश करने और दूसरे पक्ष के दावों पर सवाल उठाने में जुटे हैं।

आगे क्या होगा?

  • चुनाव आयोग के समक्ष दोनों गुटों के दस्तावेजों और समर्थन से जुड़े प्रमाणों की जांच होगी।
  • 30 अक्टूबर को प्रस्तावित सुनवाई में दोनों पक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं।
  • दस्तावेज छीनने की कथित कोशिश के आरोप पर स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
  • पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम स्थिति चुनाव आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगी।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद अब दस्तावेजों, हलफनामों और कथित हस्तक्षेप के आरोपों तक पहुंच गया है। ऋतब्रत बनर्जी ने दस्तावेज छीनने की कोशिश का आरोप लगाया है, जबकि कुणाल घोष ने इसे मनगढ़ंत बताया है। अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग की सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी हैं।

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