नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी कर राज्य के विकास, कानून-व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं के मुद्दों पर अपनी बात रखी है। हिन्दी और बंगला में लिखे इस पत्र में पीएम ने कहा कि मेरे सोनार बंगाल का सपना देखने वाला हर व्यक्ति पीड़ा में है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र की शुरुआत मां काली के जयकारे के साथ की। उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल की धरती ने देश को अनेक महान विभूतियां दी हैं।उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने जनकल्याण और समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है
युवाओं का रोजगार के लिए पलायन का मुद्दा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां की जनता से राज्य के वर्तमान हालात की बात की और भविष्य को लेकर बड़े-बड़े वादे और दावे किए। उन्होंने राज्य की जनता से कहा कि पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों पर राज्य की अगली पीढ़ी का भविष्य निर्भर करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की बात की और साथ ही यह याद दिलाया कि कभी बंगाल औद्योगिक विकास में अग्रणी था पर आज वहां के हालात जर्जर हैं तो उसकी वजह पिछले छह दशकों के कुशासन और तुष्टिकरण की राजनीति है। इस दौरान पीएम मोदी ने यह भी लिखा कि राज्य का युवा अन्य राज्यों में रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर है तो मां-बहनें बंगाल में आज सुरक्षित महसूस नहीं करतीं।
उन्होंने बताया कि किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीब वर्ग के लिए चलाई गई योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि राज्य सरकार के असहयोग के बावजूद केंद्र की कई योजनाओं का लाभ पश्चिम बंगाल के लाखों लोगों तक पहुंचा है।
उन्होंने लिखा कि समाज के हर वर्ग तक, कई योजनाओं का असर जमीन पर दिख रहा है। उदाहरण के तौर पर ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के जरिए करोड़ों महिलाओं को आर्थिक मदद मिलने की बात कही गई। उज्ज्वला योजना के माध्यम से महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली और किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता दी गई। जन-धन योजना के तहत करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। ‘स्वच्छता अभियान’ के तहत लाखों शौचालय बनने, छोटे व्यापारियों को करोड़ों के लोन मिलने और बुजुर्गों को पेंशन मिलने जैसे आंकड़े गिनाए गए। साथ ही कहा गया कि किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देकर उनके चेहरों पर मुस्कान लाने की कोशिश की गई है।
महिलाओं की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने बंगाल को विकसित और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया है।अवैध घुसपैठ और महिलाओं के प्रति हिंसा से राज्य कलंकित हुआ है. वोट बैंक की संकीर्ण राजनीति, हिंसा और अराजकता में राज्य जकड़ा हुआ है। नकली वोटर हावी हो रहे हैं. कुछ हिस्सों में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई गई और कहा गया कि बंगाल की पवित्र धरती को इन समस्याओं से मुक्त करना जरूरी है। संदेश में यह भी कहा गया कि अब समय बदलाव का है, क्योंकि देश के कई राज्यों में जीवन स्तर बेहतर हुआ है और वही प्रगति बंगाल में भी लाई जा सकती है।।पीएम ने लिखा कि अवैध घुसपैठ से मुक्त होकर सुशासन पर चलना होगा. पीएम ने कहा कि यह परिवर्तन अनिवार्य है।
पत्र में ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रविंद्रनाथ टैगोर का उल्लेख किया और कहा कि जिन महान व्यक्तित्वों ने बंगाल को गौरव दिलाया, आज उसी धरती को नई दिशा देने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करते हुए राज्य के विकास में उनके दृष्टिकोण का जिक्र किया।
‘विकसित पश्चिम बंगाल’ बनाने का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत से स्वास्थ्य सुरक्षा, गरीबों के लिए आवास और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून के जरिए शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात भी दोहराई।
पत्र के अंत में प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे “विकसित पश्चिम बंगाल” के निर्माण के लिए आगे आएं. उन्होंने कहा कि 2026 तक राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
इस पत्र को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह जनता के नाम सीधी अपील के रूप में देखा जा रहा है। राज्य में टीएमसी और बीजेपी के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा के बीच यह पत्र चुनावी विमर्श को और तेज कर सकता है।