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इंद्रनील सेन को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज; UNESCO के नाम पर टिकट बेचने के आरोपों की जांच तेज

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की अदालत ने कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया।. . .

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की अदालत ने कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया। इसी मामले में मास आर्ट संस्था के सचिव ध्रुवज्योति बोस की अग्रिम जमानत याचिका भी अदालत ने खारिज कर दी। यह मामला दुर्गापूजा के दौरान यूनेस्को (UNESCO) के नाम और लोगो का कथित तौर पर अवैध इस्तेमाल करके प्रीव्यू शो और विशेष प्री-पुजा प्रवेश के टिकट बेचने से जुड़ा है। शिकायत के बाद कोलकाता के बऊबाजार थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कथित वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हुआ।

क्या है पूरा मामला? दुर्गापूजा के टिकटों की बिक्री पर विवाद

आरोप है कि इंद्रनील सेन, उनकी पत्नी मधुछंदा सेन और अन्य संबंधित लोगों ने यूनेस्को के नाम तथा लोगो का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करके दुर्गापूजा के विशेष कार्यक्रमों के टिकट बेचे। इन कार्यक्रमों में पूजा से पहले आयोजित होने वाला ‘प्रीव्यू शो’ और ‘प्रिविलेज्ड प्री-पुजा एंट्री’ शामिल बताए गए हैं। इस मामले को लेकर कोलकाता के बऊबाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद जांच शुरू हुई। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू टिकटों की बिक्री से प्राप्त धन और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन का पता लगाना है। हालांकि, यूनेस्को के नाम और लोगो के इस्तेमाल से संबंधित आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।

पत्नी की संस्था मास आर्ट भी जांच के दायरे में

मामले में मास आर्ट नामक संस्था का भी उल्लेख है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह संस्था इंद्रनील सेन की पत्नी मधुछंदा सेन से जुड़ी है। संस्था के सचिव ध्रुवज्योति बोस ने भी इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। गुरुवार को न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी से संबंधित मास आर्ट के बैंक खातों के लेनदेन से जुड़ी जानकारी पर विचार किया। इसके बाद अदालत ने इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। ध्रुवज्योति बोस की याचिका भी खारिज कर दी गई।

जांच में 2.9 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आने का दावा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने अदालत को बताया कि मधुछंदा सेन और कुछ अन्य लोगों ने मास आर्ट नामक संस्था बनाई थी। इस संस्था ने कोलकाता की 24 दुर्गापूजा समितियों के साथ समझौते किए थे।राज्य सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया कि जांच में करीब 2.9 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। इसके अलावा, वित्तीय गतिविधियों की जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया और उसकी रिपोर्ट प्राप्त होने की जानकारी अदालत को दी गई। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि यूनेस्को के नाम पर टिकट बेचे गए और प्राप्त राशि का बंटवारा एक तय अनुपात के अनुसार किया जाता था। सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया कि कुछ रकम संबंधित लोगों के पास जाती थी। ये आरोप अभियोजन पक्ष की दलीलों पर आधारित हैं। इनकी सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

इंद्रनील सेन के वकील ने क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान इंद्रनील सेन के वकील ने कहा कि दुर्गापूजा से पहले प्रीव्यू शो आयोजित किए जाते थे और इसके लिए 24 पूजा समितियों का चयन किया गया था। उन्होंने दलील दी कि कार्यक्रमों के लिए टिकटों की बिक्री हुई थी और पहले किसी ने इस संबंध में शिकायत नहीं की थी। वकील की ओर से यह बताने की कोशिश की गई कि कार्यक्रम का आयोजन पूजा समितियों के साथ मिलकर किया गया था। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने वित्तीय लेनदेन और यूनेस्को के नाम के कथित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और संबंधित वित्तीय विवरणों पर विचार करने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

ED भी कर रहा है मामले की जांच

मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं के पहलू को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय भी जांच में शामिल हुआ है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ED ने इंद्रनील सेन के कसबा स्थित आवास पर तलाशी ली थी। इसके अलावा, पूर्व मंत्री को कोलकाता स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में बुलाकर पूछताछ भी की गई थी। इससे पहले अदालत के एक आदेश से इंद्रनील सेन को कुछ समय के लिए राहत मिली थी। अदालत ने इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी के बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज भी मांगे थे। अब अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

अग्रिम जमानत खारिज होने का क्या मतलब है?

अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने का अर्थ है कि अदालत ने संबंधित व्यक्ति को इस मामले में गिरफ्तारी से पहले संरक्षण देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, केवल याचिका खारिज होने से आरोप साबित नहीं हो जाते और न ही इसे दोषसिद्धि माना जा सकता है। इंद्रनील सेन के मामले में अब जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई, वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्य और संबंधित पक्षों की दलीलें अहम रहेंगी। मामले का अंतिम परिणाम न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगा। फिलहाल, कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले से पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और मास आर्ट संस्था के सचिव ध्रुवज्योति बोस को अग्रिम जमानत के मोर्चे पर राहत नहीं मिली है।

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