कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई, जब नवादा से विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीर स्वयं हुमायूं कबीर ने सामाजिक माध्यम पर साझा की। खास बात यह है कि यह बैठक विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा दी गई कड़ी चेतावनी के कुछ समय बाद हुई, जिससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हुमायूं कबीर बोले- यह केवल शिष्टाचार मुलाकात थी
हुमायूं कबीर ने मुलाकात को पूरी तरह शिष्टाचार भेंट बताया। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान मुर्शिदाबाद जिले के विकास, क्षेत्र की लंबित समस्याओं और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उनके अनुसार मुख्यमंत्री ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और विकास कार्यों के प्रति सकारात्मक रुख अपनाने का भरोसा दिया।
दो प्रमुख विकास परियोजनाओं की रखी मांग
बैठक में हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री के समक्ष दो महत्वपूर्ण विकास प्रस्ताव रखे। उन्होंने नवादा विधानसभा क्षेत्र के किसानों के लिए आधुनिक वातानुकूलित शीतगृह बनाने की मांग की, ताकि कृषि उपज का सुरक्षित भंडारण हो सके। इसके अलावा रेजिनगर विधानसभा क्षेत्र के लोगों की आवाजाही आसान बनाने के लिए भागीरथी नदी पर नए पुल के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र के विकास और आवागमन दोनों को गति मिलेगी।
विधानसभा में मुख्यमंत्री ने दी थी सख्त चेतावनी
हाल ही में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हुमायूं कबीर को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा था कि, “मैं तुम्हें आखिरी बार चेतावनी दे रहा हूं, सुधर जाओ। तुम्हें सबक सिखाने का समय आ गया है।” इसके तुरंत बाद दोनों नेताओं की मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।
विवादित बयानों को लेकर पहले भी रहे हैं चर्चा में
हुमायूं कबीर पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। पिछले वर्ष जून में रेजिनगर में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री, भारतीय जनता पार्टी के मुर्शिदाबाद संगठनात्मक जिला अध्यक्ष मलय महाजन और जिला प्रशासन को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं। इसके बाद उनके खिलाफ सांप्रदायिक तनाव भड़काने और क्षेत्र में अशांति फैलाने के आरोप में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
राजनीतिक मायनों पर बनी हुई हैं नजरें
हालांकि हुमायूं कबीर का कहना है कि उनकी प्राथमिकता केवल अपने क्षेत्र का विकास और जनता की समस्याओं का समाधान है, लेकिन विधानसभा में हुई तल्ख टिप्पणी के तुरंत बाद मुख्यमंत्री से हुई उनकी मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बैठक में उठाए गए विकास संबंधी प्रस्तावों पर सरकार क्या निर्णय लेती है और इस मुलाकात का राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।