नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को भी दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित रही। राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी, जबकि लोकसभा की कार्यवाही भी दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा दो बार हुई स्थगित
सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होने के बाद विपक्ष के हंगामे के चलते करीब आधे घंटे में ही सदन की कार्यवाही 11:30 बजे तक स्थगित कर दी गई। दोबारा बैठक शुरू होने पर प्रश्नकाल के दौरान सवाल-जवाब का सिलसिला चला, लेकिन लगातार जारी विरोध के कारण राज्यसभा की कार्यवाही फिर दोपहर 2:15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
संसद परिसर में विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी एवं गबन के मुद्दे को लेकर नारेबाजी की। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने “चंदा चोर, गद्दी छोड़” लिखे पोस्टर लहराए, जबकि अन्य विपक्षी सांसद “अमित शाह जवाब दो” लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते नजर आए।
राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर संजय राउत का हमला
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने प्रयागराज में राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए स्थल की अनुमति रद्द किए जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है और सरकार विपक्ष के नेता से डर रही है।
संसद परिसर में दिखे राहुल और प्रियंका गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा बारिश के दौरान संसद परिसर में अपनी गाड़ी का इंतजार करते दिखाई दिए। हालांकि, दोनों नेताओं ने इस दौरान मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।
मेटा की माफी पर निशिकांत दुबे का बयान
भारतीय जनता पार्टी के सांसद और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग की ओर से माफी मांगना भारत के कानून, संविधान और संसद की जीत है। उन्होंने कहा कि भारत में कारोबार करने वाली प्रत्येक कंपनी को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि मेटा के प्रतिनिधिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की और बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री, कृत्रिम रूप से तैयार भ्रामक वीडियो तथा मंच के संचालन में हुई त्रुटियों पर खेद व्यक्त किया। मेटा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो तकनीकी गलती के कारण हट गया था, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया।