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छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी के मामलों में राजस्व विभाग सबसे आगे, 5 साल में ACB ने 193 अधिकारी-कर्मचारियों को पकड़ा

छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज के बदले रिश्वत मांगने के मामलों में राजस्व विभाग सबसे ऊपर है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 से 28 मई 2026 तक प्रदेश में रिश्वतखोरी के 154 ट्रैप प्रकरण दर्ज. . .

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज के बदले रिश्वत मांगने के मामलों में राजस्व विभाग सबसे ऊपर है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 से 28 मई 2026 तक प्रदेश में रिश्वतखोरी के 154 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए। इन मामलों में 193 शासकीय सेवकों और लोकसेवकों को पकड़ा गया। दर्ज प्रकरणों में रिश्वत की कुल राशि 51 लाख 67 हजार 540 रुपये बताई गई है। वहीं, इस अवधि में छह मामलों में सजा दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा 56 ट्रैप केस

ACB के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के मामलों को लेकर राजस्व विभाग में सबसे अधिक ट्रैप कार्रवाई हुई। जमीन से जुड़े काम, नामांतरण, सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड में सुधार जैसे कार्यों के दौरान रिश्वत मांगने की शिकायतें सामने आती रही हैं।विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्व विभाग में 56 ट्रैप प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 67 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग दूसरे स्थान पर रहा, जहां 20 मामलों में 25 लोगों को पकड़ा गया।पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 14 प्रकरणों में 15 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए, जबकि गृह यानी पुलिस विभाग में 10 प्रकरणों में 13 लोगों को पकड़ा गया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में सात मामलों में 10 लोकसेवकों के पकड़े जाने की जानकारी दी गई है।

प्रमुख विभागों में ट्रैप कार्रवाई के आंकड़े

विभागट्रैप प्रकरणपकड़े गए अधिकारी-कर्मचारी
राजस्व विभाग5667
स्कूल शिक्षा विभाग2025
पंचायत एवं ग्रामीण विकास1415
गृह (पुलिस) विभाग1013
नगरीय प्रशासन एवं विकास710

इन आंकड़ों से पता चलता है कि संबंधित अवधि में दर्ज ट्रैप मामलों का बड़ा हिस्सा राजस्व विभाग से जुड़ा था। हालांकि, ये आंकड़े दर्ज ट्रैप कार्रवाई को दर्शाते हैं, न कि प्रत्येक विभाग में भ्रष्टाचार की कुल वास्तविक स्थिति को।

वर्ष 2025 में दर्ज हुए सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी के मामले

वर्षवार आंकड़ों में 2025 के दौरान सबसे अधिक ट्रैप कार्रवाई दर्ज की गई। इस साल 60 प्रकरणों में 71 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। इससे पहले वर्ष 2024 में 44 मामलों में 57 लोगों को पकड़ा गया था। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 और 2022 में 13-13 ट्रैप प्रकरण दर्ज हुए थे। वर्ष 2021 में 14 और 2022 में 18 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए। वर्ष 2023 के लिए कोई ट्रैप प्रकरण दर्ज नहीं होने की जानकारी दी गई है। वहीं, 28 मई 2026 तक 24 मामलों में 33 लोगों को पकड़ा जा चुका था।

साल-दर-साल ACB की कार्रवाई

वर्षट्रैप प्रकरणपकड़े गए लोग
20211314
20221318
202300
20244457
20256071
2026 (28 मई तक)2433
कुल154193

वर्ष 2026 के आंकड़े केवल 28 मई तक की अवधि के हैं। इसलिए उनकी तुलना पूरे कैलेंडर वर्ष के आंकड़ों से सीधे करना उचित नहीं होगा।

निर्माण कार्यों के भुगतान से लेकर जमीन के नामांतरण तक रिश्वत

ACB के आंकड़ों में रिश्वत मांगने के पीछे अलग-अलग सरकारी सेवाओं और भुगतान संबंधी कार्यों का उल्लेख है। इनमें निर्माण कार्यों के बिल पास कराने और जमीन से जुड़े राजस्व कार्यों के मामले प्रमुख हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार:

  • निर्माण कार्यों का भुगतान: बिल या भुगतान जारी कराने के बदले रिश्वत मांगने के 14 मामले।
  • जमीन का सीमांकन: भूमि की सीमा निर्धारित कराने के लिए रिश्वत मांगने के आठ मामले।
  • नामांतरण: जमीन के रिकॉर्ड में मालिकाना बदलाव दर्ज कराने के लिए रिश्वत मांगने के आठ मामले।
  • मुआवजा राशि: मुआवजा दिलाने के बदले रिश्वत मांगने के छह मामले।
  • पेंशन और ग्रेच्युटी: सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ जारी कराने के लिए रिश्वत मांगने के पांच मामले।

इन मामलों से पता चलता है कि सरकारी सेवाओं और वित्तीय भुगतान से जुड़े कुछ कार्यों में रिश्वत मांगने की शिकायतें ACB की कार्रवाई का हिस्सा रही हैं।

51.67 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत राशि दर्ज

वर्ष 2021 से 28 मई 2026 तक दर्ज 154 ट्रैप प्रकरणों में रिश्वत की कुल राशि 51,67,540 रुपये बताई गई है। यह राशि दर्ज मामलों से संबंधित है और इसे प्रदेश में रिश्वतखोरी की कुल रकम नहीं माना जा सकता, क्योंकि सभी मामले सामने आए हों, यह जरूरी नहीं है। ट्रैप कार्रवाई आम तौर पर रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने के बाद की जाने वाली कार्रवाई होती है। इसमें जांच एजेंसी शिकायत की पुष्टि और निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति को रिश्वत लेते हुए पकड़ने का प्रयास करती है। किसी मामले में गिरफ्तारी या पकड़े जाने का अर्थ अपने आप दोष सिद्ध होना नहीं है; अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होता है।

छह मामलों में सजा, लेकिन बाकी मामलों की स्थिति भी महत्वपूर्ण

ACB के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, संबंधित अवधि में छह मामलों में सजा दर्ज की गई। यह आंकड़ा ट्रैप प्रकरणों और पकड़े गए लोगों की कुल संख्या से अलग है, क्योंकि जांच, अभियोजन और न्यायिक सुनवाई की प्रक्रिया में समय लग सकता है। भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ समयबद्ध जांच, प्रभावी अभियोजन और अदालतों में दोष सिद्ध होने की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, छह मामलों में सजा के आंकड़े के आधार पर सभी लंबित या अन्य मामलों की स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए विस्तृत केस रिकॉर्ड की जरूरत होगी।

सूरजपुर में सबसे ज्यादा 16 मामले दर्ज होने का दावा

उपलब्ध जानकारी में सूरजपुर जिले में सबसे अधिक 16 ट्रैप प्रकरण दर्ज होने का उल्लेख है। हालांकि, जिलेवार आंकड़ों की पूरी सूची उपलब्ध न होने के कारण अन्य जिलों के साथ तुलनात्मक स्थिति की पुष्टि अलग से की जानी चाहिए। जिलेवार आंकड़े प्रशासनिक स्तर पर यह समझने में मदद कर सकते हैं कि किन क्षेत्रों में शिकायतें अधिक दर्ज हो रही हैं और किन सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है।

आम नागरिक रिश्वत मांगे जाने पर क्या कर सकते हैं?

यदि किसी सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगी जाती है, तो नागरिक संबंधित राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी से शिकायत कर सकते हैं। शिकायत करते समय घटना की तारीख, संबंधित कार्यालय, मांगी गई रकम और उपलब्ध साक्ष्यों की जानकारी सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है।

  • रिश्वत मांगने की शिकायत संबंधित ACB कार्यालय में करें।
  • किसी भी कार्रवाई से पहले जांच एजेंसी से आधिकारिक प्रक्रिया की जानकारी लें।
  • एजेंसी के निर्देश के बिना स्वयं रिश्वत देने या पकड़ने की कार्रवाई करने का प्रयास न करें।
  • शिकायत से संबंधित दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखें।

सरकारी सेवाओं में जवाबदेही महत्वपूर्ण

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2021 से 28 मई 2026 तक दर्ज 154 ट्रैप प्रकरणों और 193 पकड़े गए अधिकारी-कर्मचारियों के आंकड़े सरकारी कामकाज में पारदर्शिता तथा भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित करते हैं। राजस्व विभाग में 56 प्रकरण दर्ज होना इस अवधि का प्रमुख तथ्य है। वहीं, निर्माण भुगतान, सीमांकन, नामांतरण, मुआवजा और पेंशन जैसे कार्यों से जुड़ी शिकायतें बताती हैं कि नागरिकों की रोजमर्रा की सरकारी सेवाओं में जवाबदेही महत्वपूर्ण है।

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