पेशावर। पाकिस्तान के पेशावर शहर में एक स्कूल की छत अचानक भरभराकर गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक घटना में कम से कम 28 छात्रों और एक शिक्षक की मौत होने की खबर है। हादसे में 40 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दल ने मलबे में फंसे बच्चों तथा स्कूल कर्मचारियों को निकालने के लिए अभियान शुरू कर दिया। स्थानीय अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शुरुआत में हादसे में चार लोगों की मौत की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, बाद में लेडी रीडिंग अस्पताल (LRH) में 28 बच्चों के शव पहुंचने की सूचना दी गई। घटना में एक शिक्षक की मौत की भी खबर है। हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।
अचानक ढही स्कूल की छत, मलबे में दबे बच्चे
जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में एक स्कूल की छत गिरने से यह हादसा हुआ। छत गिरते ही स्कूल परिसर में मौजूद बच्चों और कर्मचारियों के बीच चीख-पुकार मच गई। कई बच्चे मलबे के नीचे दब गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों और बचावकर्मियों ने राहत कार्य शुरू किया। हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर बचाव दलों को तैनात किया गया। बचावकर्मी मलबे को हटाकर उसके नीचे फंसे बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों की तलाश में जुट गए। हादसे के कारण स्कूल परिसर में भारी नुकसान होने की खबर है।
40 से अधिक लोग घायल, अस्पताल में कराया गया भर्ती
पेशावर के कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर (CCPO) डॉ. मियां सईद ने बताया कि स्कूल की छत गिरने की घटना में 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। लेडी रीडिंग अस्पताल प्रशासन ने शुरुआती जानकारी में चार मौतों की पुष्टि की थी। इसके बाद अस्पताल में 28 बच्चों के शव लाए जाने की सूचना सामने आई। घटना में एक शिक्षक की मौत की भी जानकारी दी गई है। हादसे में घायल बच्चों की स्थिति और मृतकों की अंतिम संख्या को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के साथ ही तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
मलबे में फंसे बच्चों को निकालने के लिए बचाव अभियान
हादसे के बाद बचावकर्मियों ने तत्काल राहत अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, छत गिरने के कारण कई बच्चे मलबे के नीचे फंस गए थे। बचाव टीमें मलबे को सावधानीपूर्वक हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश कर रही थीं। ऐसी घटनाओं में मलबे के नीचे दबे लोगों तक जल्द पहुंचना बेहद जरूरी होता है। इसी वजह से बचावकर्मियों ने घटनास्थल पर खोज और राहत कार्य को प्राथमिकता दी। स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां भी स्थिति पर नजर रख रही थीं।
सरकार की ओर से जताया गया दुख
खैबर पख्तूनख्वा से जुड़े सूचना एवं जनसंपर्क मामलों की गवर्नर की सलाहकार समर हारून बिलौर ने हादसे पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने घायल बच्चों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। घटना में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत की खबर से इलाके में शोक का माहौल है। हादसे के बाद घायलों के उपचार और मलबे में फंसे लोगों की तलाश पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्कूल की छत गिरने की वजह क्या थी?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में स्कूल की छत गिरने के सटीक कारण का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यह पता लगाने के लिए जांच की जरूरत होगी कि घटना भवन की कमजोर संरचना, निर्माण में किसी खामी, रखरखाव की कमी या किसी अन्य कारण से हुई। जांच के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों और संभावित जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता घायलों का उपचार, मलबे में फंसे लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना है।
बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
पेशावर की इस घटना ने स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा और नियमित निरीक्षण की जरूरत को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। स्कूल भवनों की मजबूती, छतों की स्थिति और सुरक्षा मानकों की समय-समय पर जांच करना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सके।हालांकि, इस हादसे के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा। फिलहाल घटना में जान गंवाने वाले बच्चों और शिक्षक के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जा रही है, जबकि घायल बच्चों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की जा रही है।