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फ्लाईदुबई कॉकपिट कांड: क्या 9/11 जैसी साजिश की थी तैयारी? जांच में सामने आया चौंकाने वाला एंगल

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड1073 में कॉकपिट के भीतर हुई गंभीर घटना की जांच अब एक बड़े आतंकी षड्यंत्र के एंगल तक पहुंचती दिखाई दे रही है। जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने. . .

डेस्क। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड1073 में कॉकपिट के भीतर हुई गंभीर घटना की जांच अब एक बड़े आतंकी षड्यंत्र के एंगल तक पहुंचती दिखाई दे रही है। जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, ओमान के को-पायलट हमाम अल-हम्मामी पर केवल विमान को हाईजैक करने की कोशिश का संदेह नहीं है, बल्कि जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उसका इरादा विमान को किसी बड़े लक्ष्य से टकराने का था। एक वरिष्ठ अमीराती सूत्र के मुताबिक, संभावित निशाने के तौर पर तेल अवीव की मशहूर अजरीली टावर्स का नाम सामने आया है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो मामला 9/11 की तर्ज पर विमान को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कथित कोशिश से जुड़ सकता है। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि ये सभी बातें अभी जांच और मीडिया रिपोर्टों में सामने आए दावों पर आधारित हैं। मामले की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम कानूनी निष्कर्ष अभी बाकी हैं।

क्या विमान को किसी बड़े लक्ष्य से टकराने की थी योजना?

जांच का सबसे गंभीर पहलू यही है कि हमाम का कथित उद्देश्य केवल विमान पर कब्जा करना नहीं था। एक वरिष्ठ अमीराती सूत्र के मुताबिक, आशंका है कि वह विमान को सामान्य उड़ान की तरह तेल अवीव की दिशा में ले जाते हुए अंतिम समय में किसी महत्वपूर्ण इमारत से टकराने की कोशिश कर सकता था। इसी संदर्भ में अजरीली टावर्स को संभावित लक्ष्य बताया जा रहा है। जांचकर्ता कथित तौर पर इस संभावना की पड़ताल कर रहे हैं कि विमान को सामान्य स्थिति में रखने का मकसद सुरक्षा एजेंसियों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल को आखिरी समय तक भ्रमित रखना था। अगर जांच में इस एंगल की पुष्टि होती है, तो यह घटना सामान्य हाईजैकिंग से कहीं अधिक गंभीर साजिश का हिस्सा मानी जा सकती है।

इजरायल की यात्राओं से जुड़े सुराग भी खंगाले जा रहे

जांचकर्ताओं की नजर हमाम की पिछली यात्राओं पर भी है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह पिछले कुछ महीनों में कई बार इजरायल और खास तौर पर बेन गुरियन एयरपोर्ट गया था।कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसने जून में इजरायल जाकर संभावित हमले से संबंधित जानकारी जुटाई थी। एक अन्य दावे के मुताबिक, जुलाई में हमले की योजना बनाई गई थी, लेकिन कथित तौर पर आखिरी समय पर उसे टाल दिया गया।रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि क्रू के एक सदस्य से उसकी दोस्ती इस फैसले की वजह हो सकती थी। इसके अलावा, पूछताछ से जुड़े एक दावे में कहा गया है कि उसने तेल अवीव जाने वाली एयरलाइन की तलाश की थी और इसी कारण फ्लाईदुबई की उड़ान चुनी।इन दावों की वास्तविकता का पता लगाने के लिए इजरायली अधिकारी यूएई और सऊदी अरब से मिली जानकारी की भी जांच कर रहे हैं।

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ऑस्ट्रेलिया में बिताया समय भी जांच के दायरे में

जांच अब हमाम के ऑस्ट्रेलिया में बिताए वर्षों तक पहुंच गई है। रिपोर्टों के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई आतंकवाद निरोधक अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मेलबर्न में रहने के दौरान उसका किसी कट्टरपंथी नेटवर्क से संपर्क तो नहीं था। कुछ रिपोर्टों में उसके कथित तौर पर कुछ कट्टरपंथी मस्जिदों में जाने और चरमपंथी वेबसाइटों को देखने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन गतिविधियों और फ्लाइट में हुई घटना के बीच कोई सीधा संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है।जांचकर्ता उसके पुराने संपर्कों, विदेश यात्राओं और ऑनलाइन गतिविधियों की पड़ताल इसलिए कर रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि कथित योजना अचानक बनी थी या इसके पीछे लंबे समय से तैयारी चल रही थी।

क्या विमान के इंजन बंद करने की कोशिश भी हुई थी?

मामले में सामने आया एक और महत्वपूर्ण सवाल विमान के इंजन और उसकी विद्युत व्यवस्था से जुड़ा है। इटली के अखबार कोरिएरे डेला सेरा की रिपोर्ट के मुताबिक, दो बोइंग 737 कैप्टनों ने घटना के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो का विश्लेषण किया। उन्होंने विमान की इमरजेंसी लाइटों के अचानक सक्रिय होने को महत्वपूर्ण संकेत माना। विशेषज्ञों के मुताबिक, मुख्य विद्युत आपूर्ति बाधित होने या विमान के बैटरी पावर पर जाने की स्थिति में ऐसी लाइटें सक्रिय हो सकती हैं। इंजन या उनके जनरेटर से जुड़ी समस्या भी इसका एक कारण हो सकती है। इसी वजह से जांचकर्ता कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हमाम ने इंजन के फ्यूल-कंट्रोल स्विच को ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ की स्थिति में ले जाने का प्रयास किया था। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो यह जांच के लिए अहम सबूत हो सकता है कि कॉकपिट पर नियंत्रण पाने के साथ-साथ विमान की प्रणोदन प्रणाली को प्रभावित करने की भी कोशिश की गई थी।

पहले सामान्य आपात संकेत, फिर हाईजैक का कोड

घटना के दौरान विमान से भेजे गए आपातकालीन ट्रांसपोंडर कोड भी जांच में महत्वपूर्ण कड़ी माने जा रहे हैं। सबसे पहले विमान ने 7700 कोड प्रसारित किया। इसका इस्तेमाल सामान्य आपात स्थिति के लिए किया जाता है। इसके कुछ मिनट बाद कोड बदलकर 7500 कर दिया गया, जो संभावित हाईजैकिंग का संकेत है। इस बदलाव के समय विमान जॉर्डन के एयरस्पेस के करीब पहुंच रहा था। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने विमान को वापस मोड़ने के निर्देश दिए और बाद में उसे सऊदी अरब के तबुक में आपात लैंडिंग के लिए भेजा गया। इसी दौरान यात्रियों ने कॉकपिट की स्थिति को संभालने में हस्तक्षेप किया। एक यात्री ने विमान को स्थिर करने में मदद की, जबकि विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने बाद में नियंत्रण संभाल लिया।

यात्रियों और क्रू की प्रतिक्रिया ने बिगाड़ा कथित प्लान

रिपोर्टों के मुताबिक, हमाम कथित तौर पर चाहता था कि विमान की स्थिति अंतिम समय तक सामान्य दिखाई दे। लेकिन कॉकपिट में पैदा हुई स्थिति और यात्रियों की तेजी से की गई प्रतिक्रिया ने कथित योजना को आगे बढ़ने से रोक दिया। रिपोर्टों में कहा गया है कि कैप्टन मच्छार घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खुलवाने में सफल रहे। इसके बाद यात्रियों को हस्तक्षेप करने का मौका मिला। अगर हमाम लंबे समय तक विमान पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखने में सफल हो जाता, तो स्थिति किस दिशा में जाती, यह कहना मुश्किल है। हालांकि, कथित योजना और संभावित लक्ष्य से जुड़े दावों की पुष्टि अभी जांच के अंतिम नतीजों पर निर्भर करेगी।

जांच में अब कई देशों की एजेंसियां शामिल

यूएई ने इस घटना को आतंकी हमला बताया है और हमाम हिरासत में है। उससे पूछताछ जारी है। इजरायल भी जांच का दायरा बढ़ाने की मांग कर रहा है। इसमें फ्लाइट के क्रू और फ्लाइट अटेंडेंट्स से अतिरिक्त जानकारी जुटाना शामिल है। साथ ही हमाम की पिछली यात्राओं, संपर्कों और ऑनलाइन गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल विमान को हाईजैक करने की कोशिश थी या इसके पीछे किसी बड़े आतंकी हमले की योजना भी थी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 9/11 जैसी साजिश का दावा कितना सही है और कथित लक्ष्य से जुड़े दावों में कितनी सच्चाई है।

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