मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में 28 अक्टूबर को भारी गिरावट देखने को मिल रही है। सेंसेक्स करीब 1,000 अंक टूटकर 72,600 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी में लगभग 250 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है और यह 22,500 के स्तर पर पहुंच गया है। IT, एनर्जी और FMCG शेयरों में बिकवाली के साथ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, एशियाई और अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद घरेलू बाजार में दबाव बना हुआ है।
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट, निवेशकों की बढ़ी चिंता
शेयर बाजार में कमजोरी के कारण प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। सेंसेक्स में करीब 1,000 अंकों की गिरावट से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ है। वहीं, निफ्टी भी लगभग 250 अंक नीचे आ गया है। बाजार में IT, एनर्जी और FMCG सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट का असर व्यापक बाजार पर पड़ रहा है।
बाजार गिरने की दो बड़ी वजहें
1. IT और एनर्जी शेयरों में बिकवाली
IT, एनर्जी और FMCG सेक्टर में बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बढ़ा है। जब प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट आती है, तो सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों पर भी इसका असर दिखाई देता है।
2. कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर के पार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की खबर है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल बढ़ने और महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। तेल महंगा होने से परिवहन, उत्पादन और अन्य कारोबारी लागतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसी आशंका के चलते निवेशक बाजार में सतर्क रुख अपना रहे हैं।
Jio Platforms की शानदार लिस्टिंग, शेयर 21% प्रीमियम पर खुले
बाजार में गिरावट के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग चर्चा में रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी के शेयर ₹1,119 के इश्यू प्राइस के मुकाबले ₹1,358 पर लिस्ट हुए। इस तरह शेयर को करीब 21.36% का लिस्टिंग प्रीमियम मिला। लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स का बाजार पूंजीकरण करीब ₹12.50 लाख करोड़ बताया गया। तुलना में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण लगभग ₹15.99 लाख करोड़ और भारती एयरटेल का करीब ₹12.10 लाख करोड़ बताया गया है। हालांकि, बाजार पूंजीकरण शेयर की कीमत और कारोबार के दौरान उसमें होने वाले बदलाव के साथ बदलता रहता है।
एशियाई शेयर बाजारों में तेजी
भारतीय बाजार में गिरावट के बीच प्रमुख एशियाई शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया के कोस्पी और जापान के निक्केई में बढ़त रही, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग भी मामूली तेजी के साथ कारोबार करता दिखा।
| प्रमुख सूचकांक | स्तर | बदलाव | प्रतिशत बदलाव |
|---|---|---|---|
| कोस्पी (दक्षिण कोरिया) | 5,963 | +325 | +5.74% |
| निक्केई (जापान) | 64,067 | +799 | +1.26% |
| हैंगसेंग (हांगकांग) | 23,092 | +51 | +0.16% |
अमेरिकी बाजार भी बढ़त के साथ बंद
27 अक्टूबर को अमेरिकी शेयर बाजार में भी तेजी दर्ज की गई। नैस्डैक में 1.18% की बढ़त रही, जबकि S&P 500 और डाउ जोन्स भी सकारात्मक दायरे में बंद हुए।
| प्रमुख सूचकांक | स्तर | बदलाव | प्रतिशत बदलाव |
|---|---|---|---|
| डाउ जोन्स | 52,378 | +16 | +0.03% |
| नैस्डैक | 26,478 | +308 | +1.18% |
| S&P 500 | 7,723 | +46 | +0.60% |
विदेशी बाजारों में तेजी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली यह संकेत देती है कि घरेलू कारोबार पर कच्चे तेल की कीमतों और सेक्टर-विशेष दबाव का असर महत्वपूर्ण हो सकता है।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी, घरेलू संस्थागत निवेशकों की बिकवाली
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) ने बीते सात दिनों में ₹207 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इसी अवधि में ₹7,486 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।
| निवेशक वर्ग | ताजा आंकड़ा | बीते 7 दिन | बीते 30 दिन |
|---|---|---|---|
| DII | -₹1,250 करोड़ | +₹7,486 करोड़ | +₹78,694 करोड़ |
| FII/FPI | +₹4,240 करोड़ | +₹207 करोड़ | -₹68,817 करोड़ |
इन आंकड़ों में ताजा अवधि के दौरान दोनों निवेशक वर्गों की गतिविधियां अलग-अलग रहीं। हालांकि, केवल निवेश प्रवाह के आधार पर बाजार की अगली दिशा का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
आगे बाजार की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों के रुख, IT और एनर्जी शेयरों में कारोबार तथा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंता बनी रह सकती है। दूसरी ओर, बिकवाली का दबाव कम होने और निवेशकों की खरीदारी लौटने से बाजार को सहारा मिल सकता है।