Home » पश्चिम बंगाल » कुड़मी आंदोलन के पुराने केस वापस होंगे: शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, 50 करोड़ के बजट का वादा

कुड़मी आंदोलन के पुराने केस वापस होंगे: शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, 50 करोड़ के बजट का वादा

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में कुड़मी समुदाय को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कुड़मी समुदाय के आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए पुराने मामलों को वापस. . .

पुरुलिया: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में कुड़मी समुदाय को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कुड़मी समुदाय के आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए पुराने मामलों को वापस लिया जाएगा। इसके साथ ही समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान, कुड़मी विकास बोर्ड को फिर से सक्रिय करने और कुड़माली तथा राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में काम करने का भरोसा दिया गया है।

पुराने केस वापस लेने का ऐलान

पुरुलिया में करम उत्सव के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान कुड़मी आंदोलन को लेकर दर्ज किए गए सभी पुराने मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने कुड़मी समुदाय को एकजुट करने के बजाय समुदाय के भीतर विभाजन पैदा करने का काम किया। अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार समुदाय से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी।

कुड़मी समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष कुड़मी समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने भविष्य में इस राशि को बढ़ाने की भी बात कही। इसके साथ ही लंबे समय से निष्क्रिय पड़े कुड़मी विकास बोर्ड को फिर से सक्रिय करने का भरोसा दिया गया है।

क्या हैं कुड़मी समुदाय की प्रमुख मांगें?

कुड़मी समुदाय लंबे समय से अपनी सामाजिक और संवैधानिक मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है। प्रमुख मांगों में अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना शामिल है। पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में इन मांगों को लेकर समय-समय पर बड़े आंदोलन हुए हैं। आंदोलन के दौरान सड़क और रेल मार्गों को बाधित करने की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ विभिन्न मामले दर्ज किए गए थे।

पुराने मामलों की वापसी क्यों है अहम?

कुड़मी आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों की वापसी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों में से एक रही है। सरकार की ओर से इन मामलों को वापस लेने का ऐलान आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, किन मामलों को किस कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लिया जाएगा और इसमें किन लोगों को राहत मिलेगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

कुड़माली और राजबंशी भाषा को लेकर बड़ा वादा

शुभेंदु अधिकारी ने कुड़माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में काम करने का भी भरोसा दिया।

कुड़माली भाषा मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के पश्चिमी हिस्सों में रहने वाले कुड़मी समुदाय से जुड़ी है। वहीं, राजबंशी भाषा उत्तर बंगाल के राजबंशी समुदाय के बीच प्रचलित है। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को संवैधानिक मान्यता प्राप्त भाषाओं की सूची में स्थान मिलता है। इन दोनों भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग लंबे समय से उठती रही है।

विधानसभा चुनाव से पहले वादे पूरे करने का दावा

पुरुलिया में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले संकल्प पत्र में कुड़मी समुदाय से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। अब नजर इस बात पर है कि पुराने मामलों की वापसी, 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान, कुड़मी विकास बोर्ड को पुनर्जीवित करने और भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम