जहां घरों की नींव जमीन पर नहीं, पेड़ों की ऊंची डालियों पर रखी जाती है
जकार्ता: दुनिया में इंसानों के रहने के तौर-तरीके जितने अलग हैं, उतने ही हैरान करने वाले भी। कहीं लोग बर्फीले इलाकों में घर बनाकर रहते हैं तो कहीं रेगिस्तान में। लेकिन इंडोनेशिया के पापुआ क्षेत्र के घने जंगलों में रहने वाली कोरवाई जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली इन सबसे अलग नजर आती है। इस समुदाय के कुछ पारंपरिक घर जमीन से करीब 10 से 50 मीटर तक की ऊंचाई पर पेड़ों के ऊपर बनाए जाते हैं। घने जंगल के बीच इतनी ऊंचाई पर बने ये ट्री हाउस दूर से किसी रहस्यमयी जंगल-गांव जैसे दिखाई देते हैं।
जमीन से दूर, जंगल की ऊंचाई पर जिंदगी
कोरवाई लोगों की पारंपरिक बस्तियां इंडोनेशियाई पापुआ के दुर्गम और घने जंगलों से जुड़ी रही हैं। यहां कुछ परिवार पारंपरिक रूप से ऐसे घर बनाते रहे हैं, जिन्हें पेड़ों के तनों और मजबूत शाखाओं के सहारे ऊंचाई पर तैयार किया जाता है।इन घरों तक पहुंचना भी आसान नहीं होता। सामान्य घरों की तरह दरवाजे से जमीन पर उतरने के बजाय यहां ऊंचाई तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों या पेड़ से जुड़े चढ़ने के रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है।
कैसे बनाए जाते हैं इतने ऊंचे ट्री हाउस?
इन पारंपरिक घरों को बनाने में स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। लकड़ी, पेड़ों की शाखाएं, पत्तियां और अन्य प्राकृतिक वन सामग्री इनके निर्माण में अहम भूमिका निभाती है।पहले उपयुक्त और मजबूत पेड़ का चुनाव किया जाता है। उसके बाद पेड़ की संरचना के अनुसार घर का ढांचा तैयार किया जाता है। छत और दीवारों के लिए भी स्थानीय वन सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे बड़ी चुनौती होती है—इतनी ऊंचाई पर घर को मजबूत और सुरक्षित बनाना।
आखिर पेड़ों के ऊपर ही क्यों बनाए जाते हैं घर?
इतनी ऊंचाई पर घर बनाने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। घने जंगलों में जमीन के स्तर पर मौजूद जंगली जानवरों और अन्य संभावित खतरों से दूरी इसका एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। इसके अलावा, ऊंचाई पर बने घरों से आसपास के इलाके पर नजर रखना आसान हो सकता है। जंगल के वातावरण में यह रणनीतिक फायदा भी महत्वपूर्ण रहा होगा। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि कोरवाई समुदाय के सभी लोग आज भी पेड़ों के ऊपर रहते हैं, ऐसा कहना सही नहीं होगा। पेड़ों पर बने घर उनकी पारंपरिक जीवनशैली का एक हिस्सा हैं और समय के साथ समुदाय के रहने के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है।
50 मीटर की ऊंचाई पर घर—सोचकर ही रोमांच हो जाता है
कल्पना कीजिए—आपका घर जमीन से कई मंजिल ऊपर किसी विशाल पेड़ पर बना हो। नीचे घना जंगल हो और चारों तरफ पेड़ों की हरियाली। कोरवाई के पारंपरिक ट्री हाउस इसी वजह से दुनियाभर के लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। कुछ घर 50 मीटर तक की ऊंचाई पर बनाए जाने के लिए प्रसिद्ध हैं, हालांकि सभी ट्री हाउस इतनी ऊंचाई पर नहीं होते।
जंगल ही घर, जंगल ही जीवन
कोरवाई समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली जंगल के प्राकृतिक संसाधनों से गहराई से जुड़ी रही है। भोजन, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की कई जरूरतों के लिए जंगल पर निर्भरता ने उनके जीवन को प्रकृति के बेहद करीब रखा है। आधुनिक शहरों में जहां घर कंक्रीट, स्टील और कांच से बनते हैं, वहीं यहां प्रकृति ही घर बनाने की सबसे बड़ी सामग्री रही है।
क्या ये दुनिया के सबसे ऊंचे घर हैं?
कोरवाई ट्री हाउस को लेकर अक्सर सोशल मीडिया और पर्यटन सामग्री में इन्हें “दुनिया के सबसे ऊंचे पेड़ वाले घर” या “दुनिया का अनोखा गांव” जैसे नामों से पेश किया जाता है। हालांकि, ऐसे दावों को आधिकारिक विश्व रिकॉर्ड के रूप में देखना उचित नहीं है। इन घरों की असली खासियत किसी रिकॉर्ड से ज्यादा उनकी पारंपरिक वास्तुकला और पर्यावरण के अनुरूप जीवनशैली है।
आधुनिक दुनिया के बीच बची हुई एक अलग दुनिया
कोरवाई समुदाय की कहानी सिर्फ पेड़ों पर बने घरों की कहानी नहीं है। यह दिखाती है कि अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में इंसानों ने अपने रहने के लिए कितने अनोखे तरीके विकसित किए।पापुआ के घने जंगलों में ऊंचे पेड़ों पर बने ये घर आधुनिक दुनिया के लिए भले ही किसी रोमांचक कहानी जैसे लगें, लेकिन इनके पीछे एक ऐसी पारंपरिक जीवनशैली है जो स्थानीय पर्यावरण, उपलब्ध संसाधनों और पीढ़ियों से चली आ रही जानकारी से विकसित हुई है।यही वजह है कि कोरवाई के ट्री हाउस आज भी दुनिया के सबसे दिलचस्प पारंपरिक आवासों में गिने जाते हैं।