नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में एक और शक्तिशाली चक्रवाती तूफान तेजी से आगे बढ़ रहा है। ‘मुरासु’ (Murasu) नाम का यह चक्रवात अब गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) में तब्दील हो चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, तूफान के 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की प्रबल संभावना है। चक्रवात के तट से टकराने के दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है। वहीं, तेज झोंकों के साथ हवा की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इस संभावित खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश में गंभीर चक्रवाती तूफान को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने, भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण तटीय इलाकों में नुकसान की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग लगातार तूफान की दिशा, गति और तीव्रता पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन को सतर्क रहने और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा तैयारियां मजबूत करने की जरूरत है।
गहरे दबाव से गंभीर चक्रवाती तूफान बना मुरासु
बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र पहले गहरे दबाव में बदला और फिर चक्रवाती तूफान मुरासु के रूप में विकसित हुआ। इसके बाद इसकी ताकत लगातार बढ़ती गई और 2 नवंबर की सुबह तक यह गंभीर चक्रवाती तूफान बन गया। IMD के 2 नवंबर को जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, तूफान पिछले छह घंटों में लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा। सुबह 2:30 बजे यह पश्चिम-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित था। उस समय इसकी स्थिति लगभग 13.6 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 82.5 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान उस समय कई प्रमुख तटीय शहरों से कुछ सौ किलोमीटर दूर था।
चेन्नई से 260 और नेल्लोर से 290 किलोमीटर दूर था तूफान
2 नवंबर की सुबह 2:30 बजे चक्रवात मुरासु की स्थिति इस प्रकार थी:
| प्रमुख स्थान | तूफान से दूरी |
|---|---|
| चेन्नई | 260 किमी |
| नेल्लोर | 290 किमी |
| मछलीपट्टनम | 320 किमी |
| कावली | 310 किमी |
| ओंगोल | 330 किमी |
| विशाखापत्तनम | 470 किमी |
तूफान की दिशा और गति को देखते हुए मौसम विभाग ने दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है।
3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है मुरासु
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात मुरासु उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है।
इसके लैंडफॉल का संभावित समय इस प्रकार है:
- लैंडफॉल की शुरुआत: 2 नवंबर की रात करीब 11:30 बजे।
- लैंडफॉल की संभावित समाप्ति अवधि: 3 नवंबर की सुबह करीब 4 बजे।
- संभावित क्षेत्र: नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के आसपास।
- हवा की सामान्य रफ्तार: 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा।
- हवा के तेज झोंके: 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक।
लैंडफॉल के दौरान तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ने, बिजली के खंभे गिरने, कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने और सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
आंध्र प्रदेश में हाई अलर्ट, प्रशासन ने तेज की तैयारियां
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए आंध्र प्रदेश में प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। राहत एवं बचाव दलों को सतर्क रहने और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की है। प्रशासन की नजर विशेष रूप से उन इलाकों पर है, जहां तेज हवाओं और भारी बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
ओडिशा में भी सतर्कता, बंदरगाहों पर जारी किया गया चेतावनी संकेत
चक्रवात मुरासु का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में भी मौसम विभाग ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
IMD के तटीय मौसम बुलेटिन के अनुसार:
- उत्तर और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
- ओडिशा के सभी बंदरगाहों पर लोकल कॉशनरी सिग्नल नंबर-3 (LC-III) जारी रखने की सलाह दी गई है।
- समुद्र में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
हालांकि, ओडिशा के लिए जारी बुलेटिन में उस समय तूफानी ज्वार (Storm Surge) की चेतावनी नहीं दी गई थी।
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी बारिश की संभावना
चक्रवात मुरासु की स्थिति को देखते हुए तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के कुछ तटीय इलाकों में भी मौसम प्रभावित हो सकता है। तमिलनाडु के चेन्नई समेत उत्तरी तटीय क्षेत्रों में तूफान की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। वहीं, IMD के तटीय बुलेटिन में पश्चिम बंगाल के तट पर एक-दो स्थानों पर बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। पश्चिम बंगाल के हुगली क्षेत्र के अंतर्गत कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों पर डिस्टेंट वार्निंग सिग्नल नंबर-2 जारी होने की जानकारी भी बुलेटिन में दी गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पश्चिम बंगाल में भी आंध्र प्रदेश जैसी चक्रवाती स्थिति बनने वाली है।
एक सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में दूसरा चक्रवाती तूफान
बंगाल की खाड़ी में लगातार बन रही मौसमी गतिविधियों ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ाई है। मुरासु से पहले भी इस क्षेत्र में एक अन्य चक्रवाती प्रणाली को लेकर चर्चा रही है। हालांकि, इससे पहले आए कथित चक्रवात ‘अर्नब’ के नाम और उसके प्रभाव से संबंधित दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए दोनों तूफानों के बीच तुलना करते समय सावधानी जरूरी है। फिलहाल मौसम विभाग का मुख्य ध्यान मुरासु की दिशा, तीव्रता और आंध्र प्रदेश के तट पर इसके संभावित लैंडफॉल पर है।
क्या होता है चक्रवात का लैंडफॉल?
जब समुद्र के ऊपर विकसित हुआ चक्रवाती तूफान आगे बढ़ते हुए जमीन के तटीय हिस्से में प्रवेश करता है, तो इस प्रक्रिया को लैंडफॉल कहा जाता है। लैंडफॉल के दौरान तूफान की तेज हवाएं, मूसलाधार बारिश और समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरें तटीय इलाकों में भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। मुरासु के मामले में सबसे ज्यादा चिंता इसकी 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की अनुमानित हवा की रफ्तार को लेकर है। इसके झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
चक्रवात के दौरान लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी है। खासकर समुद्र के नजदीक और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधान रहना चाहिए।
- समुद्र में मछली पकड़ने के लिए न जाएं और प्रशासन के प्रतिबंधों का पालन करें।
- तेज हवाओं के दौरान घर से बाहर निकलने से बचें।
- बिजली के खंभों, पेड़ों और कमजोर इमारतों से दूरी बनाए रखें।
- निचले इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन के निर्देश पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
- मोबाइल फोन चार्ज रखें और जरूरी दवाइयां, पीने का पानी तथा टॉर्च तैयार रखें।
- मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखें।
फिलहाल क्या है चक्रवात मुरासु की स्थिति?
2 नवंबर 2026 की सुबह जारी IMD बुलेटिन के मुताबिक, मुरासु गंभीर चक्रवाती तूफान बन चुका है और दक्षिणी आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। इसके 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के आसपास तट पार करने की संभावना है। तूफान के दौरान 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक हवा के झोंके चल सकते हैं। ऐसे में अगले कुछ घंटे आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन और राहत एजेंसियां संभावित खतरे से निपटने की तैयारियों में जुटी हैं।