नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली को लेकर रविवार को राजनीतिक हलचल तेज हो गई। कांग्रेस समेत विपक्षी गठबंधन के कई प्रमुख नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इस आयोजन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुली बस में सवार होकर अन्य विपक्षी नेताओं के साथ रामलीला मैदान के लिए रवाना हुए। इस दौरान गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता भी उनके साथ मौजूद रहे। इस महारैली का मुख्य मुद्दा कथित वोट चोरी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग है। विपक्ष इस आयोजन के जरिए चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां और विरोध दर्ज करा रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इसे INDIA गठबंधन के बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक निकाला गया मार्च
हम रामलीला मैदान आ रहे हैं!#ChaloDilli pic.twitter.com/ldKMeJfygD
— Congress (@INCIndia) November 1, 2026
महारैली से पहले विपक्षी नेताओं का मार्च दिल्ली के मिंटो रोड जंक्शन से शुरू हुआ। प्रस्तावित रास्ते के मुताबिक, मार्च अजमेरी गेट होते हुए जवाहरलाल नेहरू मार्ग से रामलीला मैदान तक पहुंचा। इस दौरान राहुल गांधी के साथ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेता भी दिखाई दिए। समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) समेत विपक्षी दलों के नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी ने इस आयोजन को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के भी रैली में शामिल होने की जानकारी सामने आई।
कनॉट प्लेस में दुकानें बंद होने पर राहुल गांधी ने बीजेपी को घेरा
मार्च के दौरान राहुल गांधी ने दिल्ली के बाजारों में दुकानों के बंद होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कनॉट प्लेस पहुंचने पर उन्हें जानकारी मिली कि बीजेपी ने कथित तौर पर दुकानदारों को दुकानें बंद रखने के लिए मजबूर किया है। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने पहले ही रैली में आने वाले लोगों से दिल्ली के स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील की थी, ताकि त्योहारों के दौरान व्यापारियों को आर्थिक फायदा मिल सके। उनके मुताबिक, विपक्ष की कोशिश थी कि राजनीतिक कार्यक्रम के साथ स्थानीय कारोबार को भी समर्थन मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानों को बंद करवाकर व्यापारियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को देश देख रहा है। हालांकि, दुकानों को जबरन बंद कराने के आरोप पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से महत्वपूर्ण होगी।
दिवाली और छठ के मौके पर व्यापारियों की मदद की अपील
राहुल गांधी ने अपने संदेश में त्योहारों के मौसम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिवाली, छठ और भाई दूज के दौरान बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों से दिल्ली आते हैं। ऐसे में उन्होंने रैली में शामिल होने वाले लोगों से अपील की कि वे विरोध प्रदर्शन और मार्च में हिस्सा लेने के साथ-साथ दिल्ली के बाजारों में खरीदारी भी करें। उनका कहना था कि इससे छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को फायदा मिल सकता है। इससे पहले भी राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया था कि महारैली के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
किन मुद्दों को लेकर हो रही है महारैली?
INDIA गठबंधन की इस रैली के केंद्र में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दे हैं:
- कथित वोट चोरी: विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहा है।
- SIR प्रक्रिया: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा: विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
गठबंधन के नेताओं का उद्देश्य इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना और चुनावी पारदर्शिता को लेकर अपनी मांगों के समर्थन में जनसमर्थन जुटाना है।
रामलीला मैदान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
महारैली में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। कार्यक्रम स्थल और मार्च के निर्धारित रास्ते पर 4,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों की तैनाती की व्यवस्था की गई है। रामलीला मैदान को सुरक्षा की दृष्टि से 14 अलग-अलग जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन की निगरानी सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) स्तर के अधिकारी करेंगे। इसके अलावा मार्च के रास्ते, प्रमुख चौराहों और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर भी सुरक्षा बलों को सतर्क रखा गया है।
विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष की एकजुटता का संदेश
इस महारैली को सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन के रूप में नहीं, बल्कि INDIA गठबंधन की राजनीतिक एकजुटता दिखाने के अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं की मौजूदगी से विपक्ष अपनी साझा राजनीतिक रणनीति और चुनावी मुद्दों को सामने रखने की कोशिश कर रहा है। अब इस आयोजन के जरिए विपक्ष अपनी मांगों को कितना व्यापक समर्थन दिला पाता है और इसका आगामी विधानसभा चुनावों की राजनीति पर क्या असर पड़ता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।