तेल अवीव : इजरायल के चुनावी नतीजों को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पार्टी और दक्षिणपंथी गठबंधन की निर्णायक जीत का दावा किया है, लेकिन शुरुआती एग्जिट पोल और मतगणना के रुझान स्पष्ट बहुमत की तस्वीर नहीं दिखा रहे हैं। दूसरी ओर, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट की अगुवाई वाला विपक्षी खेमा भी सरकार बनाने की दौड़ में बना हुआ है। इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में छोटे दलों की भूमिका और चुनाव के बाद होने वाली गठबंधन वार्ता बेहद अहम हो सकती है।
कांटे की टक्कर में कौन आगे?
इजरायल के चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट की पार्टी याशर के बीच मुकाबला चर्चा में है। शुरुआती अनुमानों में लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती दिख रही है, लेकिन किसी एक पार्टी का सबसे बड़ा होना और सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाना दो अलग-अलग बातें हैं। 28 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को लगभग 50 से 52 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया, जबकि आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को करीब 49 से 53 सीटें मिलने की संभावना जताई गई। अलग-अलग एग्जिट पोल में आंकड़े अलग रहे हैं। इसलिए इन्हें अंतिम नतीजे नहीं माना जा सकता।
सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। किसी भी गठबंधन को बहुमत साबित करने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। वर्तमान चुनावी स्थिति में दोनों प्रमुख खेमे इस आंकड़े से पीछे दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में छोटे दलों का समर्थन अगली सरकार का फैसला करने में निर्णायक साबित हो सकता है।
सरकार बनाने के लिए संभावित विकल्पों में शामिल हैं:
- नेतन्याहू का दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के साथ गठबंधन मजबूत करना।
- आइजेनकोट के नेतृत्व में विपक्षी दलों का साझा गठबंधन बनाना।
- अन्य दलों का समर्थन लेकर गठबंधन को बहुमत तक पहुंचाना।
- यदि कोई पक्ष बहुमत नहीं जुटा पाता, तो लंबे समय तक राजनीतिक बातचीत या नए चुनाव की स्थिति बनना।
नेतन्याहू ने किया निर्णायक जीत का दावा
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव के बाद अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है और दक्षिणपंथी खेमे के पास सरकार बनाने के लिए बहुमत है। उन्होंने एक मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने की अपील की। हालांकि, उनके दावे और शुरुआती चुनावी अनुमानों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। एग्जिट पोल में किसी भी खेमे को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने का संकेत मिला है। इसलिए नेतन्याहू की राजनीतिक वापसी या सत्ता से विदाई का फैसला केवल शुरुआती रुझानों के आधार पर नहीं किया जा सकता।
गादी आइजेनकोट कौन हैं और विपक्ष की क्या है रणनीति?
गादी आइजेनकोट इजरायल के पूर्व सैन्य प्रमुख हैं और याशर पार्टी के नेता के रूप में नेतन्याहू को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने चुनावी नतीजों को बदलाव की मांग के रूप में पेश किया और नई सरकार बनाने की कोशिश का संकेत दिया। लेकिन विपक्ष के सामने भी चुनौती कम नहीं है। उसे केवल नेतन्याहू के गठबंधन से अधिक सीटें हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संसद में बहुमत साबित करने के लिए अलग-अलग दलों का समर्थन जुटाना भी जरूरी होगा। अरब दलों को शुरुआती अनुमानों में उल्लेखनीय सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि, उन्हें किसी गठबंधन में शामिल मान लेना सही नहीं होगा, क्योंकि उनकी राजनीतिक स्थिति और दूसरे दलों के साथ समझौते की संभावनाएं अलग हैं।
ट्रंप के समर्थन की भी चर्चा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले नेतन्याहू का समर्थन किया था। चुनाव के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने सुना है कि नेतन्याहू ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन साथ ही यह भी माना कि नतीजों का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी। ट्रंप के समर्थन से चुनावी माहौल कितना बदला, इसका स्पष्ट निष्कर्ष शुरुआती नतीजों से नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए मतदाताओं के रुझान और चुनावी आंकड़ों का अधिक विस्तृत विश्लेषण जरूरी होगा।
चुनाव में किन मुद्दों का रहा असर?
यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और उसके बाद गाजा में हुए युद्ध के बाद पहला संसदीय चुनाव है। नेतन्याहू के नेतृत्व, राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्ध से जुड़े फैसलों के साथ-साथ घरेलू राजनीतिक मुद्दे भी चुनावी बहस का हिस्सा रहे। अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों में अनिवार्य सैन्य सेवा, अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय को सैन्य सेवा से छूट, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संबंध तथा फिलिस्तीनियों के साथ भविष्य के संबंध शामिल हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग दलों के रुख का असर गठबंधन वार्ता और नई सरकार की नीतियों पर पड़ सकता है।
अब आगे क्या होगा?
मतगणना पूरी होने और आधिकारिक नतीजे घोषित होने के बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद वह उस उम्मीदवार को सरकार बनाने का अवसर दे सकते हैं, जिसके पास संसद में बहुमत जुटाने की सबसे बेहतर संभावना होगी। नामित उम्मीदवार को गठबंधन बनाने के लिए अधिकतम 42 दिन तक का समय मिल सकता है। यदि सरकार बनाने की कोशिशें सफल नहीं होतीं, तो आगे दूसरे उम्मीदवार को अवसर देने या अंततः नए चुनाव की स्थिति बन सकती है। इस दौरान नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बने रह सकते हैं।
सरकार का फैसला अभी बाकी
इजरायल के चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के सबसे बड़ी पार्टी बनने के संकेत हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा अभी निर्णायक रूप से किसी खेमे के पक्ष में नहीं दिख रहा। गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्ष भी मुकाबले में है और छोटे दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि कौन-सा खेमा 61 सांसदों का समर्थन जुटा पाएगा। आधिकारिक नतीजों और गठबंधन वार्ता के बाद ही स्पष्ट होगा कि इजरायल में नेतन्याहू की सरकार जारी रहेगी या विपक्ष सत्ता में आने में सफल होगा।