कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पिछले 25 वर्षों के दौरान राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए राज्य सरकार ने रोजगार का रास्ता खोल दिया है। ऐसे परिवारों के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी देने के फैसले पर अब आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। राज्य के गृह एवं पर्वतीय कार्य विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में नौकरी की पात्रता, उम्र, शैक्षणिक योग्यता और आवेदन की जांच से जुड़ी शर्तें स्पष्ट की गई हैं। सरकार की इस योजना के तहत पात्र परिवार के एक सदस्य को ग्रुप-डी श्रेणी में नियुक्ति के लिए विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य उन परिवारों को आर्थिक सहारा देना है, जिन्होंने राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में अपने किसी सदस्य को खो दिया और जिनकी आजीविका पर इसका सीधा असर पड़ा है। यह व्यवस्था किसी एक राजनीतिक दल या विशेष कार्यकाल तक सीमित नहीं रखी गई है। अधिसूचना के अनुसार, 1 जनवरी 2001 या उसके बाद राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिवार इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, नौकरी मिलना केवल आवेदन करने से तय नहीं होगा। प्रत्येक मामले की प्रशासनिक और दस्तावेजी जांच की जाएगी।
किन परिवारों को मिलेगा सरकारी नौकरी का लाभ?
राज्य सरकार की ओर से तय नियमों के मुताबिक, राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार का केवल एक योग्य सदस्य ही इस विशेष नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकेगा। इसमें मृतक के पति या पत्नी, बेटा, बेटी और थर्ड जेंडर संतान को पात्र आश्रित माना गया है। यदि राजनीतिक हिंसा में मारे गए व्यक्ति की शादी नहीं हुई थी, तो कुछ विशेष परिस्थितियों में उसका भाई या बहन भी आवेदन कर सकता है। इसके लिए यह साबित करना जरूरी होगा कि संबंधित भाई या बहन पूरी तरह मृतक पर निर्भर था। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य ऐसे परिवारों को मदद देना है, जिनके सामने परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
ग्रुप-डी की नौकरी के लिए क्या होनी चाहिए योग्यता?
सरकार ने आवेदन करने वालों के लिए कुछ बुनियादी योग्यताएं निर्धारित की हैं। इनमें नागरिकता, निवास, पढ़ाई और उम्र से जुड़ी शर्तें शामिल हैं।
- नागरिकता: आवेदक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।
- स्थायी निवास: उम्मीदवार पश्चिम बंगाल का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता: कम से कम आठवीं कक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में सरकार इस शर्त में छूट दे सकती है।
- न्यूनतम उम्र: 1 जनवरी 2026 तक उम्मीदवार की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- अधिकतम उम्र: ग्रुप-डी नियुक्तियों के लिए लागू सामान्य आयु सीमा का पालन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इसमें भी सरकारी छूट दी जा सकती है।
इस तरह, केवल मृतक का रिश्तेदार होना पर्याप्त नहीं होगा। आवेदक को निर्धारित पात्रता की शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
परिवार की मासिक आय 50 हजार रुपये से ज्यादा हुई तो नहीं मिलेगा लाभ
योजना में आर्थिक स्थिति को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन परिवारों की मासिक आमदनी 50,000 रुपये से अधिक है, उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
इसके अलावा तीन महत्वपूर्ण शर्तें रखी गई हैं:
- यदि मृतक के परिवार का कोई सदस्य नियमित सरकारी नौकरी में है, तो परिवार इस योजना का लाभ नहीं ले सकेगा।
- यदि परिवार का कोई सदस्य आयकर का भुगतान करता है, तो आवेदन पात्र नहीं माना जाएगा।
- यदि इसी राजनीतिक हिंसा की घटना के संबंध में परिवार के किसी सदस्य को पहले ही सरकारी नौकरी मिल चुकी है, तो दोबारा इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।
इन प्रावधानों का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता देना है।
नौकरी देने के लिए नए पद भी बनाए जाएंगे
इस योजना की एक अहम बात यह है कि नियुक्तियों के लिए मौजूदा सरकारी पदों और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार ने जरूरत के अनुसार अतिरिक्त ग्रुप-डी पद सृजित करने का प्रावधान रखा है। इन पदों पर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, निदेशालयों, कलेक्टरेट और अन्य सरकारी कार्यालयों में नियुक्तियां की जा सकेंगी। इससे मौजूदा स्वीकृत पदों की संख्या या नियमित भर्ती व्यवस्था को प्रभावित किए बिना विशेष श्रेणी के तहत नियुक्तियां करने का रास्ता तैयार होगा।
हर जिले में बनेगी स्क्रीनिंग कमेटी, DM करेंगे नेतृत्व
सरकार ने पूरी प्रक्रिया को दस्तावेजों के आधार पर संचालित करने के लिए जिला स्तर पर विशेष स्क्रीनिंग कमेटी बनाने का फैसला किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) करेंगे। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक (SP) या कोलकाता में पुलिस उपायुक्त (DC) स्तर के अधिकारी और सरकारी अभियोजन पक्ष के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे। कमेटी का मुख्य काम यह पता लगाना होगा कि संबंधित व्यक्ति की मौत वास्तव में राजनीतिक हिंसा के कारण हुई थी या नहीं।
इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को आधार बनाया जाएगा:
- संबंधित पुलिस थाने में दर्ज FIR की शुरुआती जानकारी।
- पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल चार्जशीट।
- अदालत में आरोप तय किए जाने से संबंधित रिकॉर्ड।
इन दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी परिवार के दावे को आगे बढ़ाने की सिफारिश की जाएगी।
आवेदन पर 90 दिनों में होगी जांच, असंतुष्ट होने पर कर सकेंगे अपील
आवेदन मिलने के बाद जिला स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी को अधिकतम 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करके अपनी सिफारिश गृह विभाग को भेजनी होगी। यदि किसी आवेदक को जिला कमेटी के फैसले से आपत्ति होती है, तो उसके लिए अपील का रास्ता भी खुला रखा गया है। ऐसे आवेदक संबंधित निर्णय के 30 दिनों के भीतर गृह सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय कमेटी के सामने अपनी शिकायत रख सकते हैं। इस व्यवस्था के जरिए किसी आवेदन को अस्वीकार किए जाने की स्थिति में भी उम्मीदवार को उच्च स्तर पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
नौकरी मिलने के बाद भी पूरी करनी होगी एक जरूरी शर्त
सरकार ने नियुक्ति के बाद भी नौकरी पाने वाले व्यक्ति के लिए एक विशेष जिम्मेदारी तय की है। नियुक्त कर्मचारी को हर साल 31 जनवरी तक लिखित अंडरटेकिंग जमा करनी होगी। इसमें उसे यह घोषणा करनी होगी कि वह राजनीतिक हिंसा में मारे गए व्यक्ति के परिवार के अन्य आश्रित सदस्यों की जिम्मेदारी और देखभाल कर रहा है। यानी इस योजना के तहत नौकरी पाने वाले व्यक्ति से अपेक्षा की जाएगी कि वह रोजगार के जरिए मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा का लाभ परिवार के अन्य जरूरतमंद सदस्यों तक भी पहुंचाए। इसके अलावा नियुक्ति और सेवा से जुड़ी दूसरी शर्तें ग्रुप-डी कर्मचारियों पर लागू सरकारी नियमों के अनुसार निर्धारित होंगी।
कब से लागू होगी यह योजना?
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था आधिकारिक गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होगी। इसके बाद संबंधित प्रशासनिक स्तर पर पात्र परिवारों के आवेदनों की प्रक्रिया और जांच आगे बढ़ाई जाएगी। पिछले 25 वर्षों में राजनीतिक हिंसा से प्रभावित परिवारों की पहचान करना और पुराने मामलों में मृत्यु के कारणों की पुष्टि करना प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण काम होगा। ऐसे मामलों में पुलिस रिकॉर्ड और अदालत से जुड़े दस्तावेजों की भूमिका अहम रहेगी। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल सरकार की इस योजना के तहत राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के एक योग्य सदस्य को सरकारी रोजगार देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जो निर्धारित आर्थिक, शैक्षणिक और कानूनी शर्तों पर खरे उतरेंगे।