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होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय क्रू वाले तेल टैंकर पर हमला, इंजन रूम में लगी आग; 27 नाविक सुरक्षित, एक महीने में पांचवीं घटना

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर व्यापारिक जहाज को निशाना बनाया गया है। शुक्रवार को 27 भारतीय क्रू सदस्यों को लेकर जा रहे तेल टैंकर MT लुईस 1 पर हमला हुआ।. . .

ओमान के पास पनामा के झंडे वाले MT लुईस 1 को बनाया गया निशाना, दो लिम्पेट माइंस से किए गए धमाके; अमेरिका-ईरान तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर व्यापारिक जहाज को निशाना बनाया गया है। शुक्रवार को 27 भारतीय क्रू सदस्यों को लेकर जा रहे तेल टैंकर MT लुईस 1 पर हमला हुआ। पनामा के झंडे वाले इस जहाज पर कथित तौर पर दो लिम्पेट माइंस लगाई गई थीं, जिनमें विस्फोट के बाद इंजन रूम में आग लग गई। धमाके के कारण जहाज का संचालन कुछ समय के लिए ठप हो गया। हालांकि, चालक दल ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पा लिया। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि जहाज पर सवार सभी 27 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। हादसे में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। पिछले एक महीने के दौरान भारतीय क्रू सदस्यों वाले जहाजों पर यह पांचवां हमला बताया जा रहा है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पहली बार लिम्पेट माइंस से जहाज को बनाया गया निशाना

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद होर्मुज क्षेत्र में लिम्पेट माइंस के इस्तेमाल से हमले की यह पहली घटना है। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के अनुसार, MT लुईस 1 पर हमला ओमान के खासाब शहर से लगभग 46 किलोमीटर दूर हुआ। विस्फोट के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई, लेकिन क्रू सदस्यों ने स्थिति को संभाल लिया और किसी बड़ी दुर्घटना को टाल दिया। लिम्पेट माइंस ऐसे विस्फोटक उपकरण होते हैं, जिन्हें जहाज के बाहरी हिस्से से चिपकाया जा सकता है। समुद्री व्यापारिक जहाजों के खिलाफ इनका इस्तेमाल सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा माना जाता है।

होर्मुज में बढ़ती घटनाएं, समुद्री व्यापार पर संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य या सुरक्षा संबंधी घटना का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी से 27 अक्टूबर के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में 120 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें व्यापारिक जहाजों पर हमले भी शामिल हैं। भारतीय नाविकों की मौजूदगी वाले जहाजों पर लगातार हो रही घटनाओं के कारण भारत के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण बन गया है।

अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान पर नए हमले की आशंका

समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की खबरों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ तेज सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर सकते हैं। संभावित लक्ष्यों में ईरान के तेल और गैस प्रतिष्ठान, परमाणु केंद्र तथा मिसाइल और ड्रोन से जुड़े ठिकाने शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य तैयारियां बढ़ा दी हैं। कुछ संवेदनशील ठिकानों से सैनिकों को हटाने और हथियारों का भंडार बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, इजराइल की सुरक्षा मजबूत करने के लिए पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली भी भेजी जा रही है। यह प्रणाली दुश्मन की बैलिस्टिक और अन्य हवाई मिसाइलों सहित कुछ प्रकार के हवाई खतरों को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर नए हमले को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है।

अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत के रास्ते भी खुले

एक ओर जहां सैन्य तैयारियों की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने गुरुवार को बताया कि उसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से एक पत्र मिला है, लेकिन उसने अभी तक उसका जवाब नहीं दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, दोनों देशों के बीच शांति वार्ता दोबारा शुरू कराने के प्रयास किए गए थे। ईरान ने अमेरिका के सामने अपनी सात शर्तें पूरी करने की मांग भी दोहराई है। हालांकि, इस पत्र को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बयान अलग है। ट्रम्प ने दावा किया कि जेडी वेंस ने ईरान से शांति वार्ता के सिलसिले में संपर्क नहीं किया था। उनके मुताबिक, ईरान ने बीमार लोगों के लिए दवाइयों और जरूरी चिकित्सा सामग्री की मांग की थी, जिसे उपलब्ध कराने की मंजूरी उन्होंने दे दी।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा बनी बड़ी चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य में MT लुईस 1 पर हुआ हमला केवल एक जहाज पर हमला नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए बढ़ते खतरे का संकेत भी है। इस मार्ग पर तनाव जारी रहने से तेल आपूर्ति, मालवाहक जहाजों की आवाजाही और नाविकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। भारत के लिए स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन और व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

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