नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ दस्तक दी। तूफान के असर से कई इलाकों में पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं और जनजीवन प्रभावित हुआ। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में तीन लोगों की मौत हुई है और 31 मकानों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, करीब 57 हजार लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। चक्रवात के कारण रेल और हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है। दक्षिण तटीय रेलवे ने 50 से अधिक ट्रेनों को रद्द किया है, जबकि विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम हवाई अड्डों पर भी कई उड़ानें रद्द या स्थगित की गई हैं। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। तूफान के कमजोर पड़ने के बाद भी कई इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है।
आंध्र प्रदेश के 764 गांव प्रभावित, तीन लोगों की मौत
NDRF के इंस्पेक्टर जनरल एन. एस. बुंडेला ने बुधवार को बताया कि चक्रवात का सबसे ज्यादा असर उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा में देखने को मिला है। आंध्र प्रदेश में अब तक 31 मकानों के क्षतिग्रस्त होने और तीन लोगों की मौत की सूचना मिली है। बुंडेला के मुताबिक, बुधवार सुबह तक आंध्र प्रदेश के 764 गांव प्रभावित हुए थे। प्रशासन और बचाव दलों ने निचले इलाकों तथा जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। विशाखापत्तनम, विजयनगरम, अनाकापल्ली और श्रीकाकुलम जिलों में बारिश का अधिक असर देखा गया। वहीं, ओडिशा के कोरापुट, गंजाम और गजपति जिलों में भी भारी बारिश हुई। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, नुकसान का आकलन जारी है। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ सड़कों और जरूरी सेवाओं को बहाल करने में जुटे हैं।
57 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
चक्रवात के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर ली थी। निचले इलाकों, समुद्र के नजदीक बसे गांवों और तेज हवाओं से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को निकालने का अभियान चलाया गया। NDRF के अनुसार, आंध्र प्रदेश में करीब 57 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया। बचाव अभियान में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता दी गई। गर्भवती महिलाओं को जरूरत के अनुसार पहले ही अस्पतालों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। अधिकारियों ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
NDRF की 39 और SDRF की 80 टीमें तैनात
चक्रवात से निपटने के लिए आंध्र प्रदेश में बड़े स्तर पर बचाव दल तैनात किए गए हैं। NDRF की 39 टीमें और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 80 टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। इसके अलावा, भारतीय वायु सेना ने मंगलवार रात दो उड़ानें संचालित कर आंध्र प्रदेश में NDRF की चार अतिरिक्त टीमों को पहुंचाने में मदद की। बचाव दलों ने संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को निकालने के साथ-साथ जोखिम पैदा करने वाले होर्डिंग और नावों को भी सुरक्षित स्थानों पर हटाया। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर दूसरे राज्यों से भी अतिरिक्त टीमें भेजी जा सकती हैं।
50 से ज्यादा ट्रेनें रद्द, कई उड़ानें भी प्रभावित
चक्रवात के कारण रेल और हवाई यातायात पर भी असर पड़ा है। दक्षिण तटीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 57 ट्रेनों को रद्द करने और 15 ट्रेनों के समय में बदलाव करने की जानकारी दी है। रेल सेवाओं पर असर के चलते यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति की जांच करने की सलाह दी गई है। हवाई यातायात में भी व्यवधान आया है। विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और राजमुंदरी हवाई अड्डों पर खराब मौसम के कारण उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। विभिन्न एयरलाइंस ने कई उड़ानें रद्द कीं या उनके संचालन में बदलाव किया। 27 अक्टूबर को विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम हवाई अड्डों पर कम से कम 21 उड़ानें रद्द होने की खबर थी। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या ऐप पर उड़ान की ताजा स्थिति जरूर जांच लें।
ओडिशा में भी भारी बारिश, कई जिले प्रभावित
चक्रवात का असर केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। दक्षिणी ओडिशा के कुछ जिलों में भी तेज बारिश हुई। गंजाम, गजपति और कोरापुट में मौसम का प्रभाव देखा गया। हालांकि, NDRF की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ओडिशा में आंध्र प्रदेश जैसी गंभीर क्षति की सूचना नहीं थी। इसके बावजूद प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखी है। तटीय इलाकों में समुद्र की स्थिति खराब होने और तेज हवाओं के कारण मछुआरों को समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
तूफान कमजोर होकर गहरे दबाव में बदल सकता है
NDRF के इंस्पेक्टर जनरल एन. एस. बुंडेला ने बताया कि चक्रवात के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने का अनुमान है। उनके अनुसार, तूफान की तीव्रता कम होकर चक्रवाती तूफान और फिर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदल सकती है। हालांकि, तूफान के कमजोर होने का अर्थ यह नहीं है कि बारिश का खतरा तत्काल खत्म हो जाएगा। तटीय और आसपास के इलाकों में भारी बारिश से जलभराव, सड़कें बंद होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं बनी रह सकती हैं।
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी मौसम पर नजर
चक्रवात से जुड़ी नमी और मौसम प्रणाली के प्रभाव को देखते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा के बाहर के राज्यों में भी मौसम पर नजर रखी जा रही है। NDRF अधिकारी ने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी संभावित प्रभाव का उल्लेख किया है। हालांकि, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बारिश के अलर्ट की सटीक स्थिति, प्रभावित जिलों और चेतावनी के स्तर की पुष्टि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम बुलेटिन से की जानी चाहिए। सभी राज्यों में बारिश की तीव्रता एक जैसी होने की संभावना नहीं है।
प्रशासन की प्राथमिकता राहत और सामान्य स्थिति बहाल करना
चक्रवात के बाद प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखना, राहत शिविरों में भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा बिजली और सड़क सेवाओं को बहाल करना प्रमुख चुनौती है। बचाव दलों के साथ स्थानीय प्रशासन भी प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रख रहा है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने, मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान देने और बिना जरूरत जोखिम वाले इलाकों में न जाने की अपील की है। फिलहाल आंध्र प्रदेश में राहत और बचाव अभियान जारी है। 57 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि क्षतिग्रस्त मकानों, सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं का आकलन किया जा रहा है। आने वाले समय में मौसम की स्थिति और सरकारी एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर नुकसान का वास्तविक आंकड़ा स्पष्ट होगा।