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MLC चुनाव में BJP-NDA को बढ़त, कर्नाटक की चारों सीटों पर गठबंधन की जीत; यूपी में सपा ने भी दर्ज की सफलता

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने राज्यों की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में हुए इन चुनावों में भारतीय जनता. . .

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने राज्यों की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में हुए इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों को कई सीटों पर सफलता मिली है। वहीं, समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जन सुराज और महाराष्ट्र में शरद पवार गुट ने भी कुछ सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। कर्नाटक में BJP और जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS गठबंधन ने सभी चार सीटें जीत ली हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने शुरुआती घोषित नतीजों में चार सीटें जीतीं, जबकि वाराणसी शिक्षक सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई। महाराष्ट्र में मतगणना जारी रहने के दौरान मुकाबला कई सीटों पर दिलचस्प बना हुआ है।

चार राज्यों की 28 सीटों पर हुआ चुनाव

चारों राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान हुआ था। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतगणना शुरू हुई। इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाताओं ने बैलेट पेपर के माध्यम से अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

राज्यवार सीटों का विवरण इस प्रकार है:

  • उत्तर प्रदेश: 11 सीटें
  • बिहार: 8 सीटें
  • महाराष्ट्र: 5 सीटें
  • कर्नाटक: 4 सीटें

इन चुनावों को संबंधित राज्यों में राजनीतिक दलों के बीच प्रभाव और संगठनात्मक समर्थन के आकलन के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे सामान्य विधानसभा चुनावों के परिणामों के सीधे समान नहीं माने जा सकते।

उत्तर प्रदेश: भाजपा ने चार सीटें जीतीं, सपा को वाराणसी में सफलता

उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला देखने को मिला। शुरुआती घोषित परिणामों में भाजपा ने चार सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी को वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सफलता मिली। भाजपा के विजयी उम्मीदवारों में लखनऊ शिक्षक सीट से उमेश त्रिवेदी, मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा, मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल और बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से हरि सिंह ढिल्लों शामिल हैं। समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने वाराणसी शिक्षक सीट पर जीत हासिल की। अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना के दौरान मुकाबला जारी था। इसलिए शुरुआती रुझानों को अंतिम नतीजों से अलग समझना जरूरी है।

लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की चुनौती

लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह की बढ़त को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई। सपा नेताओं ने इसे पार्टी के लिए उत्साहजनक संकेत बताया और बैलेट पेपर से हुए मतदान का हवाला दिया। दूसरी ओर, भाजपा के प्रदर्शन को उसके समर्थक शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच पार्टी के समर्थन के रूप में देख रहे हैं। दोनों दलों के दावों का आकलन आधिकारिक परिणामों और निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के ये नतीजे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन केवल इन सीमित निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव का परिणाम तय नहीं किया जा सकता।

बिहार: RJD, भाजपा, जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवार ने जीतीं शिक्षक सीटें

बिहार की आठ विधान परिषद सीटों में चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम सामने आए। इन परिणामों में अलग-अलग राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय उम्मीदवार को सफलता मिली।

  • पटना शिक्षक सीट: RJD के डॉ. संजीव कुमार यादव ने भाजपा के नवल किशोर यादव को हराया।
  • तिरहुत शिक्षक सीट: भाजपा के नरेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की।
  • दरभंगा शिक्षक सीट: जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय विजयी हुए।
  • सारण शिक्षक सीट: भाजपा के बागी उम्मीदवार और निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज ने जीत हासिल की।

इन नतीजों से बिहार में मुकाबले की बहुआयामी तस्वीर सामने आई है। जहां भाजपा को तिरहुत में सफलता मिली, वहीं पटना में RJD और दरभंगा में जन सुराज ने अपनी जगह बनाई। सारण में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने भी चुनाव को चर्चा में ला दिया।

शेष स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणामों को लेकर मतगणना की स्थिति अलग-अलग रही। इसलिए सभी आठ सीटों पर अंतिम दलवार स्थिति का निष्कर्ष आधिकारिक परिणामों के बाद ही निकाला जाना चाहिए।

महाराष्ट्र: महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच मुकाबला

महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों पर मतगणना के दौरान सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी से जुड़े उम्मीदवारों के बीच मुकाबला बना रहा। इन सीटों में पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर की स्नातक सीटें तथा पुणे और अमरावती की शिक्षक सीटें शामिल हैं। पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा के कौस्तुभ गावडे और शिवसेना के बागी उम्मीदवार सचिन सानप के बीच मुकाबला चर्चा में रहा। अमरावती शिक्षक सीट पर शिवसेना उम्मीदवार किरण सरनाईक भी प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में नागपुर और पुणे के साथ छत्रपति संभाजीनगर की सीट पर भी मतगणना महत्वपूर्ण रही। महाराष्ट्र में प्राथमिक रुझानों को अंतिम परिणाम मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि कुछ सीटों पर वरीयता मतों की गिनती और मतों के हस्तांतरण की प्रक्रिया परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

कर्नाटक: भाजपा-JDS गठबंधन ने जीतीं चारों सीटें

कर्नाटक में BJP और JDS गठबंधन ने चारों विधान परिषद सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि एक सीट JDS के खाते में गई। इस परिणाम से राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस को इन चुनावों में कोई सीट नहीं मिली। बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JDS समर्थित उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुत्तन्ना को 908 मतों से हराया। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुत्तन्ना को 9,902 वोट प्राप्त हुए। भाजपा ने पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एसवी संकानूर, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से शशिल जी नामोशी और दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से केएम सुरेश की जीत के साथ तीन अन्य सीटें भी अपने नाम कीं। इन परिणामों को भाजपा-JDS गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, विधान परिषद की इन चार सीटों पर जीत से राज्य सरकार का बहुमत सीधे प्रभावित नहीं होता। इसलिए इसे कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक झटका तो कहा जा सकता है, लेकिन राज्य सरकार के भविष्य पर इसका सीधा असर मानना सही नहीं होगा।

बैलेट पेपर से मतदान, लेकिन क्या इससे EVM पर बहस का जवाब मिलता है?

इन चुनावों में मतदान बैलेट पेपर से हुआ था। इसी वजह से परिणामों के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं और चुनाव प्रक्रिया को लेकर बहस चर्चा में है। हालांकि, बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद चुनावों के नतीजे अपने आप में EVM से जुड़े आरोपों को सही या गलत साबित नहीं करते। दोनों मतदान प्रणालियों की निष्पक्षता पर किसी निष्कर्ष के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं, सत्यापन, चुनावी नियमों और उपलब्ध प्रमाणों का परीक्षण जरूरी होता है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता समूह भी सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होता है। इसलिए इन चुनावों के नतीजों को व्यापक जनमत का पूर्ण प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा।

चारों राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर

चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के नतीजों में भाजपा और उसके सहयोगियों को कई महत्वपूर्ण सफलताएं मिली हैं। कर्नाटक में BJP-JDS गठबंधन ने सभी चार सीटें जीतीं, जबकि उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों को सफलता मिली। बिहार में RJD, भाजपा, जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवार ने शिक्षक सीटों पर जीत दर्ज की। महाराष्ट्र में मतगणना के दौरान मुकाबला कई निर्वाचन क्षेत्रों में जारी रहा। इन परिणामों से संबंधित राज्यों में स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के बीच राजनीतिक दलों के समर्थन की तस्वीर सामने आती है। लेकिन आगामी विधानसभा चुनावों पर इनके प्रभाव का आकलन करने के लिए व्यापक जनमत, स्थानीय मुद्दों और आधिकारिक चुनावी आंकड़ों को भी ध्यान में रखना होगा।

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