रिकॉर्ड तेजी के बाद चांदी में हाहाकार, कुछ ही महीनों में ₹2 लाख से ज्यादा सस्ती हुई सफेद धातु
नई दिल्ली: चांदी की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी के बाद अब बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। जनवरी 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाली चांदी अब फिसलकर 2 लाख रुपये प्रति किलो के नीचे आ गई है। इस भारी गिरावट ने निवेशकों से लेकर शादी-ब्याह और त्योहारों के लिए चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों तक को चौंका दिया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत जनवरी 2026 में करीब 4.27 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। वहीं, अक्टूबर 2026 के शुक्रवार को इसका भाव करीब 3,500 रुपये गिरकर 1,96,100 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ। इस तरह रिकॉर्ड स्तर से चांदी की कीमत में करीब 2.31 लाख रुपये यानी लगभग 54% की गिरावट दर्ज की गई। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई और क्या मौजूदा भाव पर खरीदारी करना समझदारी होगी?
₹1.52 लाख से ₹4.27 लाख और फिर ₹1.96 लाख! ऐसे बदला चांदी का भाव
पिछले कुछ महीनों में चांदी की कीमतों में असाधारण उतार-चढ़ाव देखने को मिला। पहले कीमतों ने तेजी से नए रिकॉर्ड बनाए और फिर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ने लगा।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, चांदी की कीमतों का सफर कुछ इस तरह रहा:
| तारीख | चांदी का भाव प्रति किलो |
|---|---|
| 8 अक्टूबर 2025 | ₹1,52,700 |
| 18 दिसंबर 2025 | ₹2 लाख के पार |
| 12 जनवरी 2026 | ₹2.5 लाख के पार |
| 20 जनवरी 2026 | ₹3 लाख के पार |
| जनवरी 2026 के अंत में | ₹4.27 लाख के करीब |
| 2 फरवरी 2026 | ₹2,65,751 |
| अक्टूबर 2026 के संबंधित शुक्रवार को | ₹1,96,100 |
इन आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया था। लेकिन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद तेजी टिक नहीं पाई और कीमतों में भारी गिरावट शुरू हो गई।
नोट: ये दिए गए MCX भाव हैं। खुदरा बाजार में चांदी की कीमत शहर, शुद्धता, टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण अलग हो सकती है।
चांदी की कीमतों में गिरावट के 5 सबसे बड़े कारण
1. रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों ने शुरू की मुनाफावसूली
चांदी की कीमतें जब तेजी से बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं, तो कई निवेशकों के पास मुनाफा निकालने का अवसर था। ऐसे में ऊंचे भाव पर बिकवाली बढ़ने से कीमतों पर दबाव आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में गिरावट का असर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) पर भी पड़ सकता है। जब बड़ी संख्या में निवेशक अपनी होल्डिंग बेचते हैं, तो बाजार में गिरावट और तेज हो सकती है।
2. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता
अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी चांदी के बाजार को प्रभावित कर सकती है। अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखता है, तो निवेशकों के लिए बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली संपत्तियां अधिक आकर्षक हो सकती हैं। चांदी से नियमित ब्याज नहीं मिलता। इसलिए ऊंची बॉन्ड यील्ड के माहौल में कुछ निवेशक चांदी जैसी कीमती धातुओं से पैसा निकालकर दूसरी संपत्तियों में लगा सकते हैं।
3. मजबूत डॉलर और महंगे कच्चे तेल का दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर पड़ता है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में चांदी खरीदना महंगा हो सकता है, जिससे मांग प्रभावित होने की आशंका रहती है। वहीं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा सकती हैं। इससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है और कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ सकता है।
4. औद्योगिक मांग कमजोर पड़ने की आशंका
चांदी सिर्फ गहने और निवेश के लिए इस्तेमाल होने वाली धातु नहीं है। इसका उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई औद्योगिक उपकरणों में भी होता है। अगर ऊर्जा लागत बढ़ती है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो कंपनियों की उत्पादन लागत और निवेश योजनाओं पर असर पड़ सकता है। इससे औद्योगिक मांग धीमी पड़ने की आशंका पैदा होती है। हालांकि, औद्योगिक मांग में वास्तविक गिरावट और केवल गिरावट की आशंका के बीच अंतर करना जरूरी है। लंबी अवधि में सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की जरूरतें चांदी की मांग को सहारा दे सकती हैं।
5. भारत में आयात की अनुमति से सप्लाई बढ़ने की संभावना
भारत अपनी चांदी की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में आयात नीति में बदलाव का घरेलू बाजार पर असर पड़ सकता है। दिए गए विवरण के मुताबिक, रॉयटर्स की रिपोर्ट में सरकार की ओर से अगले छह महीनों के लिए 6,500 मीट्रिक टन चांदी के आयात की अनुमति का उल्लेख है। यदि इससे बाजार में उपलब्धता बढ़ती है, तो घरेलू कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, आयात की अनुमति अपने आप में कीमत गिरने का एकमात्र कारण नहीं है। वास्तविक प्रभाव आयात की मात्रा, अंतरराष्ट्रीय भाव, घरेलू मांग और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर निर्भर करेगा।
क्या अभी चांदी खरीदने का सही मौका है?
चांदी की कीमत रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुकी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब कीमतें निश्चित रूप से बढ़ेंगी। बाजार में अभी भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निकट अवधि में चांदी की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे:
- अमेरिकी डॉलर की चाल और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत।
- भारत में आयात, घरेलू प्रीमियम और उपलब्ध सप्लाई।
- सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों की मांग।
- निवेशकों की खरीदारी और मुनाफावसूली।
इसलिए केवल कीमत में बड़ी गिरावट देखकर खरीदारी का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।
शादी-ब्याह के लिए खरीदनी है चांदी? एक साथ पैसा लगाने से बचें
अगर आप शादी, त्योहार या घरेलू जरूरत के लिए चांदी खरीदना चाहते हैं, तो पूरी खरीदारी एक ही दिन करने के बजाय उसे अलग-अलग चरणों में बांटने पर विचार कर सकते हैं। इस रणनीति से कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच एक ही भाव पर पूरी खरीदारी करने का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, इससे मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती और कीमतें आगे भी गिर सकती हैं।
खरीदारी से पहले इन बातों पर ध्यान दें:
- स्थानीय बाजार में प्रति किलो या प्रति ग्राम का वास्तविक भाव पता करें।
- चांदी की शुद्धता और बिल जरूर जांचें।
- सिक्के, बार और आभूषणों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क समझें।
- निवेश के उद्देश्य से खरीद रहे हैं, तो भंडारण, बिक्री और अन्य लागतों पर भी विचार करें।
क्या अगले साल दिवाली तक ₹3 लाख के पार पहुंचेगी चांदी?
दिए गए विवरण में कुछ विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि निकट अवधि में चांदी का घरेलू भाव 1.95 लाख रुपये प्रति किलो तक आ सकता है। वहीं, अगले साल दिवाली तक कीमत 3 लाख से 3.25 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंचने की संभावना भी व्यक्त की गई है। लेकिन ये बाजार संबंधी अनुमान हैं, सुनिश्चित लक्ष्य नहीं। चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी तेजी के लिए अंतरराष्ट्रीय मांग, डॉलर, ब्याज दरों और औद्योगिक खपत जैसे कारकों का समर्थन जरूरी होगा। अगर मांग मजबूत रहती है और बाजार में खरीदारी लौटती है, तो कीमतों को सहारा मिल सकता है। इसके विपरीत, डॉलर मजबूत रहने, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर होने या औद्योगिक मांग घटने पर गिरावट आगे भी जारी रह सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है सबसे जरूरी बात?
चांदी ने कुछ ही महीनों में तेज उछाल के बाद भारी गिरावट दिखाई है। रिकॉर्ड स्तर से करीब 54% नीचे आया भाव खरीदारी के अवसर जैसा लग सकता है, लेकिन बाजार में अस्थिरता अभी भी बड़ा जोखिम है। अगर आप चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो फैसला केवल पुराने रिकॉर्ड भाव या मौजूदा गिरावट के आधार पर न लें। अपनी जरूरत, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखें। विशेषज्ञों के अनुमान को संभावनाओं के रूप में देखें, गारंटी के रूप में नहीं।