टाइगर श्रॉफ के घर पर फायरिंग से पहले 3-4 दिन तक चली गन प्रैक्टिस, क्राइम ब्रांच की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान नए खुलासे सामने आए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि उन्होंने वारदात को अंजाम देने से पहले मुंबई की आरे कॉलोनी के जंगल में गोली चलाने का अभ्यास किया था। इस मामले में अब तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आरोपी ऋतिक, रेहान अंसारी और फूल सिंह ने कथित तौर पर जंगल के एक सुनसान इलाके में तीन से चार दिनों तक अभ्यास किया। हर दिन करीब दो से ढाई घंटे तक चलने वाली इस प्रैक्टिस में पहले एयरगन और फिर असली पिस्टल का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि हथियार कहां से आया, आरोपियों को किसने निर्देश दिए और वारदात के पीछे कथित हैंडलर्स की क्या भूमिका थी।
वारदात से पहले जंगल में चलीं गोलियां, चरवाहे ने भी किया दावा
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले के आरोपियों ने आरे कॉलोनी के घने जंगल में एक सुनसान जगह को गोली चलाने के अभ्यास के लिए चुना था। एक स्थानीय चरवाहे ने दावा किया है कि घटना से कुछ दिन पहले उसने इलाके में गोलियां चलने की आवाज सुनी थी। यह दावा पुलिस की जांच में सामने आए कथित घटनाक्रम से मेल खाता है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि और साक्ष्यों का महत्व जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पहले एयरगन से अभ्यास किया और बाद में असली पिस्टल से फायरिंग की। पूछताछ में कथित तौर पर बताया गया कि एक आरोपी ने दो राउंड और दूसरे ने एक राउंड गोली चलाई थी।
17 अक्टूबर को मिला असली हथियार, उसी शाम की गन प्रैक्टिस
पूछताछ से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, फायरिंग में इस्तेमाल किया गया असली हथियार आरोपियों को 17 अक्टूबर को एक होटल में मिला था। इसके बाद उसी शाम वे आरे कॉलोनी के जंगल में पहुंचे और वहां कथित तौर पर गोली चलाने का अभ्यास किया। जांच एजेंसियां अब हथियार की सप्लाई, उसे आरोपियों तक पहुंचाने वाले लोगों और पूरी साजिश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों को हथियार उपलब्ध कराने और वारदात को अंजाम देने के निर्देश देने में कौन-कौन शामिल था।
फोन कॉल और मैसेज के जरिए हैंडलर्स से जुड़े थे शूटर
इस मामले में एक और अहम पहलू कथित हैंडलर्स की भूमिका है। मुंबई क्राइम ब्रांच को शक है कि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी फोन कॉल और मैसेज के जरिए अपने हैंडलर्स के संपर्क में थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटना से पहले और उसके दौरान आरोपियों को निर्देश तथा अपडेट मिल रहे थे। जांचकर्ताओं को यह भी संदेह है कि वारदात के बाद भी आरोपी अपने हैंडलर्स से संपर्क में बने रहे। अब पुलिस इन संपर्कों की पड़ताल कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग की योजना किसने बनाई और आरोपियों को किस तरह निर्देशित किया जा रहा था।
टीवी पर तस्वीरें दिखते ही सतर्क हुए हैंडलर्स?
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 18 अक्टूबर की घटना के बाद जब टीवी न्यूज कवरेज में संदिग्धों के चेहरे सामने आए, तो कथित हैंडलर्स ने आरोपियों को इसकी जानकारी दी। बताया जा रहा है कि तस्वीरें सामने आने के बाद आरोपियों को जल्द से जल्द वहां से निकलने के लिए कहा गया था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मीडिया कवरेज पर नजर रखने और आरोपियों को सतर्क करने में किसकी भूमिका थी। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो इससे वारदात के बाद आरोपियों को बचाने या उन्हें पुलिस की पकड़ से दूर रखने के कथित प्रयासों की जानकारी मिल सकती है।
क्राइम ब्रांच के सामने अब सबसे बड़े सवाल
टाइगर श्रॉफ से जुड़े इस फायरिंग मामले में पुलिस की जांच अब कथित शूटर्स के साथ-साथ उनके नेटवर्क पर भी केंद्रित है। जांच एजेंसियां कई अहम सवालों के जवाब तलाश रही हैं:
- आरोपियों को असली पिस्टल किसने उपलब्ध कराई?
- आरे कॉलोनी में फायरिंग की प्रैक्टिस कराने के पीछे किसका निर्देश था?
- कथित हैंडलर्स ने वारदात से पहले और बाद में क्या भूमिका निभाई?
- टीवी पर तस्वीरें सामने आने के बाद आरोपियों को किसने सतर्क किया?
- फायरिंग की साजिश में गिरफ्तार 10 आरोपियों में से प्रत्येक की क्या भूमिका थी?
फिलहाल, मामले में सामने आए ये खुलासे पुलिस सूत्रों और पूछताछ से जुड़ी जानकारी पर आधारित हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ हथियार की सप्लाई, कथित हैंडलर्स के नेटवर्क और फायरिंग के पीछे के मकसद को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।