नई दिल्ली: कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती! 40 हजार रुपये का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में, कीमतों में 93.3% तक कटौती
नई दिल्ली: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए दवाओं की कीमतों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। इलाज के दौरान महंगी दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार के एक फैसले से कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कटौती की गई है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बड़ी कटौती की है। इस फैसले के बाद कुछ महंगी दवाएं पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी।
40 हजार का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में
दवाओं की कीमतों में कटौती के तहत पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) कैप्सूल के एक ब्रांड की कीमत में बड़ी कमी बताई गई है। इसकी मौजूदा कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी तरह, थियोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन की कीमत भी कम की गई है। पहले इसकी कीमत 80,072 रुपये बताई गई थी, जो घटकर 7,150 रुपये हो जाएगी।
इन बदलावों से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगी।
कैंसर की 543 दवाओं की कीमतों में कटौती
NPPA ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कमी की है। यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अधिक किफायती बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
सरकार ने इससे पहले 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
मरीजों और उनके परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सभी कैंसर की दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव संबंधित दवा और उसके ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसकी संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कब से लागू होंगी नई कीमतें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ दवाओं की संशोधित कीमतें अगले दो सप्ताह के भीतर लागू होने की बात कही गई है। मरीजों को सलाह है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज MRP और संबंधित आधिकारिक मूल्य सूची की जांच करें।
कुल मिलाकर, कैंसर की दवाओं की कीमतों में यह कटौती इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक महंगी कैंसर-रोधी दवाओं का सेवन करना पड़ता है।कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती! 40 हजार रुपये का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में, कीमतों में 93.3% तक कटौती
नई दिल्ली: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए दवाओं की कीमतों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। इलाज के दौरान महंगी दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार के एक फैसले से कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कटौती की गई है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बड़ी कटौती की है। इस फैसले के बाद कुछ महंगी दवाएं पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी।
40 हजार का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में
दवाओं की कीमतों में कटौती के तहत पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) कैप्सूल के एक ब्रांड की कीमत में बड़ी कमी बताई गई है। इसकी मौजूदा कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी तरह, थियोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन की कीमत भी कम की गई है। पहले इसकी कीमत 80,072 रुपये बताई गई थी, जो घटकर 7,150 रुपये हो जाएगी।
इन बदलावों से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगी।
कैंसर की 543 दवाओं की कीमतों में कटौती
NPPA ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कमी की है। यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अधिक किफायती बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
सरकार ने इससे पहले 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
मरीजों और उनके परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सभी कैंसर की दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव संबंधित दवा और उसके ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसकी संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कब से लागू होंगी नई कीमतें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ दवाओं की संशोधित कीमतें अगले दो सप्ताह के भीतर लागू होने की बात कही गई है। मरीजों को सलाह है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज MRP और संबंधित आधिकारिक मूल्य सूची की जांच करें।
कुल मिलाकर, कैंसर की दवाओं की कीमतों में यह कटौती इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक महंगी कैंसर-रोधी दवाओं का सेवन करना पड़ता है।कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती! 40 हजार रुपये का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में, कीमतों में 93.3% तक कटौती
नई दिल्ली: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए दवाओं की कीमतों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। इलाज के दौरान महंगी दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार के एक फैसले से कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कटौती की गई है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बड़ी कटौती की है। इस फैसले के बाद कुछ महंगी दवाएं पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी।
40 हजार का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में
दवाओं की कीमतों में कटौती के तहत पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) कैप्सूल के एक ब्रांड की कीमत में बड़ी कमी बताई गई है। इसकी मौजूदा कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी तरह, थियोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन की कीमत भी कम की गई है। पहले इसकी कीमत 80,072 रुपये बताई गई थी, जो घटकर 7,150 रुपये हो जाएगी।
इन बदलावों से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगी।
कैंसर की 543 दवाओं की कीमतों में कटौती
NPPA ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कमी की है। यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अधिक किफायती बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
सरकार ने इससे पहले 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
मरीजों और उनके परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सभी कैंसर की दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव संबंधित दवा और उसके ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसकी संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कब से लागू होंगी नई कीमतें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ दवाओं की संशोधित कीमतें अगले दो सप्ताह के भीतर लागू होने की बात कही गई है। मरीजों को सलाह है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज MRP और संबंधित आधिकारिक मूल्य सूची की जांच करें।
कुल मिलाकर, कैंसर की दवाओं की कीमतों में यह कटौती इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक महंगी कैंसर-रोधी दवाओं का सेवन करना पड़ता है।कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती! 40 हजार रुपये का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में, कीमतों में 93.3% तक कटौती
नई दिल्ली: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए दवाओं की कीमतों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। इलाज के दौरान महंगी दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार के एक फैसले से कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कटौती की गई है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बड़ी कटौती की है। इस फैसले के बाद कुछ महंगी दवाएं पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी।
40 हजार का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में
दवाओं की कीमतों में कटौती के तहत पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) कैप्सूल के एक ब्रांड की कीमत में बड़ी कमी बताई गई है। इसकी मौजूदा कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी तरह, थियोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन की कीमत भी कम की गई है। पहले इसकी कीमत 80,072 रुपये बताई गई थी, जो घटकर 7,150 रुपये हो जाएगी।
इन बदलावों से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगी।
कैंसर की 543 दवाओं की कीमतों में कटौती
NPPA ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कमी की है। यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अधिक किफायती बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
सरकार ने इससे पहले 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
मरीजों और उनके परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सभी कैंसर की दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव संबंधित दवा और उसके ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसकी संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कब से लागू होंगी नई कीमतें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ दवाओं की संशोधित कीमतें अगले दो सप्ताह के भीतर लागू होने की बात कही गई है। मरीजों को सलाह है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज MRP और संबंधित आधिकारिक मूल्य सूची की जांच करें।
कुल मिलाकर, कैंसर की दवाओं की कीमतों में यह कटौती इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक महंगी कैंसर-रोधी दवाओं का सेवन करना पड़ता है।कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती! 40 हजार रुपये का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में, कीमतों में 93.3% तक कटौती
नई दिल्ली: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए दवाओं की कीमतों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। इलाज के दौरान महंगी दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार के एक फैसले से कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कटौती की गई है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बड़ी कटौती की है। इस फैसले के बाद कुछ महंगी दवाएं पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी।
40 हजार का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में
दवाओं की कीमतों में कटौती के तहत पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) कैप्सूल के एक ब्रांड की कीमत में बड़ी कमी बताई गई है। इसकी मौजूदा कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी तरह, थियोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन की कीमत भी कम की गई है। पहले इसकी कीमत 80,072 रुपये बताई गई थी, जो घटकर 7,150 रुपये हो जाएगी।
इन बदलावों से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगी।
कैंसर की 543 दवाओं की कीमतों में कटौती
NPPA ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कमी की है। यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अधिक किफायती बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
सरकार ने इससे पहले 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
मरीजों और उनके परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सभी कैंसर की दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव संबंधित दवा और उसके ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसकी संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कब से लागू होंगी नई कीमतें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ दवाओं की संशोधित कीमतें अगले दो सप्ताह के भीतर लागू होने की बात कही गई है। मरीजों को सलाह है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज MRP और संबंधित आधिकारिक मूल्य सूची की जांच करें।
कुल मिलाकर, कैंसर की दवाओं की कीमतों में यह कटौती इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक महंगी कैंसर-रोधी दवाओं का सेवन करना पड़ता है।कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती! 40 हजार रुपये का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में, कीमतों में 93.3% तक कटौती
नई दिल्ली: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए दवाओं की कीमतों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। इलाज के दौरान महंगी दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार के एक फैसले से कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कटौती की गई है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बड़ी कटौती की है। इस फैसले के बाद कुछ महंगी दवाएं पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी।
40 हजार का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में
दवाओं की कीमतों में कटौती के तहत पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) कैप्सूल के एक ब्रांड की कीमत में बड़ी कमी बताई गई है। इसकी मौजूदा कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी तरह, थियोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन की कीमत भी कम की गई है। पहले इसकी कीमत 80,072 रुपये बताई गई थी, जो घटकर 7,150 रुपये हो जाएगी।
इन बदलावों से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगी।
कैंसर की 543 दवाओं की कीमतों में कटौती
NPPA ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कमी की है। यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अधिक किफायती बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
सरकार ने इससे पहले 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
मरीजों और उनके परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सभी कैंसर की दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव संबंधित दवा और उसके ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसकी संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कब से लागू होंगी नई कीमतें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ दवाओं की संशोधित कीमतें अगले दो सप्ताह के भीतर लागू होने की बात कही गई है। मरीजों को सलाह है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज MRP और संबंधित आधिकारिक मूल्य सूची की जांच करें।
कुल मिलाकर, कैंसर की दवाओं की कीमतों में यह कटौती इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक महंगी कैंसर-रोधी दवाओं का सेवन करना पड़ता है।कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती! 40 हजार रुपये का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में, कीमतों में 93.3% तक कटौती
नई दिल्ली: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए दवाओं की कीमतों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। इलाज के दौरान महंगी दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार के एक फैसले से कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कटौती की गई है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बड़ी कटौती की है। इस फैसले के बाद कुछ महंगी दवाएं पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी।
40 हजार का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में
दवाओं की कीमतों में कटौती के तहत पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) कैप्सूल के एक ब्रांड की कीमत में बड़ी कमी बताई गई है। इसकी मौजूदा कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी तरह, थियोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन की कीमत भी कम की गई है। पहले इसकी कीमत 80,072 रुपये बताई गई थी, जो घटकर 7,150 रुपये हो जाएगी।
इन बदलावों से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगी।
कैंसर की 543 दवाओं की कीमतों में कटौती
NPPA ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कमी की है। यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अधिक किफायती बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
सरकार ने इससे पहले 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
मरीजों और उनके परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सभी कैंसर की दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव संबंधित दवा और उसके ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसकी संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कब से लागू होंगी नई कीमतें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ दवाओं की संशोधित कीमतें अगले दो सप्ताह के भीतर लागू होने की बात कही गई है। मरीजों को सलाह है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज MRP और संबंधित आधिकारिक मूल्य सूची की जांच करें।
कुल मिलाकर, कैंसर की दवाओं की कीमतों में यह कटौती इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक महंगी कैंसर-रोधी दवाओं का सेवन करना पड़ता है।कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती! 40 हजार रुपये का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में, कीमतों में 93.3% तक कटौती
नई दिल्ली: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए दवाओं की कीमतों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। इलाज के दौरान महंगी दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार के एक फैसले से कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कटौती की गई है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बड़ी कटौती की है। इस फैसले के बाद कुछ महंगी दवाएं पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी।
40 हजार का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में
दवाओं की कीमतों में कटौती के तहत पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) कैप्सूल के एक ब्रांड की कीमत में बड़ी कमी बताई गई है। इसकी मौजूदा कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी तरह, थियोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन की कीमत भी कम की गई है। पहले इसकी कीमत 80,072 रुपये बताई गई थी, जो घटकर 7,150 रुपये हो जाएगी।
इन बदलावों से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगी।
कैंसर की 543 दवाओं की कीमतों में कटौती
NPPA ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कमी की है। यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अधिक किफायती बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
सरकार ने इससे पहले 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
मरीजों और उनके परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, सभी कैंसर की दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव संबंधित दवा और उसके ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसकी संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कब से लागू होंगी नई कीमतें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ दवाओं की संशोधित कीमतें अगले दो सप्ताह के भीतर लागू होने की बात कही गई है। मरीजों को सलाह है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज MRP और संबंधित आधिकारिक मूल्य सूची की जांच करें।
कुल मिलाकर, कैंसर की दवाओं की कीमतों में यह कटौती इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक महंगी कैंसर-रोधी दवाओं का सेवन करना पड़ता है।कैंसर की कुछ दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं की कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कटौती की गई हैL राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में बड़ी कटौती की है। इस फैसले के बाद कुछ महंगी दवाएं पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगी।
40 हजार का कैप्सूल अब 2,720 रुपये में
दवाओं की कीमतों में कटौती के तहत पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) कैप्सूल के एक ब्रांड की कीमत में बड़ी कमी बताई गई है। इसकी मौजूदा कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है।इसी तरह, थियोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन की कीमत भी कम की गई है। पहले इसकी कीमत 80,072 रुपये बताई गई थी, जो घटकर 7,150 रुपये हो जाएगी।इन बदलावों से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगी।
कैंसर की 543 दवाओं की कीमतों में कटौती
NPPA ने कैंसर की 543 दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 93.3 फीसदी तक की कमी की है। यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को अधिक किफायती बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।सरकार ने इससे पहले 137 नॉन-शेड्यूल कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में लगने वाले व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
मरीजों और उनके परिवारों को कैसे मिलेगा फायदा?
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।हालांकि, सभी कैंसर की दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं हुई है। कीमत में बदलाव संबंधित दवा और उसके ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसकी संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कब से लागू होंगी नई कीमतें?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ दवाओं की संशोधित कीमतें अगले दो सप्ताह के भीतर लागू होने की बात कही गई है। मरीजों को सलाह है कि वे दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज MRP और संबंधित आधिकारिक मूल्य सूची की जांच करें।
कुल मिलाकर, कैंसर की दवाओं की कीमतों में यह कटौती इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक महंगी कैंसर-रोधी दवाओं का सेवन करना पड़ता है।