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सरकारी पद, प्राइवेट कंपनी और करोड़ों की प्रॉपर्टी! 40 विला, 2 शहर और 5.52 करोड़ की संपत्ति ! राजस्थान के IAS-IPS दंपति पर ACB का शिकंजा, जानिए क्या है पूरा मामला

राजस्थान में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और उनकी IPS पत्नी से जुड़ा कथित संपत्ति मामला चर्चा में है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच के दायरे में IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर आ गए. . .

जयपुर: राजस्थान में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और उनकी IPS पत्नी से जुड़ा कथित संपत्ति मामला चर्चा में है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच के दायरे में IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर आ गए हैं। आरोप है कि सरकारी पदों पर रहते हुए लिए गए कुछ फैसलों से एक निजी हॉस्पिटैलिटी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया और इसी कंपनी से जुड़े रिसॉर्ट्स में बेहद कम कीमत पर कई विला खरीदे गए। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा 40 विला की हो रही है, जो उदयपुर और अलवर स्थित दो रिसॉर्ट्स से जुड़े बताए जा रहे हैं। इन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 5.52 करोड़ रुपये आंकी गई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारियों के पद और उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए सरकारी फैसलों का इन संपत्तियों की खरीद से कोई संबंध था या नहीं। हालांकि, अभी ये सभी आरोप जांच के विषय हैं। किसी भी अधिकारी की दोषसिद्धि अदालत में साबित नहीं हुई है।

IAS शिखर अग्रवाल और IPS प्रशाखा माथुर जांच के घेरे में क्यों?

इस मामले के केंद्र में IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल हैं। आरोपों के मुताबिक, उन्होंने उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए एक निजी कंपनी को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया। जिस कंपनी का नाम जांच में सामने आया है, वह गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड है। यह कंपनी ‘अनंता’ ब्रांड के तहत होटल, रिसॉर्ट और हॉस्पिटैलिटी से जुड़ा कारोबार करती है। शिकायत और उपलब्ध आरोपों के आधार पर ACB यह जांच कर रही है कि कंपनी को सरकारी स्तर पर दी गई कुछ रियायतें नियमों के अनुरूप थीं या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों ने अपने पद का इस्तेमाल किसी निजी कारोबारी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए तो नहीं किया। इस मामले में IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर का नाम भी संपत्ति खरीद से जुड़े आरोपों के कारण सामने आया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संपत्तियों के स्वामित्व और भुगतान की वास्तविक व्यवस्था क्या थी।

सरकार ने ACB को जांच की अनुमति क्यों दी?

मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम राजस्थान सरकार की ओर से सामने आया है। सरकार ने IAS शिखर अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत जांच की अनुमति दी है। इस कानूनी प्रावधान के तहत किसी लोक सेवक के आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से जुड़े फैसलों की जांच शुरू करने से पहले निर्धारित सरकारी मंजूरी आवश्यक होती है। जांच की अनुमति मिलने के बाद ACB के लिए उन सरकारी निर्णयों की पड़ताल का रास्ता खुला है, जिनके बारे में कथित तौर पर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने की शिकायत की गई है।

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जांच के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • सरकारी रियायतें: क्या गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को निर्धारित नियमों से हटकर कोई वित्तीय राहत दी गई?
  • निर्माण संबंधी मंजूरियां: क्या रिसॉर्ट और होटल परियोजनाओं को आवश्यक नियमों का पालन किए बिना निर्माण संबंधी छूट मिली?
  • पर्यावरणीय मंजूरी: क्या प्रदूषण नियंत्रण और अन्य जरूरी प्रमाणपत्रों की पर्याप्त जांच किए बिना स्वीकृति दी गई?
  • पद का संभावित दुरुपयोग: क्या सरकारी पदों पर रहते हुए लिए गए फैसलों से किसी निजी कंपनी को अनुचित आर्थिक लाभ हुआ?
  • संपत्ति खरीद: क्या सरकारी फैसलों और अधिकारियों तथा उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों के बीच कोई वित्तीय या अन्य संबंध है?

ACB इन सभी पहलुओं की जांच के जरिए पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।

आखिर कहां-कहां खरीदे गए 40 विला?

इस प्रकरण में राजस्थान के दो प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों का नाम सामने आया है। इनमें पहला उदयपुर के बुझदा इलाके में स्थित अनंता रिसॉर्ट है, जबकि दूसरा अलवर के अजगढ़ क्षेत्र में मौजूद रिसॉर्ट बताया गया है। जांच में सामने आए विवरणों के अनुसार, दोनों स्थानों पर कुल 36 विला की खरीद हुई है। इन संपत्तियों का स्वामित्व IAS-IPS दंपति और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर बताया जा रहा है।

1. उदयपुर के बुझदा में 20 विला की खरीद

उदयपुर के बुझदा स्थित अनंता रिसॉर्ट से जुड़े 20 विला इस जांच का एक प्रमुख हिस्सा हैं। दिए गए विवरण के मुताबिक, मार्च 2026 में इन विला की खरीद की गई थी। बताया जा रहा है कि इनमें से 10 विला IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के नाम पर और अन्य 10 उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर के नाम पर दर्ज हैं। प्रत्येक विला की कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई है। इस हिसाब से उदयपुर में खरीदे गए 20 विला की कुल अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये होती है। जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि इन संपत्तियों के लिए भुगतान किस स्रोत से किया गया, खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई और संपत्तियों का वास्तविक बाजार मूल्य क्या था।

2. अलवर के अजगढ़ में 16 विला का मामला

दूसरा मामला अलवर जिले के अजगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट से जुड़ा है। यहां कुल 16 विला की खरीद की जानकारी जांच के दायरे में है। बताए गए विवरण के अनुसार, इन 16 संपत्तियों का बंटवारा परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर किया गया।

  • शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम पर कुल 8 विला बताए गए हैं।
  • उनके दोनों बेटों के नाम पर 4 विला दर्ज होने की जानकारी है।
  • शेष 4 विला उनके सास-ससुर के नाम पर बताए गए हैं।

इन संपत्तियों की प्रति विला कीमत लगभग 15 लाख से 16.5 लाख रुपये के बीच बताई गई है। इस तरह अलवर में खरीदे गए 16 विला की अनुमानित कुल कीमत लगभग 2.40 करोड़ से 2.64 करोड़ रुपये के बीच बैठती है। ACB इस बात की भी जांच कर सकती है कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर संपत्तियां खरीदने के पीछे क्या वित्तीय व्यवस्था थी और भुगतान वास्तव में किसने किया।

5.52 करोड़ रुपये की संपत्ति का पूरा गणित

अब तक सामने आए विवरण के मुताबिक, उदयपुर और अलवर में खरीदे गए विला की संख्या और उनकी बताई गई कीमत का गणित कुछ इस प्रकार है:

संपत्ति का स्थानविला की संख्याबताई गई कीमत
बुझदा, उदयपुर20लगभग 3 करोड़ रुपये
अजगढ़, अलवर16लगभग 2.40 से 2.64 करोड़ रुपये
कुल36लगभग 5.40 से 5.64 करोड़ रुपये

इन आंकड़ों के आधार पर कुल संपत्ति का मूल्य लगभग 5.52 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। हालांकि, यह राशि उपलब्ध प्रति विला कीमतों का अनुमानित हिसाब है। संपत्तियों का वास्तविक बाजार मूल्य, रजिस्ट्री में दर्ज कीमत और भुगतान की पूरी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ACB के लिए सबसे बड़ा सवाल: सरकारी फैसलों और संपत्ति खरीद में क्या है संबंध?

इस पूरे मामले में केवल विला की संख्या ही जांच का विषय नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या सरकारी पदों पर रहते हुए किसी कंपनी को दिए गए कथित लाभ और बाद में परिवार के सदस्यों के नाम पर हुई संपत्ति खरीद के बीच कोई संबंध है? अगर जांच में सरकारी फैसलों और निजी आर्थिक लाभ के बीच कोई संबंध सामने आता है, तो मामला भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े गंभीर कानूनी सवाल खड़े कर सकता है। ACB को यह भी देखना होगा कि संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था। क्या भुगतान संबंधित अधिकारियों की घोषित आय से किया गया था या इसमें किसी अन्य व्यक्ति अथवा कारोबारी संस्था की भूमिका थी? इसके अलावा, रिसॉर्ट संचालक कंपनी को दी गई मंजूरियों, रियायतों और निर्माण संबंधी अनुमतियों के दस्तावेजों की जांच भी इस प्रकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

कौन हैं IAS शिखर अग्रवाल और IPS प्रशाखा माथुर?

शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। वे राज्य प्रशासन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जैसे पदों पर उनकी भूमिका रही है। वहीं, उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी हैं। दोनों के प्रशासनिक पदों और परिवार के नाम पर सामने आई संपत्तियों के कारण यह मामला विशेष रूप से चर्चा में है। हालांकि, अधिकारियों की सेवा संबंधी विस्तृत पृष्ठभूमि, उनकी वर्तमान पोस्टिंग और मामले में उनकी व्यक्तिगत भूमिका की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।

जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर

राजस्थान का यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें सरकारी मंजूरियों, निजी कारोबारी हितों और परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति खरीद जैसे कई पहलू एक साथ जुड़े हुए हैं। फिलहाल ACB के सामने यह स्पष्ट करना सबसे अहम है कि क्या संबंधित कंपनी को नियमों से हटकर फायदा दिया गया था और क्या उस कथित लाभ का किसी रूप में अधिकारियों या उनके परिवार को फायदा मिला। 36 विला और लगभग 5.52 करोड़ रुपये की संपत्तियों से जुड़े आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकारी पदों के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। लेकिन इन सवालों का अंतिम जवाब जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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