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गर्भ में पल रहे बच्चे पर पिता का भी अधिकार, वैवाहिक विवाद गर्भपात का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद के चलते गर्भपात की अनुमति मांगने वाली एक महिला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। महिला ने छह महीने से अधिक की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति मांगी थी।. . .

6 महीने से अधिक की गर्भावस्था खत्म करने की महिला ने मांगी अनुमति, पति ने किया विरोध; तलाक और गर्भपात की मांग पर बुधवार को फिर होगी सुनवाई

नई दिल्ली। पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद के चलते गर्भपात की अनुमति मांगने वाली एक महिला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। महिला ने छह महीने से अधिक की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति मांगी थी। वहीं, उसके पति ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि गर्भ में पल रहे बच्चे पर उसका भी अधिकार है और वह बच्चे के जन्म के बाद उसकी देखभाल करने को तैयार है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि पति-पत्नी के बीच विवाद या वैवाहिक कलह अपने आप में गर्भपात की अनुमति देने का आधार नहीं हो सकता। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

‘पिता के अधिकारों का क्या होगा?’ सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामला सामान्य परिस्थितियों से अलग है। पीठ ने बलात्कार, यौन उत्पीड़न या भ्रूण में गंभीर चिकित्सकीय समस्या जैसी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में गर्भपात की मांग का आधार पति और ससुराल पक्ष के साथ वैवाहिक विवाद है। अदालत ने सवाल किया कि यदि पति या ससुराल वालों के साथ अनबन के आधार पर महिला गर्भपात कराना चाहती है, तो ऐसे मामलों में अजन्मे बच्चे और पिता के अधिकारों पर क्या विचार किया जाएगा? पीठ ने महिला को समझाने की कोशिश करते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच मतभेद होना अलग बात है, लेकिन इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे के जीवन पर डालने का फैसला गंभीर विषय है।

महिला बोली- गर्भपात के बाद लेना चाहती हूं तलाक

सुनवाई के दौरान महिला ने स्पष्ट किया कि वह गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती और अपने पति से तलाक लेना चाहती है। दूसरी ओर, पति ने अदालत को बताया कि बच्चे के जन्म के बाद वह उसकी जिम्मेदारी उठाने और अपने पास रखकर उसकी देखभाल करने के लिए तैयार है। उसने अदालत से महिला की गर्भपात संबंधी याचिका खारिज करने की अपील की। इस पर अदालत ने दोनों पक्षों के बीच विवाद की परिस्थितियों को समझने की कोशिश की।

पति द्वारा लगाए गए आरोप भी बने विवाद की वजह

मामले में सामने आया कि पति की ओर से महिला के चरित्र को लेकर आरोप लगाए गए थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने महिला को सुलह की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। पीठ ने उससे कहा कि वह अदालत में हलफनामा दाखिल कर अपने आरोप वापस लेने के विकल्प पर विचार करे, ताकि विवाद को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। हालांकि, महिला की गर्भपात की मांग और वैवाहिक विवाद को लेकर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।

बुधवार को फिर होगी सुनवाई, फैसले पर टिकी नजरें

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए निर्धारित की है। अब अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और मामले की परिस्थितियों पर आगे विचार करेगी। छह महीने से अधिक की गर्भावस्था में गर्भपात की अनुमति से जुड़ा यह मामला महिला की इच्छा, चिकित्सकीय परिस्थितियों, अजन्मे बच्चे के हित और वैवाहिक विवाद के बीच कानूनी सवाल खड़े करता है। बुधवार की सुनवाई में इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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