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श्रीनगर के बेमिना में भीषण अग्निकांड से मची तबाही, 80 झोपड़ियां जलकर राख; दो लोगों की दर्दनाक मौत

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के बेमिना इलाके में मंगलवार देर रात भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। आग ने देखते ही देखते अस्थायी झोपड़ियों के बड़े समूह को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक घटना में दो. . .

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के बेमिना इलाके में मंगलवार देर रात भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। आग ने देखते ही देखते अस्थायी झोपड़ियों के बड़े समूह को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक घटना में दो लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि करीब 80 अस्थायी ढांचे पूरी तरह जलकर राख हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देखते ही देखते कई झोपड़ियां आग की लपटों में घिर गईं और वहां रहने वाले लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। इस हादसे में जान गंवाने वाले दोनों व्यक्ति कबाड़ बीनने का काम करते थे और मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले बताए जा रहे हैं। घटना के बाद पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया।

आग की चपेट में आए झोपड़ियों के कई समूह

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार देर रात बेमिना के दुर्बल इलाके में अस्थायी झोपड़ियों के एक समूह में अचानक आग लग गई। शुरुआती दौर में आग सीमित क्षेत्र में दिखाई दी, लेकिन कुछ ही समय में इसकी लपटें आसपास बने अन्य अस्थायी ढांचों तक पहुंच गईं। इन झोपड़ियों में रहने वाले अधिकांश लोग कबाड़ इकट्ठा करने और उसका कारोबार करने से जुड़े थे। कई लोग इन अस्थायी ढांचों का इस्तेमाल रहने के साथ-साथ अपने कामकाज से संबंधित सामान रखने के लिए भी करते थे। झोपड़ियों में इस्तेमाल होने वाली अस्थायी निर्माण सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। इससे लोगों को अपना सामान बाहर निकालने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में काफी परेशानी हुई।

दो लोगों की जिंदा जलने से मौत, मृतकों की हुई पहचान

इस अग्निकांड में दो लोगों की जान चली गई। मृतकों की पहचान 27 वर्षीय मुहम्मद नूर आलम और 16 वर्षीय मुहम्मद अमीन रफी के रूप में हुई है। दोनों दिल्ली के रहने वाले थे और कबाड़ बीनने का काम करते थे। बताया जा रहा है कि आग इतनी तेजी से फैली कि दोनों को बाहर निकलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका। इस घटना ने इलाके में रहने वाले लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। दो लोगों की मौत के बाद प्रभावित परिवारों और परिचितों में शोक का माहौल है। एक ओर जहां लोगों ने आग में अपना आशियाना और सामान खो दिया, वहीं दूसरी ओर इस हादसे में दो जिंदगियां भी खत्म हो गईं।

दमकल की कई टीमों ने संभाला मोर्चा

आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। दमकल कर्मियों ने तत्काल आग बुझाने का अभियान शुरू किया। आग का दायरा बड़ा होने और एक के बाद एक झोपड़ियों तक लपटें पहुंचने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने भी दमकल कर्मियों के साथ मिलकर आग पर काबू पाने और प्रभावित लोगों की मदद करने का प्रयास किया। काफी प्रयासों के बाद आग को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। हालांकि, तब तक बड़ी संख्या में अस्थायी ढांचे पूरी तरह नष्ट हो चुके थे।

80 झोपड़ियां खाक, कई परिवारों के सामने रहने का संकट

इस भीषण अग्निकांड में कम से कम 80 अस्थायी ढांचे जलकर राख हो गए। आग की वजह से वहां रहने वाले लोगों का घरेलू सामान, जरूरी वस्तुएं और कबाड़ कारोबार से जुड़ी सामग्री भी नष्ट हो गई। घटना के बाद प्रभावित लोगों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवारों ने अपना रहने का स्थान खो दिया है, जबकि जिन लोगों की आजीविका कबाड़ के कारोबार पर निर्भर थी, उनके कामकाज पर भी इस हादसे का असर पड़ा है। अस्थायी ढांचों में रहने वाले इन लोगों के लिए अब दोबारा रहने की व्यवस्था करना और अपनी आजीविका शुरू करना बड़ी चुनौती होगी। आग से हुए वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन अभी किया जाना बाकी है।

आग लगने के कारणों का पता लगाने में जुटी पुलिस

फिलहाल आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। आग किन परिस्थितियों में लगी और इतनी तेजी से आसपास की झोपड़ियों तक कैसे फैल गई, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही, आग से हुए नुकसान और प्रभावित लोगों की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है। बेमिना में हुए इस अग्निकांड ने एक बार फिर अस्थायी बस्तियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीमित संसाधनों और असुरक्षित आवासीय परिस्थितियों में रहने वाले लोगों के लिए आग जैसी घटनाएं बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। फिलहाल पूरे इलाके में इस दर्दनाक हादसे को लेकर शोक और चिंता का माहौल है।

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