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पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर चलेगी कैंची! सालाना 14 दिन कम हो सकती हैं छुट्टियां, CM शुभेंदु अधिकारी ने वित्त सचिव को दिया निर्देश

पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों को लेकर बड़ा बदलाव होने के संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों की सालाना छुट्टियों की संख्या घटाकर 40 दिन करने की तैयारी शुरू कर दी है।. . .

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों को लेकर बड़ा बदलाव होने के संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों की सालाना छुट्टियों की संख्या घटाकर 40 दिन करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उन्होंने वित्त सचिव को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अगर सरकार का प्रस्ताव लागू होता है, तो कर्मचारियों की मौजूदा छुट्टियों में करीब 10 से 14 दिनों तक की कटौती हो सकती है। बुधवार रात नवान्न में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने खुद इस प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में काम लंबित है। प्रशासनिक व्यवस्था को तेज करने और सरकारी कार्यालयों में कामकाज की संस्कृति सुधारने के लिए छुट्टियों की संख्या कम करना जरूरी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन त्योहारों, धार्मिक आयोजनों या विशेष अवसरों पर मिलने वाली छुट्टियों को समाप्त किया जाएगा।

साल में करीब 50 दिन मिलती हैं छुट्टियां, अब 40 करने की तैयारी

पश्चिम बंगाल में फिलहाल सरकारी कर्मचारियों को सालभर में लगभग 50 दिनों की सार्वजनिक छुट्टियां मिलती हैं। सरकार अब इस संख्या को घटाकर 40 दिन तक सीमित करना चाहती है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि उन्होंने वित्त सचिव को छुट्टियों की संख्या कम करने के लिए कहा था। इसके बाद वित्त विभाग की ओर से 45 दिनों की छुट्टियों का एक प्रस्ताव तैयार किया गया। लेकिन मुख्यमंत्री इस प्रस्ताव से भी संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने वित्त सचिव को इसमें और कटौती करके कुल छुट्टियां 40 दिन करने का निर्देश दिया। इस तरह सरकार की योजना लागू होने पर कर्मचारियों की छुट्टियों में मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले लगभग 10 दिन की कमी आ सकती है। कुछ अतिरिक्त छुट्टियों को शामिल करने वाले मौजूदा कैलेंडर के आधार पर यह अंतर 14 दिन तक भी हो सकता है।

क्यों छुट्टियां कम करना चाहती है पश्चिम बंगाल सरकार?

मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य के सरकारी विभागों में कई महत्वपूर्ण काम लंबे समय से लंबित पड़े हैं। इन कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए सरकारी कार्यालयों में नियमित कामकाज और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है।बधवार रात करीब पौने दस बजे नवान्न में पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या सरकारी कर्मचारियों में कार्य संस्कृति सुधारने के लिए छुट्टियां घटाई जा रही हैं, तो मुख्यमंत्री ने इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन में काम करने की संस्कृति वापस लानी होगी। अगर सरकारी दफ्तरों में काम आगे नहीं बढ़ेगा, तो राज्य के विकास से जुड़े कई जरूरी कार्य अधूरे रह जाएंगे। सरकार का मानना है कि छुट्टियों की संख्या में कटौती से विभागों को अधिक कार्यदिवस मिलेंगे और लंबित फाइलों तथा योजनाओं के निपटारे में तेजी आ सकती है।

किन त्योहारों की छुट्टियां होंगी कम? अभी फैसला बाकी

पश्चिम बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों के अवसर पर सरकारी कर्मचारियों को कई छुट्टियां दी जाती हैं। इसके अलावा महापुरुषों की जयंती और विभिन्न सामाजिक अवसरों पर भी अवकाश घोषित किया जाता है। पिछली सरकार के कार्यकाल में छुट्टियों की सूची लगातार लंबी हुई थी। जमाई षष्ठी जैसे पारंपरिक अवसरों पर आधे दिन की छुट्टी के साथ कई अन्य आयोजनों को भी सरकारी अवकाश कैलेंडर में जगह मिली थी। अब नई सरकार इस व्यवस्था की समीक्षा कर रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अभी यह नहीं बताया है कि दुर्गा पूजा, काली पूजा, दिवाली, ईद या अन्य त्योहारों में से किन अवसरों की छुट्टियां कम की जाएंगी। वित्त विभाग की अंतिम सूची सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

राजस्व संग्रह को लेकर भी पूर्ववर्ती सरकार पर साधा निशाना

छुट्टियों में कटौती के प्रस्ताव के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के राजस्व संग्रह को लेकर भी पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि नई सरकार ने सत्ता संभालने के बाद शुरुआती छह महीनों में ही पिछली सरकार के पूरे वित्त वर्ष के राजस्व संग्रह से 4,000 करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह उपलब्धि आम लोगों पर कोई अतिरिक्त टैक्स लगाए बिना हासिल की गई है। उन्होंने इस आंकड़े के जरिए पिछली सरकार की वित्तीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पहले के शासनकाल में राजस्व का उचित इस्तेमाल नहीं हुआ। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस दौरान यह विस्तृत जानकारी नहीं दी कि अतिरिक्त राजस्व किन-किन क्षेत्रों से प्राप्त हुआ है और इसकी तुलना किस वित्तीय वर्ष के आंकड़ों से की गई है।

सरकारी कर्मचारियों पर क्या होगा इस फैसले का असर?

अगर छुट्टियों की संख्या 40 दिन करने का प्रस्ताव लागू होता है, तो पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के वार्षिक अवकाश कैलेंडर में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है। इसका सीधा असर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सरकारी कार्यालयों और प्रशासनिक संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा। संभावना है कि वित्त विभाग पहले मौजूदा छुट्टियों की सूची की समीक्षा करेगा और उसके बाद नई सूची जारी की जाएगी। फिलहाल कर्मचारियों को यह जानने के लिए अंतिम सरकारी अधिसूचना का इंतजार करना होगा कि कौन-कौन से अवकाश बरकरार रहेंगे और किनमें कटौती की जाएगी।

नई सरकार का फोकस: प्रशासनिक कामकाज में तेजी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस प्रस्ताव से स्पष्ट है कि नई सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव को प्राथमिकता देना चाहती है। छुट्टियों की संख्या कम करने के पीछे सरकार का मुख्य तर्क लंबित सरकारी कार्यों को पूरा करना और कार्यालयों में कामकाज की गति बढ़ाना है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वित्त विभाग की अंतिम सूची में किन छुट्टियों को जगह मिलेगी। साथ ही, क्या इस बदलाव से सरकारी विभागों की कार्यक्षमता वास्तव में बेहतर होगी? इन सवालों का जवाब नई अवकाश सूची और सरकार के अगले फैसलों के बाद ही सामने आएगा।

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