कोलकाता: बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। समुद्र में बना निम्न दबाव का क्षेत्र तेजी से मजबूत होकर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 2 नवंबर तक इसके गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। इसके बाद 3 नवंबर की सुबह दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर इसके दस्तक देने का अनुमान जताया गया है। इस तूफान का असर केवल आंध्र प्रदेश और आसपास के तटीय इलाकों तक सीमित नहीं रह सकता। इसके प्रभाव से पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भी बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका जताई है।
100-110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं
मौसम विभाग के अनुसार, समुद्र में विकसित हो रहा सिस्टम लगातार ताकतवर हो रहा है। अनुमान है कि चक्रवात के जमीन से टकराने के समय हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। कुछ इलाकों में हवा के झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक चलने की आशंका है। अलीपुर मौसम विभाग के अधिकारी हबीबुर रहमान विश्वास के मुताबिक, तूफान के नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना है। 2 नवंबर को तूफान की ताकत बढ़ने और अगले दिन इसके तट पर पहुंचने की आशंका को देखते हुए समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
पश्चिम बंगाल में कहां-कहां होगी बारिश?
चक्रवात के प्रभाव से पश्चिम बंगाल में भी मौसम अस्थिर रह सकता है। मौसम विभाग ने राज्य के दोनों हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने का अनुमान लगाया है।
उत्तर बंगाल के इन पांच जिलों में अलर्ट:
- दार्जिलिंग
- जलपाईगुड़ी
- कालिम्पोंग
- अलीपुरद्वार
- कूचबिहार
इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर बिजली चमकने और बारिश होने की भी संभावना है।
दक्षिण बंगाल के इन जिलों में बारिश की संभावना:
- पूर्व बर्धमान
- उत्तर 24 परगना
- दक्षिण 24 परगना
- कोलकाता
- बीरभूम
- मुर्शिदाबाद
- नदिया
इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। विशेष रूप से खुले स्थानों और बिजली के खंभों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
1 से 6 नवंबर तक कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, नवंबर के शुरुआती दिनों में बंगाल के मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।
| तारीख | मौसम का अनुमान |
|---|---|
| 1 नवंबर | दोनों बंगाल में कई जगह हल्की से मध्यम बारिश |
| 2 नवंबर | उत्तर और दक्षिण बंगाल में छिटपुट बारिश की संभावना |
| 3 नवंबर | उत्तर बंगाल के पांच जिलों में हल्की बारिश हो सकती है |
| 4 नवंबर | बारिश में कमी और मौसम में सुधार के संकेत |
| 5-6 नवंबर | दोनों बंगाल में मौसम शुष्क रहने की संभावना |
इस तरह 4 नवंबर से राज्य में मौसम के धीरे-धीरे सामान्य होने का अनुमान है। हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कुछ इलाकों में बदलाव संभव है।
मछुआरों के लिए चेतावनी, समुद्र में नहीं जाने की सलाह
चक्रवात का असर समुद्री गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका है। मौसम विभाग ने 2 नवंबर की शाम से उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति खराब होने का अनुमान लगाया है। दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों में भी तेज हवाएं चल सकती हैं। 3 नवंबर की सुबह समुद्र के आसपास हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान हवा के तेज झोंके 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकते हैं। मौसम में सुधार के संकेत 4 नवंबर की दोपहर के बाद मिलने की संभावना है। इसी वजह से मछुआरों को तब तक समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
कोलकाता में तापमान और उमस का क्या है हाल?
चक्रवात की आहट के बीच कोलकाता और आसपास के इलाकों में उमस का असर भी बना हुआ है। शनिवार को शहर का अधिकतम तापमान 31.03 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.04 डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 25.02 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.06 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया। हवा में नमी की मात्रा अधिकतम 95 प्रतिशत और न्यूनतम 69 प्रतिशत रही। अधिक नमी के कारण लोगों को गर्मी और चिपचिपाहट महसूस हो सकती है।
बंगाल के लोगों को अगले कुछ दिन सतर्क रहने की जरूरत
बंगाल की खाड़ी में बन रहा चक्रवाती सिस्टम आने वाले दिनों में आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के लिए चुनौती बन सकता है। वहीं पश्चिम बंगाल में इसका प्रभाव बारिश, बिजली चमकने और तेज हवाओं के रूप में दिखाई देने की संभावना है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों में जाने से बचना चाहिए और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए। मछुआरों को समुद्र में जाने से संबंधित जारी निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है