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भारतीय वायुसेना को आज मिलेगा नया प्रमुख, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित संभालेंगे कमान; 25 महीने बाद रिटायर होंगे एपी सिंह

भारतीय वायुसेना को 31 अक्टूबर को नया प्रमुख मिलने जा रहा है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित आज वायुसेना प्रमुख का पदभार संभालेंगे। वह मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे, जो करीब 25 महीने तक. . .

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना को 31 अक्टूबर को नया प्रमुख मिलने जा रहा है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित आज वायुसेना प्रमुख का पदभार संभालेंगे। वह मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे, जो करीब 25 महीने तक इस पद पर रहने के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। आशुतोष दीक्षित को स्वदेशी रक्षा तकनीक, लड़ाकू विमान परियोजनाओं और वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है, जब भारत अपनी वायुसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहा है। ऐसे में नए वायुसेना प्रमुख के सामने स्वदेशी लड़ाकू विमानों और आधुनिक सैन्य तकनीकों को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

एपी सिंह को दी जाएगी औपचारिक विदाई

वर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद पद छोड़ रहे हैं। उनके सम्मान में अब तक तीन आधिकारिक विदाई कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से आयोजित कार्यक्रम भी शामिल है। कार्यकाल के अंतिम दिन उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर देकर विदाई दी जाएगी। इसके बाद एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना की कमान संभालेंगे।

तेजस समेत स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाओं को बढ़ावा

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना में स्वदेशी विमान और रक्षा उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने हल्के लड़ाकू विमान LCA तेजस समेत कई स्वदेशी विमान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुभव को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को और गति मिलेगी। सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत देश में लड़ाकू विमानों, सैन्य उपकरणों और आधुनिक तकनीकों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

1986 में वायुसेना में हुए थे शामिल, 3,500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज से सैन्य प्रशिक्षण एवं शिक्षा हासिल की है। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर महत्वपूर्ण परिचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक कई भूमिकाएं निभाई हैं।

मिराज-2000 स्क्वाड्रन से लेकर फाइटर ट्रेनिंग बेस तक संभाली कमान

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, एयर मार्शल दीक्षित ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और स्टाफ पदों पर काम किया है। कमांडिंग ऑफिसर के रूप में उन्होंने नंबर 9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से लैस करने की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में एक अग्रिम लड़ाकू एयरबेस और दक्षिणी क्षेत्र में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली। उनका यह अनुभव वायुसेना के परिचालन प्रबंधन, लड़ाकू विमानों की क्षमता और पायलट प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है।

नए वायुसेना प्रमुख के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां

आशुतोष दीक्षित के सामने भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करने के साथ कई अहम चुनौतियां होंगी। इनमें आधुनिक लड़ाकू विमानों की उपलब्धता, पुराने विमानों को बदलना, स्वदेशी तेजस परियोजना को गति देना और अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों को शामिल करना प्रमुख हैं। इसके अलावा, बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा हालात के बीच वायुसेना की तैयारी और तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाए रखना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। उनकी नियुक्ति भारतीय वायुसेना के नेतृत्व में बदलाव के साथ देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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