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बंगाल के मुख्यमंत्री का ऐलान, दो साल तक नए निजी कॉलेज-विश्वविद्यालयों को NOC नहीं, सभी संस्थानों का होगा ऑडिट, कहा-शिक्षा को व्यापार नहीं बनने देंगे

कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने निजी उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि अगले दो वर्षों तक राज्य में किसी भी नए निजी विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य उच्च शिक्षा संस्थान. . .

कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने निजी उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि अगले दो वर्षों तक राज्य में किसी भी नए निजी विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य उच्च शिक्षा संस्थान को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही, पहले से संचालित सभी निजी संस्थानों की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे और नियमों के पालन की व्यापक समीक्षा कराई जाएगी।

विकास भवन में हुई उच्चस्तरीय शिक्षा समीक्षा बैठक

नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री ने पहली बार विकास भवन में शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन, शिक्षा सचिव सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, शिक्षक नियुक्ति, केंद्रीय योजनाओं की प्रगति और निजी शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।

दो साल तक नए निजी संस्थानों को नहीं मिलेगा NOC

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य में किसी भी नए निजी विश्वविद्यालय, कॉलेज, बीएड, डीएलएड, लॉ, फार्मेसी, पॉलिटेक्निक और आईटीआई संस्थान को अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार पहले से चल रहे सभी निजी शिक्षा संस्थानों का निरीक्षण कर उनकी कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करेगी।

सभी निजी संस्थानों का होगा विशेष ऑडिट

सरकार ने निजी शिक्षा संस्थानों की व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया है। इस दौरान निम्न बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी—

  • संस्थानों का बुनियादी ढांचा
  • शिक्षकों और कर्मचारियों की संख्या
  • शिक्षा की गुणवत्ता
  • फीस संरचना
  • अनुमति के समय तय शर्तों का पालन

जो संस्थान निर्धारित मानकों पर खरे उतरेंगे, उन्हें ही भविष्य में अनुमति का नवीनीकरण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री बोले- शिक्षा को उत्पाद नहीं बनने देंगे

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार गुणवत्तापूर्ण निजी शिक्षा के खिलाफ नहीं है, लेकिन केवल डिग्री बेचने के उद्देश्य से संस्थान खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा,“अच्छे निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से सरकार को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन शिक्षा को किसी भी कीमत पर व्यापार या उत्पाद नहीं बनने दिया जाएगा।”

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर भी हुई चर्चा

बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और पीएम-श्री योजना के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार आवश्यक कानूनी संशोधनों की तैयारी कर रही है और आगामी विधानसभा सत्र में संबंधित विधेयक पेश किया जा सकता है।

सरकारी स्कूलों के लिए कई नई योजनाएं

सरकार ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की है।

इनमें शामिल हैं—

  • लगभग 81 हजार स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट योजना दोबारा शुरू करना।
  • सभी सरकारी स्कूलों में गैस पर मिड-डे मील तैयार करने की व्यवस्था।
  • स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय और सौर ऊर्जा सुविधाओं का विस्तार।
  • बालिका और सह-शिक्षा विद्यालयों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाने की योजना।

मिड-डे मील के बजट में बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 अगस्त से मिड-डे मील पर प्रति छात्र खर्च 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये किया जाएगा। इसके अलावा राज्य के कई जिलों में इस्कॉन के सहयोग से मिड-डे मील वितरण की भी योजना बनाई गई है।

पारदर्शी और मेरिट आधारित शिक्षक भर्ती पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, योग्यता आधारित और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त बनाना चाहती है। साथ ही सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता इतनी बेहतर करने का लक्ष्य है कि छात्रों को निजी शिक्षा संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।

केंद्रीय मंत्री ने फैसले का किया समर्थन

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने राज्य सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि अगले दो वर्षों में नए निजी संस्थानों को अनुमति देने के बजाय पहले से संचालित विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, बीएड, डीएलएड, लॉ, फार्मेसी, पॉलिटेक्निक और आईटीआई संस्थानों की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य निजी शिक्षा का विरोध करना नहीं, बल्कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

PM-उषा और अन्य केंद्रीय योजनाओं पर भी चर्चा

सुकांत मजूमदार ने बताया कि पहले लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilization Certificate) के कारण पीएम-उषा योजना के तहत केंद्रीय सहायता रुकी हुई थी। अब कोलकाता विश्वविद्यालय, जादवपुर विश्वविद्यालय, कल्याणी विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे केंद्रीय फंड जारी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पीएम पोषण सहित अन्य केंद्रीय योजनाओं का लाभ भी नियमित रूप से मिलने की संभावना जताई गई है।

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