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खरगे के घर विपक्षी दलों की बैठक, 1 नवंबर की रैली को लेकर INDIA गठबंधन ने बनाई रणनीति

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर INDIA गठबंधन के. . .

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर INDIA गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। इसमें कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। बैठक में आगामी विरोध कार्यक्रमों और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तैयारियों पर चर्चा हुई। विपक्षी दल मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का विरोध, भाजपा पर लगाए आरोप

बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता के सामने यह मुद्दा उठाना चाहता है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां कैसे हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान नाम हटाए जाने की आशंकाओं और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। हालांकि, ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं।

30 अक्टूबर को खरगे के आवास पर होगा ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम

कांग्रेस नेता जयराम रमेश के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे नई दिल्ली स्थित खरगे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित करेगा। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर संविधान की भावना के विपरीत काम करने और चुनावी लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगाए हैं। गठबंधन के नेता चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। इस प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है।

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रामलीला मैदान में 1 नवंबर को जुटेंगे विपक्षी दल

विपक्षी गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी की है। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को जनता के सामने उठाना है। माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि आने वाले दिनों में विपक्ष का आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि 1 नवंबर की रैली के बाद भी विरोध प्रदर्शन जारी रह सकते हैं। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भी लोकतंत्र में प्रतीकात्मक विरोध के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष को संसद में अपने मुद्दे उठाने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते, तो जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए दूसरे माध्यमों का इस्तेमाल करना पड़ता है।

दिल्ली पुलिस ने रैली के लिए दी एनओसी, रखीं शर्तें

दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस रैली के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) दिया है। हालांकि, आयोजन के लिए संबंधित भूमि स्वामित्व वाली एजेंसी की अनुमति लेना और पुलिस की निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी होगा। रैली सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक प्रस्तावित है। पुलिस ने रात में कार्यक्रम स्थल पर रुकने पर रोक सहित कई शर्तें लगाई हैं। इससे पहले विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के दौरान मध्य दिल्ली में 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। विपक्षी नेताओं ने कहा है कि जब तक चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा बना विपक्ष की रणनीति का केंद्र

INDIA गठबंधन के लिए चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की जवाबदेही प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बन गए हैं। खरगे के आवास पर हुई बैठक और रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को इसी रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें 30 अक्टूबर के विरोध कार्यक्रम और 1 नवंबर की रैली पर टिकी हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को व्यापक स्तर पर उठाने और सरकार तथा चुनाव आयोग पर जवाब देने का दबाव बनाने की कोशिश करेगा।

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