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राम मंदिर दान चोरी का खुलासा कैसे हुआ? 73 हजार पन्नों की चार्जशीट में चंपत राय का भी जिक्र, पढ़ें पूरा मामला

राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी किए जाने के मामले में पुलिस ने कोर्ट में करीब 73 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में पुलिस ने कथित चोरी की पूरी प्रक्रिया, आरोपियों की भूमिका, बरामद रकम और. . .

अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी किए जाने के मामले में पुलिस ने कोर्ट में करीब 73 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में पुलिस ने कथित चोरी की पूरी प्रक्रिया, आरोपियों की भूमिका, बरामद रकम और मामले का खुलासा होने की कहानी का विस्तृत ब्योरा दिया है। चार्जशीट में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का भी जिक्र है। पुलिस के मुताबिक, मामले में चोरी का पहला महत्वपूर्ण सुराग मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने वाले कर्मचारियों से मिला था। इन्हीं कर्मचारियों ने कथित तौर पर चोरी से जुड़े वीडियो चंपत राय तक पहुंचाए थे।

चढ़ावे की रकम गिनने वाले कर्मचारियों को हुआ शक

चार्जशीट के मुताबिक, राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों को पैसों की हेराफेरी का शक हुआ। जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, काउंटिंग रूम में रकम गिनते समय कुछ युवक कथित तौर पर नोट निकालकर अलग कर लेते थे। बाद में इन्हें अलग-अलग जगहों पर छिपाने का आरोप है। कर्मचारियों के पास कथित चोरी से संबंधित कुछ वीडियो भी पहुंचे। इन्हीं वीडियो को मामले की जांच में महत्वपूर्ण सबूत माना गया है।

चंपत राय को कब मिली चोरी की जानकारी?

चार्जशीट के मुताबिक, 4 जून 2026 को चंपत राय दिल्ली से अयोध्या आ रहे थे। इसी दौरान उन्हें दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वीडियो और मैसेज मिले। पुलिस के अनुसार, वीडियो में बाथरूम के अंदर नोटों की गड्डियां छिपाकर रखी हुई दिखाई दे रही थीं। मैसेज में कथित तौर पर यह जानकारी दी गई थी कि मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी करने में 65 से अधिक युवक शामिल हैं और चोरी की गई रकम को उन्होंने अलग-अलग जगहों पर छिपाया है। यही जानकारी मामले की जांच में शुरुआती अहम सुरागों में से एक बनी।

चंपत राय ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों को दी जानकारी

चार्जशीट के अनुसार, वीडियो और मैसेज मिलने के बाद चंपत राय ने इसकी जानकारी आनंद कुमार चौधरी को दी। इसके बाद कारसेवकपुरम स्थित उनके आवास पर ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र, गोपाल राव और नरेंद्र भी पहुंचे।\ चार्जशीट में दावा किया गया है कि इस दौरान उन्हें लैपटॉप में सुरक्षित कुछ अन्य वीडियो दिखाए गए।

वीडियो में कथित तौर पर चोरी करते दिखे युवक

जांच एजेंसी के मुताबिक, इन वीडियो में काउंटिंग रूम में चढ़ावे की रकम गिनने के दौरान कुछ युवकों को कथित तौर पर नोट निकालते हुए देखा गया। पुलिस ने इन वीडियो को जब्त कर लिया और उन्हें केस में सबूत के तौर पर शामिल किया। जांच के दौरान वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की पहचान करने का भी दावा किया गया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान, उनकी भूमिका और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का विवरण चार्जशीट में दर्ज किया है।

करीब सवा दो लाख रुपये की रकम बरामद

चार्जशीट के मुताबिक, चोरी के आरोप में शामिल बताए गए 65 से अधिक युवकों से जुड़ी कार्रवाई के दौरान करीब सवा दो लाख रुपये की रकम बरामद की गई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर चोरी की गई कुल रकम कितनी थी और कितने समय से यह सिलसिला चल रहा था। बरामद रकम के अलावा जांच में सामने आए वीडियो, मोबाइल फोन, मैसेज और अन्य दस्तावेजों को भी साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है।

73 हजार पन्नों की चार्जशीट में क्या-क्या?

इतनी बड़ी चार्जशीट में पुलिस ने मामले से जुड़े कई पहलुओं का विवरण दिया है। इसमें कथित तौर पर शामिल हैं:

  • आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका।
  • चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान हुई कथित चोरी का विवरण।
  • चोरी की रकम छिपाने से जुड़े आरोप।
  • बाथरूम में रखी नोटों की गड्डियों से संबंधित वीडियो।
  • काउंटिंग रूम के वीडियो फुटेज।
  • आरोपियों से जुड़े बयान और जांच के दौरान सामने आई जानकारी।
  • बरामद करीब सवा दो लाख रुपये का विवरण।
  • जब्त किए गए वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्य।
  • आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप और उपलब्ध सबूत।

वीडियो बना जांच का अहम आधार

इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, काउंटिंग रूम में हुई कथित गतिविधियों के वीडियो ने जांच को आगे बढ़ाने में मदद की। इन वीडियो को जब्त करने के बाद पुलिस ने उनमें दिखाई देने वाले लोगों की पहचान करने की कोशिश की। चार्जशीट में इन लोगों की भूमिका और उनके खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है।

अब कोर्ट में तय होगी आरोपों की दिशा

पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है। अब मामले में अदालत के सामने अभियोजन पक्ष को अपने साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित करने होंगे। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि चार्जशीट में दर्ज आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का अंतिम प्रमाण नहीं होते। आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है और अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा. फिलहाल 73 हजार पन्नों की इस चार्जशीट ने राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ी कथित चोरी के मामले की जांच और उसमें सामने आए डिजिटल सबूतों को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने रखी हैं। खास तौर पर यह जानकारी कि मंदिर में रकम गिनने वाले कर्मचारियों से मिले वीडियो के जरिए मामले का शुरुआती खुलासा हुआ, जांच की सबसे अहम कड़ियों में से एक मानी जा रही है।

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