पुरशुड़ा/हुगली: पश्चिम बंगाल में आलू की कीमतों में गिरावट और भंडारण की समस्या से परेशान किसानों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। गुरुवार को हुगली जिले के पुरशुड़ा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आलू किसानों के हित में विशेष सहायता पैकेज का ऐलान किया। सरकार अब आलू की ढुलाई से लेकर भंडारण, बीमा और उचित कीमत दिलाने तक के लिए कई कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब राज्य से दूसरे राज्यों में आलू भेजने वाले किसानों और कारोबारियों को परिवहन पर प्रति क्विंटल 50 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। यह सुविधा सड़क और रेल, दोनों माध्यमों से आलू भेजने पर लागू होगी। इसके अलावा सरकार ने साफ किया है कि आलू से लदे वाहनों को दूसरे राज्यों की सीमा पर बेवजह नहीं रोका जाना चाहिए। राज्य में कोल्ड स्टोरेज में रखे लाखों क्विंटल आलू के निपटारे के लिए भी समयसीमा तय की गई है। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से किसानों को बाजार तक पहुंच बनाने और कीमतों में गिरावट से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
आलू किसानों की परेशानी दूर करने के लिए सरकार का विशेष पैकेज
पश्चिम बंगाल में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है। खासकर हुगली, पूर्व बर्दवान और आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में किसान आलू उत्पादन पर निर्भर हैं। हालांकि, किसानों की शिकायत रही है कि बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और कोल्ड स्टोरेज का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद बाजार में कई बार आलू की कीमत इतनी कम हो जाती है कि किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुरशुड़ा की सभा से किसानों के लिए कई योजनाओं की जानकारी दी। उनका कहना है कि राज्य से बाहर आलू भेजने में अब किसी तरह की अनावश्यक बाधा नहीं होनी चाहिए।
आलू की ढुलाई पर प्रति क्विंटल 50 रुपये की सब्सिडी
मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाओं में सबसे अहम आलू परिवहन पर मिलने वाली आर्थिक सहायता है। सरकार सड़क मार्ग से ट्रकों और अन्य वाहनों के जरिए आलू भेजने के साथ-साथ रेल परिवहन पर भी प्रति क्विंटल 50 रुपये की सब्सिडी देगी। इसका उद्देश्य किसानों और व्यापारियों के परिवहन खर्च को कम करना है। खासकर उन किसानों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें दूसरे राज्यों के बाजारों तक अपनी उपज पहुंचाने के लिए अधिक किराया देना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य की सीमाओं पर आलू से लदे वाहनों को अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाएगा और अंतरराज्यीय कारोबार को सुचारु बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
कोल्ड स्टोरेज में रखे 27 लाख क्विंटल आलू का होगा निपटारा
पश्चिम बंगाल में इस समय कोल्ड स्टोरेज में बड़ी मात्रा में आलू जमा है। किसानों और कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन स्टॉक को उचित कीमत पर बेचने की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज में रखे लगभग 27 लाख क्विंटल आलू का 30 नवंबर तक निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है। जरूरत पड़ने पर इस समयसीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबर तक किया जा सकता है। इस फैसले से उन किसानों और व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका आलू लंबे समय से कोल्ड स्टोरेज में रखा हुआ है और बाजार में बेहतर कीमत मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
सभी कोल्ड स्टोरेज को मार्केटियर बनाने की योजना
सरकार ने आलू के कारोबार और भंडारण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने की घोषणा की है। कृषि उत्पाद विपणन विनियमन कानून के तहत प्रत्येक कोल्ड स्टोरेज को मार्केटियर के रूप में घोषित करने की योजना है। इस व्यवस्था से कोल्ड स्टोरेज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी। साथ ही उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त करने और अपने भंडारित आलू की बिक्री से जुड़े फैसले लेने में अधिक स्वतंत्रता मिल सकेगी। सरकार का उद्देश्य भंडारण और बिक्री की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर विकल्प मिल सकें।
200 मार्केटियर में बनेंगे सोलर मिनी कोल्ड रूम
आलू और अन्य कृषि उत्पादों के भंडारण को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने सौर ऊर्जा आधारित मिनी कोल्ड रूम स्थापित करने की योजना भी पेश की है। इसके तहत राज्य के 200 मार्केटियर में 5 और 10 मीट्रिक टन क्षमता वाले सोलर मिनी कोल्ड रूम बनाए जाएंगे। इनकी मदद से छोटे किसानों और स्थानीय कारोबारियों को कम मात्रा में कृषि उत्पाद सुरक्षित रखने की सुविधा मिल सकेगी। सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण इन इकाइयों को बिजली पर निर्भरता कम करने के लिहाज से भी उपयोगी माना जा रहा है।
50 स्मार्ट मंडियों के विकास पर खर्च होंगे 150 करोड़ रुपये
कृषि बाजारों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए सरकार 50 मॉडल मंडियों का विकास करेगी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, प्रत्येक मंडी के विकास के लिए 3 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। इस हिसाब से कुल प्रस्तावित निवेश 150 करोड़ रुपये होगा। इन स्मार्ट मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री, भंडारण और बाजार प्रबंधन से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
‘सुफल बांग्ला’ के तहत खुलेंगे 550 नए आउटलेट
किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और उपभोक्ताओं तक कृषि उत्पाद पहुंचाने के लिए सरकार ‘सुफल बांग्ला’ योजना का विस्तार करेगी। इसके तहत 550 नए पोर्टेबल स्टैटिक आउटलेट जोड़े जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से आलू की खरीद और बिक्री की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। सरकार का उद्देश्य किसानों को बाजार में बेहतर विकल्प देना और उचित कीमत पर कृषि उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इससे उत्पादक और उपभोक्ता के बीच बाजार व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
आलू की खेती भी फसल बीमा योजना के दायरे में आएगी
आलू किसानों के लिए एक और महत्वपूर्ण घोषणा फसल बीमा को लेकर की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आलू की खेती को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में लाया जाएगा। इसके तहत किसानों को अपनी ओर से बीमा प्रीमियम का भुगतान नहीं करना होगा। इस राशि का भुगतान राज्य सरकार करेगी। इससे प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि, योजना की पात्रता, बीमा कवरेज और भुगतान की विस्तृत शर्तों की जानकारी आधिकारिक दिशानिर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
950 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया 4.75 लाख क्विंटल आलू
मुख्यमंत्री ने आलू की खरीद से संबंधित आंकड़े भी साझा किए। उनके मुताबिक, सरकार ने 49 कोल्ड स्टोरेज से कुल 4.75 लाख क्विंटल आलू की खरीद की है। इसके लिए किसानों को 950 रुपये प्रति क्विंटल की दर दी गई। सरकार के अनुसार, इस खरीद व्यवस्था से जुड़े आलू का भंडारण 567 कोल्ड स्टोरेज में किया गया है। इसका उद्देश्य बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति के दबाव को कम करना और किसानों को अपनी उपज बेचने का विकल्प उपलब्ध कराना है।
बाजार भाव 1,120 रुपये से नीचे गया तो सरकार देगी अंतर की भरपाई
आलू किसानों के लिए सबसे अहम घोषणा कीमतों में गिरावट से सुरक्षा को लेकर की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आलू का फ्री ऑन बोर्ड (FOB) मूल्य 1,120 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। यदि बाजार में कीमत इस स्तर से नीचे चली जाती है, तो सरकार अंतर की भरपाई के लिए सब्सिडी देगी। उदाहरण के तौर पर, यदि निर्धारित शर्तों के तहत बाजार भाव 1,000 रुपये प्रति क्विंटल रहता है, तो 120 रुपये के अंतर की भरपाई सरकार की ओर से की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में होने वाले नुकसान से बचाना है। हालांकि, इसके लिए पात्रता, खरीद व्यवस्था और भुगतान की शर्तों का आधिकारिक विवरण सामने आना जरूरी होगा।
आलू की गाड़ियों को दूसरे राज्यों की सीमा पर नहीं रोका जाएगा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकार की आलू निर्यात नीति की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में दूसरे राज्यों में आलू भेजने वाले वाहनों को सीमाओं पर रोका जाता था, जिससे किसानों और कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ता था। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अब आलू की आवाजाही में अनावश्यक रुकावट नहीं आने दी जाएगी। उनके मुताबिक, किसानों को अपनी उपज दूसरे राज्यों के बाजारों में बेचने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि स्थानीय बाजार में अतिरिक्त स्टॉक का दबाव कम हो और उन्हें बेहतर कीमत मिल सके।
आलू किसानों के लिए क्या बदल सकता है नया फैसला?
सरकार की घोषणाओं को देखें तो राहत का पूरा पैकेज खेती से लेकर बाजार तक की समस्याओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
- परिवहन: सड़क और रेल से आलू भेजने पर 50 रुपये प्रति क्विंटल सहायता।
- भंडारण: 27 लाख क्विंटल आलू के निपटारे का लक्ष्य।
- बाजार व्यवस्था: 200 स्थानों पर सोलर मिनी कोल्ड रूम।
- मंडी विकास: 50 स्मार्ट मंडियों के लिए कुल 150 करोड़ रुपये।
- बिक्री: सुफल बांग्ला के 550 नए आउटलेट।
- बीमा: आलू की खेती को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में लाने की योजना।
- मूल्य सुरक्षा: निर्धारित 1,120 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर से नीचे बाजार भाव जाने पर शर्तों के अनुसार सरकारी सहायता।
अब किसानों की नजर सरकारी आदेश और योजनाओं के क्रियान्वयन पर
हुगली के पुरशुड़ा में मुख्यमंत्री की घोषणाओं के बाद अब आलू किसानों की नजर इनके वास्तविक क्रियान्वयन पर रहेगी। खासकर परिवहन सब्सिडी कब से मिलेगी, किन किसानों को इसका लाभ मिलेगा और कीमतों में गिरावट की भरपाई किस प्रक्रिया से होगी, इन सवालों का जवाब सरकारी दिशा-निर्देशों से मिलेगा। फिलहाल सरकार ने भंडारण, परिवहन, बीमा और बाजार व्यवस्था से जुड़े कई प्रस्ताव सामने रखे हैं। यदि इन योजनाओं को तय समयसीमा में लागू किया जाता है, तो राज्य के आलू कारोबार और किसानों की बाजार तक पहुंच पर इसका असर देखने को मिल सकता है।