श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की सत्ता संभाल रही नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अंदरूनी असंतोष सामने आने लगा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के हालिया कैबिनेट फेरबदल से नाराज पार्टी के करीब 24 विधायकों के एकजुट होने की खबर है। इन विधायकों ने सरकार और पार्टी के कामकाज में बदलाव की मांग उठाई है। उनकी प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाना और मंत्रिमंडल का पुनर्गठन करना शामिल है। शुक्रवार को श्रीनगर में पार्टी विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर इस मुद्दे को लेकर बैठक हुई। इसमें 18 विधायक व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि छह अन्य ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी भागीदारी दर्ज कराई। हालांकि, बैठक में शामिल कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक बैठक के बजाय सामान्य मुलाकात बताया है।
चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नेतृत्व के सामने रखेगा विधायकों की मांग
बैठक में शामिल विधायकों ने अपनी शिकायतों और सुझावों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने के लिए प्रतिनिधिमंडल बनाने पर चर्चा की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ नेता और गुरेज विधायक नजीर अहमद गुरेजी तथा थानामंडी के विधायक मुजफ्फर इकबाल खान प्रमुख भूमिका निभाएंगे। प्रतिनिधिमंडल नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत कराएगा। विधायकों की योजना है कि पहले पार्टी नेतृत्व का रुख जाना जाए और उसके बाद भविष्य की रणनीति तय की जाए। बैठक में शामिल नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी पार्टी से नहीं, बल्कि सरकार और संगठन के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़ी है। उनका कहना है कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र, विधायकों की भागीदारी और जवाबदेही को मजबूत किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के सलाहकार और कुछ मंत्रियों को हटाने की मांग
विधायकों की नाराजगी का एक बड़ा कारण मुख्यमंत्री के आसपास के लोगों की भूमिका बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, असंतुष्ट विधायक मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी सहित कुछ मंत्रियों को बदलने और मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल करने की मांग भी सामने आई है। विधायकों का कहना है कि मंत्रियों के चयन और सरकारी फैसलों में वरिष्ठता, योग्यता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए। कुछ विधायकों ने पार्टी के 2024 के चुनावी घोषणापत्र को तय समयसीमा में लागू करने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की मांग भी रखी है।
27 अक्टूबर को हुआ था मंत्रिमंडल का विस्तार
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष की यह स्थिति 27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार के कुछ दिनों बाद सामने आई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस विस्तार में चार नए नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया था।
नए मंत्रियों में शामिल हैं:
- अली मोहम्मद सागर
- मीर सैफुल्लाह
- शमीमा फिरदौस
- अल्ताफ अहमद कल्लू
इन चारों को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में आयोजित समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। इसी फेरबदल के दौरान निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया था।
कई वरिष्ठ विधायक मंत्री नहीं बनने से नाराज
कैबिनेट विस्तार में कुछ ऐसे वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिल पाई, जिनके मंत्री बनने की चर्चा चल रही थी। इनमें गुरेज के विधायक नजीर अहमद गुरेजी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल के नाम प्रमुख हैं। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ वरिष्ठ विधायकों में असंतोष पैदा हुआ है। विधायकों के एक वर्ग का मानना है कि सरकार में जिम्मेदारियों का बंटवारा करते समय पार्टी के पुराने नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। मुबारक गुल को बाद में पार्टी महासचिव के पद से हटाए जाने और अली मोहम्मद सागर को यह जिम्मेदारी दिए जाने की खबरों ने भी संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं को बढ़ाया है।
नजीर अहमद गुरेजी ने बैठक को बताया सामान्य मुलाकात
बैठक को लेकर राजनीतिक चर्चाओं के बीच नजीर अहमद गुरेजी ने इसकी अहमियत को कम करके बताया। उनका कहना था कि विधायक कैसर जमशेद लोन ने दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया था और इसे किसी औपचारिक राजनीतिक बैठक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, अन्य मीडिया रिपोर्टों में बैठक के दौरान विधायकों की नाराजगी, मंत्रिमंडल में बदलाव और पार्टी के भीतर जवाबदेही बढ़ाने से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा किए जाने की बात कही गई है। इस तरह बैठक के उद्देश्य को लेकर नेताओं के बयानों और सूत्रों से मिली जानकारी में अंतर दिखाई देता है।
अब फारूक और उमर अब्दुल्ला के जवाब पर टिकी नजरें
विधायकों के इस समूह ने फिलहाल पार्टी छोड़ने के बजाय संगठन के भीतर रहकर अपनी मांगें उठाने का फैसला किया है। उनका अगला कदम पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ होने वाली मुलाकात पर निर्भर करेगा। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और क्या मंत्रिमंडल में दोबारा बदलाव की संभावना बनती है। फिलहाल नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने सरकार चलाने के साथ-साथ पार्टी के भीतर उठ रही नाराजगी को दूर करने की चुनौती भी है।