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‘उपदेश नहीं, सेवा ही संदेश’, पीएम मोदी ने ‘सेवा यात्रियों’ से की बातचीत; काशी जाने वालों को दिया खास संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सेवा संकल्प यात्रा’ से जुड़े प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान सेवा, जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेवा के बारे में केवल बोलने के बजाय उसे अपने आचरण और काम के जरिए. . .

नई दिल्लीः  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सेवा संकल्प यात्रा’ से जुड़े प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान सेवा, जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेवा के बारे में केवल बोलने के बजाय उसे अपने आचरण और काम के जरिए दिखाना चाहिए। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के जन्मदिन के आसपास देशभर में चलाए जा रहे सेवा-केंद्रित अभियानों की कड़ी में हुआ।

‘सेवा परमो धर्म’ को बनाया जाए जीवन का रास्ता

प्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों से कहा कि लोगों को सेवा का उपदेश देने के बजाय अपने काम से उसका संदेश देना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के पास चाहे कितनी भी शक्ति या अधिकार क्यों न हों, उसका रास्ता सेवा का ही होना चाहिए। मोदी ने सेवा को व्यवहार में उतारने पर जोर देते हुए कहा कि लोगों के बीच काम करते समय यह दिखाई देना चाहिए कि जनसेवा केवल भाषण का विषय नहीं, बल्कि आचरण का हिस्सा है।

वडनगर से काशी तक ‘सेवा संकल्प यात्रा’

‘सेवा संकल्प यात्रा’ के तहत वडनगर से वाराणसी तक मोटरसाइकिल रैली निकाली जा रही है। प्रतिभागी रास्ते में अलग-अलग कस्बों और गांवों में रुककर स्थानीय लोगों से संवाद कर रहे हैं और सेवा गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। इन गतिविधियों में सार्वजनिक स्थानों की सफाई, तालाबों और स्कूलों की सफाई, अस्पतालों एवं मंदिर परिसरों में सेवा, ग्राम सभा से संवाद, युवाओं से बातचीत और पौधारोपण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर ऐसी मोटरसाइकिल यात्राओं को रवाना किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

एक प्रतिभागी ने बताया- झाबुआ में रखा गया ‘मोदी फलिया’ नाम

प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान एक प्रतिभागी ने दावा किया कि मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में प्रधानमंत्री से प्रभावित होकर एक गांव का नाम ‘मोदी फलिया’ रखा गया है। प्रतिभागी ने यह भी कहा कि युवाओं में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर समर्थन है। हालांकि, ‘मोदी फलिया’ नाम से जुड़े इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों से नहीं हो सकी है।

पीएम बोले- वडनगर मेरी जन्मभूमि, काशी कर्मभूमि

प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने वडनगर और वाराणसी के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों शहर हजारों वर्षों से जीवंत रहे हैं और उनके लिए वडनगर जन्मभूमि तथा वाराणसी कर्मभूमि है। उन्होंने काशी के बाबा विश्वनाथ और वडनगर के हाटकेश्वर महादेव का भी उल्लेख किया। मोदी ने यात्रा कर रहे युवाओं के अनुभव सुनते हुए कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वह भी उनके साथ यात्रा कर रहे हों।

‘यात्रियों को प्रणाम करने से आधा पुण्य मिलता है…’

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए एक हल्का-फुल्का प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने कहा कि मान्यता है कि यात्रा से लौटे व्यक्ति को प्रणाम करने वाले को भी यात्रा के पुण्य का आधा हिस्सा मिलता है। मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह भी सभी ‘सेवा यात्रियों’ को प्रणाम करके उनका आधा पुण्य ले रहे हैं।

पेड़ लगाने का देसी तरीका भी बताया

बातचीत में पर्यावरण और पौधारोपण का मुद्दा भी आया। प्रधानमंत्री ने खास तौर पर कम पानी वाले इलाकों में पौधों की सिंचाई के लिए मिट्टी के छिद्रयुक्त घड़े के इस्तेमाल का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि पौधे के पास मिट्टी का घड़ा जमीन में रखा जा सकता है और उसमें पानी भरने से पानी धीरे-धीरे मिट्टी में रिसकर पौधे की जड़ों तक पहुंच सकता है। पीएम ने पुराने मिट्टी के घड़े इस्तेमाल करने का सुझाव देते हुए कहा कि प्राकृतिक रिसाव के लिए घड़े में अलग से छेद करने की जरूरत नहीं है।

राजस्थान जैसे सूखे इलाकों के लिए क्यों बताया उपयोगी?

प्रधानमंत्री ने इस पारंपरिक तरीके को खास तौर पर राजस्थान जैसे अपेक्षाकृत शुष्क क्षेत्रों में पानी बचाने के संदर्भ में बताया। उनका सुझाव था कि महीने में एक बार घड़े में पानी भरने से पौधे को धीरे-धीरे नमी मिलती रह सकती है। हालांकि, किसी इलाके में यह तरीका कितना प्रभावी होगा, यह मिट्टी, पौधे की प्रजाति, तापमान और पानी की उपलब्धता जैसी स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

काशी पहुंचने वालों को पीएम की हल्की-फुल्की सलाह

प्रधानमंत्री ने यात्रा में शामिल लोगों को वाराणसी पहुंचने के बाद शहर को देखने और उसकी स्थानीय संस्कृति का अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि काशी में देखने के लिए बहुत कुछ है। साथ ही, वहां के खान-पान का आनंद लेने की बात कहते हुए उन्होंने यात्रियों को लंबी यात्रा को ध्यान में रखते हुए बहुत ज्यादा खाना खाने से बचने की सलाह भी दी।

सेवा यात्रियों की गतिविधियां सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं

इस अभियान की खास बात यह है कि प्रतिभागी केवल एक शहर से दूसरे शहर तक यात्रा नहीं कर रहे हैं। रास्ते में वे स्थानीय समुदायों के साथ जुड़कर सेवा गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। इनमें सार्वजनिक स्थलों की सफाई, तालाबों और स्कूलों की सफाई, अस्पतालों में सेवा, ग्राम सभा में संवाद, युवाओं के साथ चर्चा, गौ सेवा और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल के तहत पौधारोपण शामिल हैं।

संदेश क्या है?

प्रधानमंत्री की बातचीत में तीन प्रमुख विषय उभरकर सामने आए—सेवा, जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण। उन्होंने सेवा को भाषण के बजाय व्यवहार में उतारने पर जोर दिया और युवाओं से स्थानीय स्तर पर लोगों के साथ जुड़कर काम करने की बात कही। इस बीच, सरकारी स्तर पर भी प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सेवा गतिविधियों से जुड़े कई अभियान आयोजित किए गए। PIB के अनुसार, 17 सितंबर को देशभर में सेवा-केंद्रित कार्यक्रम हुए और विभिन्न मंत्रालयों ने भी इस दौरान अलग-अलग गतिविधियां आयोजित कीं।

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