नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने रविवार, 8 नवंबर को अपना 99वां जन्मदिन मनाया। इस खास अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके लंबे राजनीतिक जीवन और राष्ट्र के प्रति योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने एक विशेष लेख के जरिए आडवाणी के व्यक्तित्व, संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक सफर के कई अनछुए पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने आडवाणी को भाजपा के निर्माण और विस्तार में अहम भूमिका निभाने वाला नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी को ‘नेशन फर्स्ट’ यानी राष्ट्र सर्वोपरि की सोच दी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपना लेख साझा किया। इसमें उन्होंने बताया कि किस तरह आडवाणी ने भाजपा को एक मजबूत राजनीतिक संगठन बनाने के साथ कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया। प्रधानमंत्री ने विभाजन, आपातकाल, राम रथ यात्रा और केंद्र सरकार में आडवाणी की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया।
आडवाणी ने भाजपा को दिया मजबूत वैचारिक आधार
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में आडवाणी के संगठनात्मक कौशल की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने में आडवाणी का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उनकी अगुवाई में भाजपा ने धीरे-धीरे भारतीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। मोदी ने चुनावी इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा ने लगातार अपना जनाधार बढ़ाया। वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटें घटकर 200 से नीचे आ गई थीं। इसके बाद 1996 में भाजपा पहली बार लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। प्रधानमंत्री के मुताबिक, आडवाणी की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनकी वैचारिक स्पष्टता और राजनीतिक विषयों पर गहरी पकड़ शामिल रही है। उन्होंने राजनीति में छद्म धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया और पार्टी के कार्यकर्ताओं को एक स्पष्ट वैचारिक दिशा दी।
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जोड़ी ने बनाई अलग पहचान
आडवाणी के राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके शुरुआती संगठनात्मक सफर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि आडवाणी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में राजस्थान में काम किया था। बाद में वह दिल्ली पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात और राजनीतिक साझेदारी अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मजबूत हुई। मोदी ने दोनों नेताओं के संबंधों को भारतीय राजनीति की एक अनूठी मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि कई दशकों तक दो प्रभावशाली नेताओं का एक साथ संगठन के लिए काम करना असाधारण उपलब्धि है। दोनों ने व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर पार्टी के विस्तार के लिए योगदान दिया।आडवाणी वर्ष 1967 में दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल के अध्यक्ष बने थे। वर्ष 1970 में उन्होंने संसदीय राजनीति में कदम रखा। आगे चलकर उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली और केंद्र सरकार में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
आपातकाल के खिलाफ संघर्ष को बताया लोकतंत्र की रक्षा की मिसाल
प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को आडवाणी के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि उस दौर में आडवाणी लोकतंत्र की रक्षा के लिए मजबूती से खड़े रहे।मोदी ने आडवाणी की पुस्तक ‘A Prisoner’s Scrap-Book’ का भी उल्लेख किया। इसमें आपातकाल से जुड़े उनके अनुभवों को दर्ज किया गया है। प्रधानमंत्री ने किताब के एक अध्याय ‘A Tale of Two Emergencies’ का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें भारत में जून 1975 में शुरू हुए आपातकालीन घटनाक्रम की तुलना 1933 के नाजी जर्मनी से की गई है।
गृह मंत्री के तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा को दी प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने आडवाणी के प्रशासनिक अनुभव और सुरक्षा मामलों में उनके योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में आडवाणी ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। मोदी के अनुसार, आडवाणी ने सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता और परिस्थितियों में सुधार के लिए काम किया। आतंकवाद के खिलाफ उनका सख्त रुख भी देश की सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद विरोधी कानूनों और सुरक्षा संबंधी फैसलों में उनकी भूमिका को भी याद किया।
राम रथ यात्रा ने भारतीय राजनीति में पैदा किया नया मोड़
आडवाणी के राजनीतिक सफर में वर्ष 1990 की सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई राम रथ यात्रा का विशेष महत्व रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को भारतीय राजनीति का एक ऐतिहासिक घटनाक्रम बताया।उन्होंने बताया कि वह खुद इस यात्रा की योजना बनाने और उसके संचालन से जुड़े रहे थे। यात्रा की शुरुआत के समय सोमनाथ में मौजूद रहना उनके लिए यादगार अनुभव था। मोदी ने आडवाणी की ऊर्जा, इच्छाशक्ति और लगातार यात्रा करने की क्षमता की भी तारीफ की। प्रधानमंत्री ने बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी और गुजरात में तत्कालीन चिमनभाई पटेल सरकार से समर्थन वापस लेने के फैसले का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इन घटनाओं के जरिए भाजपा ने अपने वैचारिक मुद्दों और राम मंदिर के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दिया।
आडवाणी की निजी जिंदगी और किताबों से लगाव का भी जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में आडवाणी के व्यक्तिगत स्वभाव और रुचियों से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि आडवाणी को किताबें पढ़ने और अखबारों के अध्ययन में विशेष रुचि है। इसके अलावा उन्हें सिनेमा और थिएटर भी पसंद हैं। मोदी ने उनकी पुस्तक ‘My Country My Life’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें आडवाणी की ऐतिहासिक समझ और देश के प्रति उनके दृष्टिकोण की झलक मिलती है। उन्होंने आडवाणी के सिंधी संस्कृति से गहरे जुड़ाव को भी याद किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि लेह के निकट सिंधु दर्शन पूजा को लोकप्रिय बनाने में आडवाणी ने महत्वपूर्ण प्रयास किए थे। इस धार्मिक आयोजन में वह स्वयं आडवाणी और जॉर्ज फर्नांडिस के साथ शामिल हुए थे। पीएम मोदी ने आडवाणी की पत्नी कमला आडवाणी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कमला आडवाणी उनके सार्वजनिक जीवन में लगातार सहयोग और शक्ति का महत्वपूर्ण आधार रही हैं।
BJP मुख्यालय में जन्मदिन पर विशेष आयोजन
लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन के अवसर पर दिल्ली स्थित भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के शामिल होने की जानकारी दी गई। पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर भी कार्यक्रम की जानकारी साझा की गई। इस मौके पर आडवाणी के राजनीतिक जीवन, संगठन के प्रति समर्पण और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया गया।
कराची से शुरू हुआ सफर, भारत रत्न तक पहुंचा राजनीतिक जीवन
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था, जो उस समय अविभाजित भारत का हिस्सा था। उन्होंने वर्ष 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ स्वयंसेवक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। आडवाणी भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वह तीन बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उनका पहला कार्यकाल 1986 से 1990 तक रहा। इसके बाद उन्होंने 1993 से 1998 और 2004 से 2005 तक पार्टी की कमान संभाली। वर्ष 1990 की राम रथ यात्रा को भाजपा के राजनीतिक विस्तार का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। आडवाणी ने 1999 से 2004 तक केंद्र सरकार में गृह मंत्री और 2002 से 2004 तक उपप्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। देश और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 2015 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके बाद वर्ष 2024 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मार्च 2024 में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति के कई महत्वपूर्ण बदलावों का साक्षी रहा है। उनके 99वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी का यह विशेष लेख एक बार फिर भाजपा के निर्माण और विस्तार में उनके योगदान को चर्चा में ले आया है।