डेस्क। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जीआरपी ने मानव तस्करी से जुड़े एक मामले का खुलासा करते हुए चार म्यांमार नागरिक युवतियों को बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, इन युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से अवैध तरीके से भारत लाया गया था और उनकी शादी कराने की तैयारी थी। मामले में दो म्यांमार नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, बरामद चारों युवतियां भी भारत में अवैध रूप से दाखिल हुई थीं। इनमें से दो के नाबालिग होने की जानकारी सामने आई है।
ट्रेन में संदिग्ध युवक की सूचना से खुला मामला
जीआरपी कंट्रोल रूम, भोपाल को सूचना मिली थी कि स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के जनरल कोच में एक संदिग्ध विदेशी युवक सफर कर रहा है। सूचना में बताया गया था कि युवक कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क से जुड़ा है, जो म्यांमार की युवतियों को अवैध तरीके से भारत लाकर उनकी शादी कराने का काम करता है। सूचना मिलने के बाद ग्वालियर जीआरपी ने ट्रेन में जांच शुरू की। पुलिस टीम ने संदिग्ध युवक की पहचान मुबीन के रूप में की। उसकी उम्र करीब 25 वर्ष बताई गई है और वह म्यांमार का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक, वह फिलहाल हैदराबाद में रह रहा था। जांच के दौरान उसके साथ कुछ युवतियां भी मिलीं, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
पूछताछ में सामने आया दूसरा आरोपी
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान मुबीन ने अपने एक साथी के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि मोहम्मद हसन नाम का करीब 35 वर्षीय म्यांमार नागरिक कुछ युवतियों के साथ उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ठहरा हुआ है। इसके बाद जीआरपी की टीम ने जानकारी की पुष्टि की और अलीगढ़ में बताए गए ठिकाने पर कार्रवाई की। वहां से पुलिस ने मोहम्मद हसन को हिरासत में लिया और उसके साथ मौजूद युवतियों को भी बरामद कर लिया। पुलिस की कार्रवाई में कुल चार युवतियां मिलीं।
दो युवतियों के नाबालिग होने का दावा
जीआरपी के मुताबिक, बरामद चार युवतियों में से दो के नाबालिग होने की जानकारी सामने आई है। नाबालिगों को नियमों के अनुसार संरक्षण में रखा गया है। पुलिस अब उनकी उम्र और पहचान से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें भारत लाने और यहां अलग-अलग जगहों पर ले जाने में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
भाषा बनी पूछताछ में बड़ी चुनौती
युवतियों को स्थानीय भाषा या हिंदी का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने के कारण पुलिस को उनके बयान दर्ज करने में परेशानी हुई। बताया गया कि वे मुख्य रूप से रोहिंग्या और अपनी स्थानीय भाषा में बातचीत कर रही थीं। इसके बाद पुलिस ने अनुवाद की मदद ली। गूगल ट्रांसलेटर और एक द्विभाषी व्यक्ति की सहायता से युवतियों से बातचीत की गई और उनके बयान दर्ज किए गए।
कुतुपालोंग कैंप से भारत लाने का आरोप
पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से भारत लाया गया था। जांच के अनुसार, उन्हें उनके माता-पिता की सहमति होने की बात कहकर भारत लाया गया। आरोप है कि इसके लिए नदी और दुर्गम पहाड़ी रास्तों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें अवैध तरीके से भारतीय सीमा में प्रवेश कराया गया। हालांकि, इन दावों की पूरी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जम्मू और श्रीनगर में शादी कराने की थी कथित योजना
जीआरपी के मुताबिक, आरोपियों की योजना इन युवतियों को जम्मू और श्रीनगर ले जाकर उनकी शादी कराने की थी। पुलिस को आशंका है कि यह मामला किसी बड़े मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इसी तरीके से अन्य युवतियों को भी बांग्लादेश से भारत लाया गया है।
दूसरे लोगों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। उनके पास से मिले दस्तावेजों और पूछताछ में सामने आई जानकारी की जांच की जा रही है। जीआरपी का कहना है कि मामले में सामने आए सुरागों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि युवतियों को भारत लाने, उन्हें अलग-अलग शहरों में ठहराने और शादी के नाम पर आगे भेजने के पीछे कितने लोग शामिल थे।फिलहाल चारों युवतियां पुलिस की निगरानी में हैं और नाबालिगों को नियमानुसार संरक्षण दिया गया है। मामले की जांच जारी है।