Home » देश » ड्रोन फोर्स पर वायुसेना प्रमुख का साफ जवाब: अलग विंग नहीं बनेगी, राफेल सौदा इसी साल, AMCA में देरी हुई तो दूसरे विकल्प पर होगा विचार

ड्रोन फोर्स पर वायुसेना प्रमुख का साफ जवाब: अलग विंग नहीं बनेगी, राफेल सौदा इसी साल, AMCA में देरी हुई तो दूसरे विकल्प पर होगा विचार

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल एपी सिंह का कार्यकाल इस महीने के आखिर में पूरा हो रहा है। कार्यकाल की उपलब्धियों और चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि व्यक्ति कभी संगठन से बड़ा नहीं होता और जो भी उपलब्धियां रहीं,. . .
  1. “व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं”: कार्यकाल के अंत में बोले एयरचीफ मार्शल एपी सिंह, राफेल डील, Su-57 और ड्रोन फोर्स पर रखी बात
  2. ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं, पांचवीं पीढ़ी का विमान जल्द चाहिए: विदाई से पहले वायुसेना प्रमुख ने गिनाईं प्राथमिकताएं
  3. हर साल चाहिए 36-40 फाइटर जेट: एयरचीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया, स्क्वाड्रन 30 से नीचे गईं तो क्या होगा

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल एपी सिंह का कार्यकाल इस महीने के आखिर में पूरा हो रहा है। कार्यकाल की उपलब्धियों और चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि व्यक्ति कभी संगठन से बड़ा नहीं होता और जो भी उपलब्धियां रहीं, वे पूरे संगठन की मेहनत का नतीजा हैं। उन्होंने कहा कि अगर कहीं किसी को लगता है कि वायुसेना खरी नहीं उतरी, तो संगठन का प्रमुख होने के नाते वे उसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं। एयरचीफ ने कहा कि वे कुल मिलाकर काफी संतुष्ट हैं। वायुसेना को खुद को साबित करने का मौका मिला और जिस तरह के निर्देश और हर तरफ से समर्थन मिला, वह सकारात्मक रहा। उनके अनुसार यह सिलसिला पिछले कुछ सालों से चल रहा है।

राफेल डील इसी वित्त वर्ष में पूरी होने की उम्मीद

मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) यानी राफेल सौदे पर एयरचीफ ने कहा कि अगर योजना के मुताबिक सब कुछ आगे बढ़ा तो यह डील इसी वित्त वर्ष में पूरी हो सकती है। भारत ने फरवरी 2026 में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह खरीद फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार समझौते के तहत होनी है।

AMCA में देरी हुई तो विकल्प पर होगा विचार, Su-57 पर अभी फैसला नहीं

एयरचीफ ने कहा कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम में देरी की स्थिति में वायुसेना को किसी दूसरे लड़ाकू विमान की खरीद पर भी विचार करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि रूस ने Su-57 देने की पेशकश की है, लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। रूस या किसी और देश से खरीद का निर्णय रक्षा मंत्रालय को करना है।

स्क्वाड्रन 30 से नीचे न जाएं, इसलिए हर साल चाहिए 36 से 40 फाइटर जेट

लगातार घटती फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या पर एयरचीफ ने कहा कि अगर संख्या को 30 से नीचे जाने से रोकना है, तो हर साल 36 से 40 लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी।

“अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं”, ड्रोन को मौजूदा ढांचे का हिस्सा बनाने पर जोर

एयरफोर्स चीफ ने अलग से ड्रोन फोर्स बनाने की संभावना से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मानवरहित हवाई प्रणाली और लॉइटरिंग म्यूनिशन को वायुसेना के मौजूदा हथियारों और ऑपरेशनल ढांचे में ही शामिल किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक ड्रोन कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं, बल्कि वायुसेना की क्षमता का क्रमिक विकास हैं। वायुसेना ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन की संख्या बढ़ा रही है और इन्हें सभी क्षमताओं के साथ मिलकर इस्तेमाल करना होगा।

पाकिस्तान को चीनी पांचवीं पीढ़ी के विमान मिलने की खबरें चिंता की बात, पर हालात काबू में

चीन के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने पर एयरचीफ ने कहा कि रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान निकट भविष्य में इन्हें हासिल कर सकता है। यह भी खबरें हैं कि उसके पायलट चीन में पहले से प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने माना कि यह चिंता की बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि स्थिति हाथ से निकल गई है। उन्होंने कहा कि भारत के पास जरूरी क्षमताएं हैं और मामला सिर्फ एक विमान का नहीं, बल्कि उसे पूरी सैन्य प्रणाली से जोड़ने का है। पाकिस्तान के पास पहले भी दूसरे प्लेटफॉर्म रहे हैं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वे कोई खास असर नहीं छोड़ सके।

पांचवीं पीढ़ी का विमान जल्द शामिल करना प्राथमिकता, AMCA को तेज करने की जरूरत

एयरचीफ ने कहा कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को जल्द से जल्द वायुसेना में शामिल करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके लिए AMCA कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाना होगा, और देरी हुई तो वैकल्पिक फैसले लेने पड़ेंगे।

कैप्टन स्मित मछार की तारीफ: “हर भारतीय को गर्व”

फ्लाईदुबई की उड़ान में हुए हमले के दौरान सूझबूझ दिखाने वाले कैप्टन स्मित मछार की एयरचीफ ने सराहना की। उन्होंने कहा कि कैप्टन ने असाधारण रूप से अच्छा काम किया और अपनी सूझबूझ के साथ शारीरिक व मानसिक दृढ़ता दिखाई। हर भारतीय को उन पर गर्व है और यह सबके लिए एक सीख है। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसी घटना भारतीय वायुसेना के संदर्भ में लागू नहीं होती।

नीट पेपर पहुंचाने में वायुसेना की मदद पर बोले- तैयारी की कीमत पर नहीं

हाल ही में नीट परीक्षा के पेपर पहुंचाने में वायुसेना की मदद ली गई थी। इस पर एयरचीफ ने कहा कि किसी सरकारी प्रक्रिया में मदद की क्षमता हो तो वह करनी चाहिए, बशर्ते यह वायुसेना की तैयारी की कीमत पर न हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसा नहीं होता और रक्षा मंत्रालय भी यह समझता है। वायुसेना को वही काम सौंपे जाते हैं, जिनसे उसकी तैयारी प्रभावित न हो।

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