मुंबई। तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक और दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार गोवा की मापुसा अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था और निर्देश दिया था कि इसकी प्रमाणित पावती (सरेंडर सर्टिफिकेट) अदालत में पेश की जाए। इसी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाई थी 10 साल की सजा
यह पूरा मामला साल 2013 का है, जब गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान एक जूनियर महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया था।
- साल 2021 में मापुसा की एक निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने तरुण तेजपाल को इस मामले से बरी कर दिया था।
- इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया और 10 साल के सश्रम कारावास (कठोर कारावास) की सजा सुनाई।
सुप्रीम कोर्ट में अपील और 22 सितंबर पर टिकी नजरें
बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि तेजपाल तय समयसीमा के भीतर आत्मसमर्पण कर उसका प्रमाण पत्र अदालत में दाखिल कर देते हैं, तो उनकी सजा के खिलाफ दायर अपील पर 22 सितंबर को सुनवाई की जाएगी। अब चूंकि तरुण तेजपाल ने सरेंडर कर दिया है, इसलिए सबकी निगाहें आगामी 22 सितंबर पर टिकी हैं, जब सर्वोच्च अदालत में उनकी अपील पर सुनवाई होगी।