कोलकाता : नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद लापता हुईं पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ राजनेता मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा भौमिक रॉय को लेकर अब एक नई उम्मीद जगी है। परिवार का मानना है कि शर्मिष्ठा समेत लापता हुए 32 भारतीय पर्यटक संभवतः सुरक्षित हो सकते हैं और चीन के तिब्बत क्षेत्र में किसी सुरक्षित स्थान या राहत शिविर में रखे गए हो सकते हैं। हालांकि, इस संभावना की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शर्मिष्ठा के पति और मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने भारत सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि भारत का विदेश मंत्रालय चीन के विदेश मंत्रालय से संपर्क कर यह पता लगाए कि क्या नेपाल-चीन सीमा पार करने वाले भारतीय पर्यटकों में शर्मिष्ठा और अन्य लापता लोग भी शामिल हैं।
आखिरी बार 25 अगस्त की रात हुई थी बात
परिवार के अनुसार, 44 वर्षीय शर्मिष्ठा 21 अगस्त को एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से अकेले नेपाल घूमने गई थीं। यात्रा के दौरान वह अपने परिवार के संपर्क में थीं। 25 अगस्त की रात उन्होंने आखिरी बार अपने पति शुभ्रांशु रॉय से फोन पर बात की थी। इसके अगले दिन, 26 अगस्त की सुबह नेपाल के चीन-तिब्बत सीमा से सटे इलाके में अचानक भीषण हड़पान/बाढ़ ने तबाही मचा दी। प्राकृतिक आपदा के बाद से शर्मिष्ठा से परिवार का संपर्क टूट गया और तब से उनकी कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि शर्मिष्ठा इस समय कहां हैं और उनकी सुरक्षित स्थिति की कोई पुष्टि क्यों नहीं हो पा रही है।
चीन में सुरक्षित होने की संभावना ने जगाई उम्मीद
अब सामने आई कुछ सूचनाओं ने रॉय परिवार को एक नई उम्मीद दी है। परिवार का दावा है कि आपदा वाले दिन सुबह करीब 9 बजे चीनी सीमा अधिकारियों ने कई चेकपॉइंट बंद कर दिए थे। बताया जा रहा है कि कुछ पर्यटक समूहों को सुरक्षा के मद्देनजर सीमा क्षेत्र से हटाकर अंदरूनी सैन्य अथवा राहत शिविरों की ओर ले जाया गया था। इसी जानकारी के आधार पर परिवार को आशंका है कि नेपाल से सीमा पार कर चुके कुछ भारतीय पर्यटक भी चीनी प्रशासन की निगरानी में सुरक्षित स्थान पर हो सकते हैं। शुभ्रांशु रॉय का कहना है कि यदि इस संभावना की सरकारी स्तर पर जांच हो जाए और यह पता लगाया जा सके कि सीमा के दूसरी ओर किसी शिविर में भारतीय पर्यटक मौजूद हैं या नहीं, तो 32 परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
विदेश मंत्रालय से सीधी अपील
लापता पत्नी की तलाश के लिए शुभ्रांशु रॉय ने भारत के विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने सरकार से अपील की है कि चीन के विदेश मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों के साथ तत्काल संपर्क किया जाए।
उनका कहना है कि इस समय सबसे जरूरी है कि अलग-अलग माध्यमों से सामने आ रही सूचनाओं की आधिकारिक पुष्टि की जाए। यदि भारतीय पर्यटकों के सीमा पार सुरक्षित पहुंचने का कोई रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसके आधार पर उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है।शुभ्रांशु की अपील है कि भारत सरकार इस मामले को चीन के समक्ष उच्च स्तर पर उठाए और लापता भारतीय नागरिकों की पहचान तथा लोकेशन की जानकारी हासिल करे।
‘सीमा पार किसी शिविर में हैं तो पता लगाया जाए’
शुभ्रांशु रॉय ने कहा कि यदि सीमा पार किसी सुरक्षित शिविर में भारतीय पर्यटकों के होने की संभावना है, तो सरकार को इस दिशा में तत्काल जांच करनी चाहिए। उनका कहना है कि “सीमा पार किसी शिविर में परिवार के सदस्य हैं या नहीं, यह सत्यापित हो जाए तो 32 परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।” परिवार का कहना है कि वे किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहते। जब तक शर्मिष्ठा की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक सभी संभावित सुरागों की जांच जरूरी है।
यात्रा एजेंसियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में यात्रा एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी शुभ्रांशु रॉय ने सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, शर्मिष्ठा एक भारतीय पर्यटन संस्था के माध्यम से नेपाल गई थीं। नेपाल पहुंचने के बाद पर्यटकों की जिम्मेदारी एक दूसरी पर्यटन एजेंसी ने संभाली, जबकि तिब्बत सीमा के पास एक चीनी ट्रैवल एजेंसी पर्यटकों के प्रबंधन से जुड़ी थी। अब परिवार यह जानना चाहता है कि यात्रा के अलग-अलग चरणों में पर्यटकों का रिकॉर्ड किसके पास था और सीमा क्षेत्र में प्रवेश करने वाले यात्रियों की सूची क्या थी। परिवार की मांग है कि संबंधित ट्रैवल एजेंसियों के रिकॉर्ड, यात्रियों की सूची, इमिग्रेशन दस्तावेज और उपलब्ध वीडियो फुटेज की पूरी तरह जांच की जाए।
वायरल बस वीडियो की भी हो जांच
हाल में सामने आए एक बस वीडियो ने भी परिवार की उम्मीद और सवाल दोनों बढ़ा दिए हैं। शुभ्रांशु रॉय ने मांग की है कि वीडियो में दिखाई दे रहे पर्यटकों की पहचान की जाए और बस से जुड़े सभी यात्रियों के दस्तावेजों की जांच की जाए। उनका कहना है कि केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो या अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर किसी व्यक्ति को मृत या लापता मान लेना उचित नहीं होगा। प्रत्येक यात्री की पहचान, यात्रा दस्तावेज और अंतिम ज्ञात लोकेशन का आधिकारिक मिलान किया जाना चाहिए।
तिब्बत सीमा पर संचार बना सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल-चीन सीमा से लगे तिब्बती इलाकों में सामान्य परिस्थितियों में भी संचार और आवाजाही पर कई तरह की पाबंदियां रहती हैं। प्राकृतिक आपदा के बाद स्थिति और कठिन हो सकती है। परिवार का अनुमान है कि यदि कुछ पर्यटक सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए गए हैं, तो संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण वे अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे होंगे। यही संभावना फिलहाल रॉय परिवार को उम्मीद दे रही है। हालांकि, जब तक चीनी अथवा भारतीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे केवल एक संभावना के तौर पर ही देखा जा रहा है।
मौत की खबरों पर भी आधिकारिक पुष्टि की मांग
आपदा के बाद अलग-अलग सरकारी और गैर-सरकारी माध्यमों से पर्यटकों की मौत तथा उनके लापता होने से जुड़ी कई तरह की सूचनाएं सामने आई हैं। परिवार इन सूचनाओं को लेकर भी स्पष्टता चाहता है। शुभ्रांशु रॉय की मांग है कि भारतीय और चीनी प्रशासन उपलब्ध यात्री रिकॉर्ड, इमिग्रेशन डेटा, बसों के रिकॉर्ड, ट्रैवल एजेंसी के दस्तावेज और वीडियो फुटेज का मिलान करें। परिवार का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक उसके बारे में सामने आ रही विरोधाभासी खबरों को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए।
32 परिवारों की निगाह अब सरकार की पहल पर
शर्मिष्ठा भौमिक रॉय के परिवार के साथ-साथ अन्य लापता भारतीय पर्यटकों के परिवार भी अब सरकार की ओर देख रहे हैं। इन परिवारों की सबसे बड़ी मांग है कि भारत और चीन के बीच तत्काल आधिकारिक स्तर पर समन्वय स्थापित किया जाए। अगर चीन के संबंधित अधिकारियों के पास सीमा पार पहुंचे भारतीय यात्रियों का कोई रिकॉर्ड है, तो उसकी जांच से लापता लोगों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल शर्मिष्ठा भौमिक रॉय के बारे में कोई ऐसी आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं है, जिससे उनकी वर्तमान स्थिति निश्चित रूप से सामने आ सके। लेकिन सीमा पार सुरक्षित होने की संभावना ने परिवार में एक बार फिर उम्मीद जगा दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या शर्मिष्ठा समेत लापता 32 भारतीय पर्यटक चीन के तिब्बत क्षेत्र में किसी सुरक्षित स्थान पर हैं?
इस सवाल का जवाब भारत और चीन के बीच आधिकारिक स्तर पर होने वाली जांच और समन्वय से ही सामने आ सकता है। रॉय परिवार को उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में तेजी से कदम उठाएगी और जल्द ही लापता लोगों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।