MCX पर सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, दिसंबर वायदा सोना 1.39 लाख रुपये के नीचे; अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर टिकी बाजार की नजर
नई दिल्ली। सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए मंगलवार की सुबह बड़ी खबर लेकर आई। घरेलू वायदा बाजार MCX में कारोबार शुरू होते ही दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलने के महज एक घंटे के भीतर चांदी 4,429 रुपये प्रति किलो तक टूट गई, जबकि सोने की कीमत में भी 1,386 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। धनतेरस और दिवाली से पहले आई इस गिरावट ने खरीदारों का ध्यान एक बार फिर सोने-चांदी के बाजार की ओर खींचा है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या कीमतों में आई यह गिरावट खरीदारी का सही मौका है या आने वाले दिनों में सोना-चांदी और सस्ता हो सकता है?
MCX पर सोने-चांदी का क्या रहा भाव?
मंगलवार सुबह 10 बजे तक MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,386 रुपये गिरकर 1,38,875 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी में इससे भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। चांदी 2 फीसदी से अधिक टूटकर 1,79,200 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। इस दौरान इसकी कीमत में 4,429 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में अचानक आई इस कमजोरी से निवेशकों और त्योहारों के लिए खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों के बीच हलचल बढ़ गई है।
क्या अभी सोना खरीदना फायदेमंद होगा?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू बाजार में आने वाले कुछ दिनों तक सोने की कीमत 1,36,500 रुपये से 1,41,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रह सकती है। इसका मतलब है कि सोने की कीमतों में फिलहाल उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। ऐसे में एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय अलग-अलग चरणों में खरीदारी करना जोखिम को संतुलित करने का एक तरीका हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की लंबी अवधि की निवेश संबंधी अहमियत बनी हुई है, लेकिन निकट भविष्य में बड़ी तेजी की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई दे रही है।
अमेरिका के फेडरल रिजर्व के फैसले से तय होगी सोने की चाल
सोने की कीमतों पर दबाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता है। बाजार में आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। ऊंची ब्याज दरों के कारण निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले विकल्प आकर्षक बने रहते हैं, जिससे सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है। पिछले एक सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 3 फीसदी गिर चुकी है। इस दौरान सोना लगभग एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। खास बात यह है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर की कमजोरी के बावजूद सोने को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया। फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की आशंका ने कीमतों पर दबाव बनाए रखा।
विशेषज्ञों की क्या है राय?
कोटक महिंद्रा एएमसी के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले एक सप्ताह के दौरान सोने की कीमत में करीब 3 फीसदी की गिरावट आई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख को लेकर बनी अनिश्चितता ने सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। वहीं, एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट और कमोडिटी एवं करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी का कहना है कि फिलहाल सोने की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। उनके मुताबिक, घरेलू बाजार में सोना करीब 1,38,300 रुपये और अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड करीब 3,900 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर है।
धनतेरस से पहले और सस्ता होगा सोना-चांदी?
त्योहारी सीजन से पहले सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट खरीदारों के लिए राहत की खबर हो सकती है। लेकिन बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि कीमतें यहीं से संभलेंगी या इनमें और गिरावट आएगी। आने वाले दिनों में अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेत, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियां सोने-चांदी की दिशा तय कर सकती हैं।
खरीदारों के लिए जरूरी बात
केवल कीमतों में गिरावट देखकर खरीदारी का फैसला न करें। आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज, GST और शुद्धता की भी जांच करें। निवेश के लिहाज से खरीदारी करने वालों को बाजार के उतार-चढ़ाव और अपने निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।