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Dhanteras 2026 : धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा कब और कैसे करें? जानें शुभ मुहूर्त, षोडशोपचार विधि, आरोग्य मंत्र, आरती और समुद्र मंथन की पौराणिक कथा।

दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस के पावन पर्व से होती है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। धनतेरस को धनत्रयोदशी और भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में भी. . .

धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर के साथ होती है आरोग्य के देवता धन्वंतरि की उपासना, जानें पूजा का सही समय, षोडशोपचार विधि, प्रचलित आरती और समुद्र मंथन से जुड़ी पौराणिक कथा

डेस्क । दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस के पावन पर्व से होती है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। धनतेरस को धनत्रयोदशी और भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। यही वजह है कि धनतेरस पर केवल धन-संपत्ति की प्राप्ति के लिए ही नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए भी भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर के साथ भगवान धन्वंतरि की आराधना करने की परंपरा है। धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी भी की जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है। आइए जानते हैं धनतेरस 2026 पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, संपूर्ण विधि, आरोग्य प्राप्ति का मंत्र और उनकी प्राकट्य कथा।

धनतेरस 2026 पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। इस समय भगवान की आराधना करने के साथ परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना की जाती है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, धनतेरस 2026 पर पूजा के शुभ समय इस प्रकार हैं:

मुहूर्तसमय
धन्वंतरि पूजा का शुभ मुहूर्तशाम 6:02 से 7:57 बजे तक
प्रदोष कालशाम 5:33 से 8:09 बजे तक
वृषभ कालशाम 6:02 से 7:57 बजे तक

पूजा का विशेष समय: शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। हालांकि, पूजा का समय स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एक जगह एकत्र कर लेनी चाहिए, ताकि पूजा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।

पूजन के लिए सामान्यतः इन वस्तुओं की आवश्यकता होती है:

  • भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या तस्वीर
  • पूजा की चौकी और पीला या लाल कपड़ा
  • गंगाजल और शुद्ध जल
  • हल्दी, चंदन और अक्षत
  • फूल और फूलों की माला
  • धूप और अगरबत्ती
  • घी या तेल का दीपक
  • फल और मिठाई का भोग
  • पान, सुपारी और लौंग
  • कपूर और आरती की थाली
  • पंचामृत
  • तुलसी दल और अन्य पूजन सामग्री

अपनी पारिवारिक परंपरा और उपलब्धता के अनुसार पूजा सामग्री में बदलाव किया जा सकता है।

धनतेरस 2026 पर भगवान धन्वंतरि की पूजा कैसे करें? जानें पूरी विधि

धार्मिक परंपरा में भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इसमें देवता को 16 प्रकार से पूजन और सम्मान अर्पित किया जाता है। सामान्य गृहस्थ पूजा में भी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इन उपचारों को शामिल किया जा सकता है।

1. पूजा स्थल की सफाई करें

सबसे पहले घर के पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

2. दीपक और धूप जलाएं

पूजा शुरू करने से पहले भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद धूप और अगरबत्ती अर्पित करें। मन को शांत करके पूजा का संकल्प लें।

3. भगवान का आवाहन करें

हाथ जोड़कर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें और परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, सुख और दीर्घायु की प्रार्थना करें।

4. तिलक और अक्षत अर्पित करें

भगवान के मस्तक पर हल्दी और चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत यानी साबुत चावल अर्पित करें।

5. फूल और माला चढ़ाएं

भगवान धन्वंतरि को सुगंधित फूल और फूलों की माला अर्पित करें। इसके बाद फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य भोग के रूप में चढ़ाएं।

6. धन्वंतरि मंत्र का जाप करें

पूजा के दौरान भगवान धन्वंतरि के आरोग्य मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं।

7. भगवान की आरती करें

मंत्र जाप के बाद कपूर या घी के दीपक से भगवान धन्वंतरि की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य आरती में शामिल होकर सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना करें।

8. दीपदान करें

पूजा समाप्त होने के बाद घर के मुख्य द्वार, आंगन और अन्य स्थानों पर दीपक जलाएं। धनतेरस की शाम यमराज के नाम से भी दीपदान करने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है।

भगवान धन्वंतरि का आरोग्य प्राप्ति मंत्र

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करते समय उनके विशेष मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र के जाप से आरोग्य, सुख और कल्याण की कामना की जाती है।

धन्वंतरि भगवान का विशेष मंत्र:

ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये।

अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय।

त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप।

श्री धन्वंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

इस मंत्र का जाप करते समय भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश धारण किए हुए स्वरूप का ध्यान करें। पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्यों के स्वस्थ और निरोगी रहने की प्रार्थना करें।

धनतेरस पर करें भगवान धन्वंतरि की आरती

मंत्र जाप के बाद भगवान धन्वंतरि की आरती करने की परंपरा है। यहां प्रचलित धन्वंतरि आरती के बोल दिए गए हैं।

ॐ जय धन्वन्तरि देवा, स्वामी जय धन्वन्तरि जी देवा।

जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।

देवासुर के संकट आकर दूर किए॥

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।

सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया॥

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।

आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी॥

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।

असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे॥

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।

वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा॥

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

धन्वन्तरिजी की आरती जो कोई नर गावे।

रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे॥

स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने की पौराणिक कथा

हिंदू धार्मिक ग्रंथों में भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य का संबंध समुद्र मंथन से बताया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया गया था। इस मंथन में भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण करके मंदराचल पर्वत को आधार दिया था। वासुकी नाग को रस्सी बनाकर देवताओं और असुरों ने समुद्र का मंथन शुरू किया। समुद्र मंथन से एक के बाद एक कई दिव्य रत्न और वस्तुएं प्रकट हुईं। इन्हीं में भगवान धन्वंतरि भी प्रकट हुए। मान्यता है कि उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है। धार्मिक परंपरा में उन्हें देवताओं का वैद्य तथा संपूर्ण मानव जगत को आरोग्य का मार्ग दिखाने वाला देवता कहा गया है। इसी पौराणिक मान्यता के कारण उनके प्राकट्य दिवस को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन उनकी पूजा करके लोग अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और रोगों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का धार्मिक महत्व

धनतेरस को केवल धन और संपत्ति से जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि यह पर्व अच्छे स्वास्थ्य के महत्व का भी संदेश देता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करके लोग अपने परिवार के निरोगी जीवन की कामना करते हैं।

धनतेरस पर उनकी उपासना के कुछ प्रमुख धार्मिक महत्व इस प्रकार हैं:

  • आरोग्य की कामना: भगवान धन्वंतरि से परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है।
  • दीर्घायु का आशीर्वाद: धार्मिक मान्यता के अनुसार, उनकी आराधना लंबी और स्वस्थ आयु की कामना से जुड़ी है।
  • आयुर्वेद का सम्मान: यह पर्व चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा को भी याद करने का अवसर है।
  • सुख-समृद्धि की कामना: मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर के साथ धन्वंतरि की पूजा करके घर में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

धनतेरस पर पूजा के बाद क्यों जलाया जाता है यम दीपक?

धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपक जलाने की भी विशेष परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने से अकाल मृत्यु के भय से रक्षा होती है। परंपरा के अनुसार, यह दीपक यमराज को समर्पित किया जाता है। यम दीपदान करते समय परिवार की सुख-शांति, सुरक्षा और दीर्घायु की कामना की जाती है। इसके अलावा घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर भी दीपक जलाए जाते हैं।

धनतेरस 2026: आरोग्य और समृद्धि का पर्व

धनतेरस का पर्व हमें यह याद दिलाता है कि जीवन में धन-संपत्ति के साथ अच्छा स्वास्थ्य भी बेहद जरूरी है। इसी भावना के साथ इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। इस धनतेरस पर विधि-विधान से भगवान धन्वंतरि का पूजन करें, उनके मंत्रों का जाप करें और परिवार के सभी सदस्यों के स्वस्थ जीवन की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से की गई भगवान धन्वंतरि की आराधना से जीवन में आरोग्य, सुख, शांति और मंगल की कामना पूर्ण होती है।

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