नई दिल्ली: भारत ने अपनी सामरिक ताकत को और मजबूत करते हुए परमाणु क्षमता वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा के चांदीपुर तट से स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड (SFC) द्वारा किए गए इस परीक्षण से देश की रक्षा क्षमता में एक बड़ा इजाफा हुआ है।
ड्रैगन के रणनीतिक ठिकाने अब भारत की जद में
अग्नि-4 की मारक क्षमता करीब 4,000 किलोमीटर है। इस लंबी रेंज की वजह से चीन के बड़े रणनीतिक हिस्से अब सीधे भारत के दायरे में आ गए हैं। चीन के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और मध्य एशिया के कुछ हिस्से भी इसकी पहुंच में आते हैं, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर भारत का दबदबा काफी बढ़ गया है।
मोबाइल लॉन्चर से कहीं भी तुरंत तैनाती
यह मिसाइल दो चरणों वाले सॉलिड-प्रोपेलेंट सिस्टम पर काम करती है और करीब 1,000 किलोग्राम तक पेलोड ले जा सकती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे मोबाइल टैंडेम लॉन्चर के जरिए आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर पलक झपकते ही दागा जा सकता है।
3000 डिग्री तापमान को मात देने वाली तकनीक
अग्नि-4 में बेहद आधुनिक री-एंट्री हीट शील्ड लगाई गई है। जब मिसाइल आसमान से वापस धरती की तरफ लौटती है, तो उस दौरान पैदा होने वाले 3,000 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा के तापमान को यह आसानी से झेल लेती है। इसके बावजूद इसके अंदर लगे कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य स्थिति में काम करते रहते हैं।
लंबी दूरी पर भी अचूक निशाना
यह मिसाइल अपनी बेहतरीन सटीकता के लिए जानी जाती है। 4,000 किलोमीटर दूर लक्ष्य पर वार करने के बावजूद इसका निशाना 100 मीटर से कम के एरर मार्जिन पर सटीक बैठता है। इसमें अत्याधुनिक गाइडेंस सिस्टम और मूविंग नोजल का इस्तेमाल किया गया है।
अग्नि-2 और अग्नि-5 के बीच की मजबूत कड़ी
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अग्नि-4 लगभग 2,000 किमी रेंज वाली अग्नि-2 और 5,000 किमी से ज्यादा रेंज वाली अग्नि-5 के बीच की एक बहुत जरूरी कड़ी है। यह परमाणु और पारंपरिक—दोनों तरह के हथियारों को ले जाने में सक्षम है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस कामयाबी के लिए SFC और DRDO के वैज्ञानिकों को बधाई दी है और कहा है कि यह आधुनिक तकनीक के बल पर देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के संकल्प को साफ दिखाता है।