सोशल मीडिया पर ‘चक्रवात अर्नब’ की चर्चा
नई दिल्ली।बंगाल की खाड़ी में बने मौसम सिस्टम को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘चक्रवात अर्नब’ नाम से कई दावे वायरल हो रहे हैं। इन पोस्ट में ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में इसके गंभीर असर की बात कही जा रही है। दावों के बीच लोगों में भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि, भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ओर से स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल ‘अर्नब’ नाम का कोई आधिकारिक चक्रवाती तूफान घोषित नहीं किया गया है। मौजूदा मौसम प्रणाली को अभी डीप डिप्रेशन (गहरा दबाव) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
क्या ‘चक्रवात अर्नब’ नाम आधिकारिक है?
मौसम विभाग किसी मौसम प्रणाली को तभी चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखता है, जब उसकी अधिकतम निरंतर हवा की गति निर्धारित सीमा तक पहुंच जाती है। मौजूदा सिस्टम के उस श्रेणी में पहुंचने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अभी इसे ‘चक्रवात अर्नब’ कहना मौसम विभाग की आधिकारिक शब्दावली के अनुरूप नहीं है। यानी सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और मौसम विभाग की आधिकारिक जानकारी में अंतर है।
लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है
यह जरूर है कि किसी सिस्टम के चक्रवात नहीं बनने का मतलब यह नहीं कि उससे मौसम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय डीप डिप्रेशन के प्रभाव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। इसके प्रभाव का दायरा आसपास के इलाकों तक भी पहुंच सकता है। मौसम विभाग की चेतावनियों के मद्देनजर प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम प्रणाली के प्रभाव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा सकती हैं। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और मछुआरों के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। समुद्र में जाने वाले मछुआरों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव व्यवस्था को भी अलर्ट पर रखा जा सकता है।
आखिर किसी सिस्टम को चक्रवात कब कहा जाता है?
किसी मौसम प्रणाली को चक्रवाती तूफान की श्रेणी में पहुंचने के लिए उसकी तीव्रता का एक निश्चित स्तर तक बढ़ना जरूरी होता है। सामान्य तौर पर उष्णकटिबंधीय चक्रवात के विकास में समुद्र की गर्म सतह, पर्याप्त नमी और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियां अहम भूमिका निभाती हैं। गर्म समुद्री सतह से मिलने वाली ऊर्जा और नमी के कारण निम्न दबाव का क्षेत्र मजबूत हो सकता है। जब सिस्टम की हवा की गति निर्धारित सीमा तक पहुंचती है, तब उसे चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा जाता है और क्षेत्रीय नियमों के अनुसार उसे नाम दिया जाता है।
नामकरण कौन करता है?
उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की प्रक्रिया निर्धारित क्षेत्रीय व्यवस्था के तहत होती है। किसी सिस्टम का नाम सोशल मीडिया पोस्ट या अनौपचारिक रिपोर्ट के आधार पर तय नहीं होता। यही वजह है कि किसी मौसम प्रणाली को आधिकारिक तौर पर चक्रवात घोषित किए जाने से पहले सोशल मीडिया पर चल रहे नामों और दावों पर भरोसा करना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल खबरों से रहें सावधान
मौसम से जुड़ी किसी भी गंभीर चेतावनी के समय सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो, गलत नक्शे और अपुष्ट दावे तेजी से वायरल होने लगते हैं। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी जानकारी के लिए IMD और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
फिलहाल क्या समझें?
- ‘चक्रवात अर्नब’ को लेकर सोशल मीडिया पर दावे वायरल हैं।
- मौजूदा सिस्टम को लेकर आधिकारिक मौसम वर्गीकरण को ही मानना चाहिए।
- डीप डिप्रेशन भी भारी बारिश और तेज हवाओं जैसी गंभीर मौसमी स्थिति पैदा कर सकता है।
- ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और IMD के अलर्ट पर नजर रखनी चाहिए।
- बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी वायरल पोस्ट या वीडियो को आगे शेयर करने से बचना चाहिए।
यानी फिलहाल सवाल ‘अर्नब’ नाम के चक्रवात से ज्यादा बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली के वास्तविक प्रभाव का है। सोशल मीडिया के दावों के बजाय IMD की आधिकारिक चेतावनी को ही मौसम की स्थिति का भरोसेमंद आधार माना जाना चाहिए।