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जयशंकर ने की पी4एम समिट की अध्यक्षता : अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर दियाजोर, बोले- वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई जरूरी

न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को वैश्विक शांति, सुरक्षा और विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसकी जरूरत केवल कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, उभरती तकनीक, आतंकवाद, वैश्विक आपूर्ति. . .

न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को वैश्विक शांति, सुरक्षा और विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसकी जरूरत केवल कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, उभरती तकनीक, आतंकवाद, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, विकास के लिए वित्त और भविष्य की महामारियों जैसे मुद्दों से निपटने के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा। जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अब तक हासिल की गई उपलब्धियां सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। इसलिए मौजूदा उपलब्धियों को सुरक्षित रखते हुए एक बेहतर और अधिक प्रभावी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने की दिशा में प्रयास जारी रहने चाहिए।

वैश्विक संकटों पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत

विदेश मंत्री ने मौजूदा संघर्षों और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए व्यावहारिक और लक्षित कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापक शांति समझौते की दिशा में बातचीत जारी रहते हुए भी किसी संघर्ष के विशिष्ट पहलुओं पर तत्काल कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त से जुड़े संकटों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समस्याओं को अपने आप हल होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। उनके मुताबिक, दुनिया को ऐसे कई क्षेत्रों में एक साथ काम करने की जरूरत है, जहां तत्काल सामूहिक कार्रवाई आवश्यक है।

नई तकनीक के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम और सुरक्षा ढांचा जरूरी

जयशंकर ने उभरती तकनीकों और नई क्षमताओं से पैदा होने वाली चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के साथ नई चिंताएं भी सामने आ रही हैं, इसलिए उनके इस्तेमाल से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियम और स्पष्ट सुरक्षा ढांचे यानी ‘गार्डरेल’ विकसित करना जरूरी है। उन्होंने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियों का भी जिक्र किया। जयशंकर ने कहा कि किसी एक देश, क्षेत्र या व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता से संकट का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में जोखिम कम करने और आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन देशों के हित समान हैं, उन्हें उन क्षेत्रों में मिलकर काम करने का भरोसा होना चाहिए, जहां सामूहिक कार्रवाई की स्पष्ट आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और नियमों के पालन पर जोर

विदेश मंत्री ने कहा कि बहुपक्षवाद को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों, नियमों और मानकों का पालन जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल बहुपक्षवाद की वकालत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे व्यवहार में भी मजबूत करना होगा। जयशंकर ने इसी संदर्भ में बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक देशों की भागीदारी और फैसलों में अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री से की मुलाकात

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान जयशंकर ने कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस से मुलाकात की। बैठक में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों पर चर्चा हुई। खास तौर पर भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की समीक्षा की गई। जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की।

नाउरू के राष्ट्रपति डेविड अडियांग से भी मुलाकात

विदेश मंत्री ने नाउरू के राष्ट्रपति डेविड अडियांग से भी मुलाकात की। जयशंकर ने प्रशांत द्वीपीय देश नाउरू के साथ भारत के मजबूत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत नाउरू के विकास में साझेदार के रूप में अपनी प्रतिबद्धता जारी रखेगा। जयशंकर की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब वैश्विक स्तर पर संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां और उभरती तकनीकों के नियमन जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में प्रमुख बने हुए हैं।

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