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नैनीताल में दूषित पानी का कहर: 2 की मौत के बाद 6 इंजीनियर सस्पेंड, हाई कोर्ट ने स्थिति को ‘महामारी’ बताया

नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति से फैली बीमारी के कारण दो लोगों की मौत हो गई है। इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा एक्शन लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर. . .

नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति से फैली बीमारी के कारण दो लोगों की मौत हो गई है। इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा एक्शन लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जल संस्थान और पेयजल निगम के कुल 6 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है।

कई गाँव प्रभावित, दो की मौत

ज्योलिकोट, बेलुवाखान, गेठिया और वीरभट्टी समेत कई गाँवों में दूषित पानी पीने से पीलिया और अन्य बीमारियाँ फैल गईं। इस प्रकोप के दौरान एक 16 वर्षीय छात्र और एक 26 वर्षीय महिला की जान चली गई। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमें तैनात कर ओआरएस और क्लोरीन की गोलियाँ वितरित कीं।

उत्तराखंड हाई कोर्ट का सख्त रुख

मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने मौजूदा हालात को ‘महामारी’ करार दिया। अदालत ने पानी की जाँच निजी प्रयोगशालाओं से कराने, सीवर और पेयजल की लाइनें आपस में न मिलने की पुष्टि करने तथा कुमाऊं क्षेत्र में जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

जिन अधिकारियों पर गिरी गाज, उनकी सूची

कर्तव्यों के निर्वहन में भारी लापरवाही बरतने के आरोप में सरकार ने निम्नलिखित अधिकारियों को निलंबित किया है:

  • जल संस्थान (हल्द्वानी) के प्रभारी अधीक्षण अभियंता
  • नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता
  • नैनीताल जल संस्थान के अपर सहायक अभियंता
  • पेयजल निगम (भीमताल) के अधिशासी अभियंता
  • पेयजल निगम के प्रभारी सहायक अभियंता
  • पेयजल निगम के कनिष्ठ अभियंता (इसके अलावा नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भी चेतावनी जारी की गई है।)

उत्तराखंड हाई कोर्ट का सख्त रुख और निर्देश

इस पूरे मामले का उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया था और मौजूदा हालात को ‘महामारी’ करार दिया था।

  • निजी लैब से जाँच के आदेश: कोर्ट ने पानी की गुणवत्ता की जाँच केवल विभागीय स्तर पर न कराकर निजी प्रयोगशालाओं से भी कराने के निर्देश दिए।
  • पाइपलाइनों की निगरानी: जल संस्थान और पेयजल निगम को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि सीवर और पेयजल की लाइनें आपस में न मिलें। इसके अलावा नैनीताल शहर में सीवर लीकेज और पानी के दूषित होने की जाँच के लिए 20 से 25 स्थानों से नमूने लेने के निर्देश दिए गए।
  • चिकित्सा व्यवस्था: कोर्ट ने निर्देश दिए कि यदि स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर कम पड़ें, तो बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाया जाए। साथ ही कुमाऊं क्षेत्र

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