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पंजाब में फिर साथ आएंगे भाजपा और अकाली दल? पीएम मोदी से सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद सियासी चर्चाएं तेज

नई दिल्ली। पंजाब की राजनीति में एक बार फिर भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की संसद. . .

नई दिल्ली। पंजाब की राजनीति में एक बार फिर भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की संसद भवन परिसर में हुई मुलाकात है। हालांकि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।

विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ीं गठबंधन की अटकलें

पंजाब में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा और अकाली दल चुनावी रणनीति को लेकर नए विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। दोनों दलों का करीब ढाई दशक तक गठबंधन रहा, लेकिन वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों की राहें अलग हो गई थीं।

सूत्रों के मुताबिक इन मुद्दों पर हुई चर्चा

अकाली दल के सूत्रों के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री मोदी से पंजाब की कानून-व्यवस्था, राज्य सरकार के कामकाज और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि, दोनों दलों की ओर से यह नहीं कहा गया है कि बैठक में किसी संभावित चुनावी गठबंधन पर बातचीत हुई।

केजरीवाल ने भी उठाया सवाल

प्रधानमंत्री और सुखबीर बादल की मुलाकात पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए लिखा, “तो क्या दोनों दल साथ आ रहे हैं?” इसके बाद राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला है।

भाजपा पहले कह चुकी है- 2027 का चुनाव अकेले लड़ेंगे

पिछले कई महीनों से भाजपा के वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से यह कहते रहे हैं कि पार्टी पंजाब विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। हालांकि, सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री मोदी की हालिया मुलाकात के बाद गठबंधन की संभावनाओं को लेकर एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूटा था साथ

भाजपा और शिरोमणि अकाली दल देश के सबसे पुराने राजनीतिक सहयोगियों में रहे हैं। दोनों दलों का गठबंधन लगभग 25 वर्षों तक चला। लेकिन वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होने का फैसला किया। इसी दौरान हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया था।

अलग-अलग चुनाव लड़ने का नहीं मिला खास फायदा

गठबंधन टूटने के बाद भाजपा और अकाली दल ने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा। दोनों दलों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों के फिर से साथ आने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं

प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नए सियासी समीकरणों की अटकलों को जरूर हवा दी है, लेकिन संभावित गठबंधन को लेकर अब तक भाजपा या शिरोमणि अकाली दल की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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