कोलकाता, 9 अगस्त: आरजी कर कांड के दो साल पूरे होने पर रविवार को राज्य के सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दो मिनट का मौन रखा गया। स्वास्थ्य भवन के निर्देश पर सुबह 11 बजे राज्यभर में स्वास्थ्यकर्मियों और अधिकारियों ने दिवंगत महिला डॉक्टर को श्रद्धांजलि दी।स्वास्थ्य भवन में स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय और स्वास्थ्य सचिव की मौजूदगी में अधिकारियों ने दो मिनट का मौन रखा। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आरजी कर मामले की जांच में यदि जांच एजेंसी को आवश्यकता महसूस होती है, तो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी पूछताछ की जा सकती है।
‘सच्चाई सामने आए, इसके लिए हम प्रतिबद्ध’
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए। इस घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी यह पता लगाए कि किसके निर्देश पर सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई थी।उन्होंने कहा कि इस मामले में कई लोगों के नाम सामने आए हैं। जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि घटना के दिन वे लोग वहां क्यों मौजूद थे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच एजेंसी को हर संभव सहयोग दिया जा रहा है।मंत्री ने कहा, “जांच की जरूरत महसूस होने पर अगर जांचकर्ता पूर्व मुख्यमंत्री से पूछताछ करना चाहते हैं, तो ऐसा किया जाना चाहिए।”
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में भी श्रद्धांजलि
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में भी दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत डॉक्टर को याद किया गया। कार्यक्रम में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद शांतनु सेन मौजूद रहे।इसके बाद आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्रों ने दिवंगत महिला डॉक्टर की प्रतीकात्मक प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
पीड़िता के पिता बोले- अब दोनों तरफ से चल रही है न्याय की कोशिश
दिवंगत महिला डॉक्टर के पिता ने कहा कि पहले न्याय पाने की कोशिश एकतरफा चल रही थी, लेकिन अब दोनों तरफ से प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनकी हर संभव मदद कर रही है।उन्होंने बताया कि सीबीआई में भी नई जांच टीम गठित की गई है और टीम अपने स्तर पर जानकारी जुटा रही है। उन्होंने कहा कि परिवार की ओर से भी न्याय के लिए दबाव बनाए रखने की कोशिश जारी है।
शांतनु सेन ने उठाए तत्कालीन सरकार पर सवाल
आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयोजित मौन कार्यक्रम में शामिल तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद शांतनु सेन ने भी मामले की जांच को लेकर तत्कालीन सरकार पर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि यदि तत्कालीन सरकार ने वास्तविक दोषियों को खोजने की कोशिश की होती और उन्हें सजा दिलाने की दिशा में काम किया होता, तो न्याय की प्रक्रिया इतनी कठिन नहीं होती।शांतनु सेन ने दावा किया कि कई रिपोर्टों से संकेत मिले थे कि इस मामले के पीछे एक से अधिक लोगों की भूमिका हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल संजय रॉय को दोषी साबित करने की कोशिश की गई और सबूतों को प्रभावित करने के प्रयासों से यह संकेत मिला कि तत्कालीन सरकार दोषियों को सजा दिलाने के बजाय उन्हें बचाने की कोशिश कर रही थी।उन्होंने कहा कि उन्हें नई सरकार से उम्मीद है कि वह मामले में सही तरीके से जांच कराएगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएगी।